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घग्गर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से साढ़े 5 फुट नीचे, 18.5 पहुंचा पानी
Updated Tue, 25 Sep 2018 12:19 AM IST
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घग्गर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से साढ़े 5 फुट नीचे, 18.5 पहुंचा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। तीन दिनों में जिले में 166 एमएम बारिश हुई है। जिससे पूरे जिले में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। गुहला क्षेत्र से गुजर रही घग्गर नदी में जलस्तर खतरे के निशान 24 फुट से महज साढ़े पांच फुट नीचे रह गया है। यह 18.5 फुट पर जा पहुंचा। जिस कारण इस क्षेत्र में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। कैथल, सीवन, राजौंद व चीका में बारिश में घरों की छतें गिर गईं। जिससे लोगों का भारी नुकसान पहुंचा है। गांव डीग व हाबड़ी में ज्यादा जलभराव के चलते सिंचाई विभाग ने पंप लगाए हैं। 1.10 लाख से अधिक हेक्टेयर में धान सहित कपास व सब्जियों की फसल में भी इस बारिश से भारी नुकसान की आशंका है। मंडियों में धान का सीजन ठप हो गया है।
तीन दिनों से लगातार बारिश जारी है। रविवार रात भर व सोमवार को पूरे दिन पानी बरसा। शहर में चारों ओर पानी ही पानी भर गया। लघु सचिवालय परिसर में भी पानी भरने के कारण लोग काफी परेशान हुए। अंबाला रोड, ढांड रोड, आस-पास की गलियों, करनाल रोड, भगत सिंह चौक, कबूतर चौक, रेलवे गेट, बाहरी बस्तियों में हरसौला बस्ती व आस-पास का इलाका, अर्जुन नगर की कई गलियों में जलभराव हो गया।
खेतों में हुए नुकसान पर किसान कृषि विभाग कार्यालय में फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए उमड़ पड़े। यहां शाम तक करीब 450 से अधिक किसान फसल नुकसान के लिए आवेदन फार्म लेकर गए।
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जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शब्द दयाल ने बताया कि तीन दिनों में जिले में 166 एमएम पानी बरसा है। सोमवार को दिन भर में 67 एमएम बारिश हुई। डीग व हाबड़ी में जलभराव के चलते पंप लगाए गए हैं। फ्लड कंट्रोल के लिए 234358 पर सूचना दी जा सकती है। यह नंबर 24 घंटे वर्किंग में है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है। फसली नुकसान के लिए विशेष गिरदावरी के आदेश जारी किए गए हैं।
छह गांवों के खेतों में पहुंचा पानी, बाढ़ का खतरा
गुहला-चीका। तीन दिनों से जारी बरसात के कारण घग्गर नदी का जल स्तर सोमवार शाम 6 बजे तक पानी का जलस्तर 18.5 फुट तक पहुंच गया। यह तेजी से खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से घग्गर नदी के आसपास स्थित गुहला के लगभग आधा दर्जन गांवों के खेतों पानी घुस गया है और एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पानी 24 फुट पर दर्शाया गया है लेकिन इसका स्तर 20 फुट तक पहुंचते-पहुंचते गांव सिहाली, रत्ता खेड़ा, मेंगड़ा, मंझेडी, मोहनपुर, बोपुर, भूंसला, छन्ना जटान, अरनौली सहित लगभग एक दर्जन गांवों के खेतों में मार करने लगता है। क्षेत्र के किसान जीवन सिंह, दिलबाग सिंह, अमरीक सिंह, मनजीत सिंह ने कहा कि पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश ने पहले ही उनकी धान की फसल को तबाह करके रख दिया है। अब घग्गर नदी में आया पानी तो उनकी फसलों को पूरी तरह से बर्बाद करके रख देगा।
बारिश में शलर की दीवार ढही, लाखों का नुकसान
गुहला-चीका। पिछले तीन दिनों से निरंतर हो रही बरसात के चलते यहां खुशहाल माजरा रोड पर स्थित प्रेम राइस मिल की चार दीवारी ढह गई है। राइस मिल के मालिक सागर कुमार ने बताया कि 400 सौ फुट लंबी दीवार ढह गई।
दूसरी ओर चीका के वार्ड नंबर एक के निवासी मलकीत सिंह, दर्शन सिंह, जमील खान, सुखविंद्र सिंह, सुखा सिंह के मकान भी बरसात के चलते लगातार टपक रहे है और ढहने के कगार पर पहुंचे गए हैं। मकान की छत के टपकने के कारण घर का सारा सामान भगी गया है और परिवार के सदस्य पालीथिन से झोपड़ी बना किसी तरह से समय बीता रहे हैं।
बारिश से धान की फसल की पैदावार पर पड़ेगा असर
पूंडरी। क्षेत्र में तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश से किसानों की फसलों में काफी नुकसान हो रहा है। नीचे के एरिया में धान की फसल में एक से दो फुट तक पानी खड़ा हो गया है। किसान प्रदीप राणा, जिले सिंह, राजबीर, रजवंत सिंह, चमकार सिंह, रतिराम, राजेश राणा, कुलवंत सिंह व सुमेर चंद ने बताया कि बारिश से सबसे अधिक नुकसान 1509 व पीआर धान में हो रहा है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुणीप्रकाश ने सरकार से मांग की कि किसानों की फसलों की गिरदावरी करवाकर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
मानसून की है आखिरी बरसात 29 से होगी मानसून की वापसी: डागर
कलायत। दो दिनों से लगातार जारी बरसात के कारण खेतों में खड़ी फसलों पर भारी नुकसान हो रहा है। मौसम वैज्ञानिक डा. चंद्रशेखर डागर ने कहा कि मौसम जिले में 25 सितंबर को बरसात व 26 सितंबर को आंशिक बादलचाल रहने की संभावना है। 27 सितंबर से मौसम आमतौर पर साफ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह 8 बजे से सोमवार सुबह 8 बजे तक कैथल, करनाल व कुरुक्षेत्र में 142 एमएम बरसात दर्ज हुई है। डा. डागर ने बताया कि यह मानसून की आखिरी बरसात है। 29 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी हो जाएगी।
सीवन में जन-जीवन प्रभावित
सीवन। तीन दिन से जारी बरसात से जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। धान की फसल अब मंडी में पहुंच चुकी थी, लेकिन इस बरसात से खेतों में खड़ी धान की फसल नीचे बिछ गई है। किसान सुखवंत सिंह चौधरी, आनंद मुंजाल काकू, संगीत बंसल, इंद्रजीत मदान, राम रत्न सैनी, मौजी मेहता, सुभाष मोगा आदि का कहना है कि यह बारिश धान की फसल के लिए कहर बनकर आई है व धान की फसल को काफी नुक्सान पहुंचा है। वहीं सीवन में सीवरेज का कार्य चल रहा है जिसके कारण नगर की सारी गलियों में खुदाई चल रही है। जिन गलियों में सिवरेज का काम पूरा हो चुका है उनको भी दोबारा से सही नहीं किया गया है। गांव सौथा, पहाड़पुर, जनेदपुर, हरनौला, सैर, रामदासपुर रोड पर जलभराव की स्थिति है।
बारिश से राजौंद में भारी नुकसान
राजौंद। नगर की हरिजन चौपाल के पास एक विधवा चमेली का मकान बरसात के कारण गिर गया। जिससे उसके सर पर छत का साया भी जाता रहा। संयोगवश महिला अपनी लड़की के यहां गई हुई थी। लेकिन उसका सारा सामान मलबे में दब गया। इसके अलावा जींद रोड पर हरिजन बस्ती में नरेश पुत्र नफे सिंह का मकान की दीवार व साथ लगता बाथरूम गिर गया। अन्य मकान में दरारें आ गई। इसके अलावा कैथल रोड पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लंबी दीवार ढह गई और इसके साथ फल व सब्जी बेचने वालेे लोग बाल-बाल बच गए। वही किठाना मार्ग पर गुरुद्वारे की दीवार गिर गई। नगर के मुख्य बाजार के सामने हरदीप सिंह का एक कमरा गिर गया। जबकि उसके मकान में दो दो फुट पानी भरने से दरारें आ गई।
मकान और दुकानों में घुसा पानी
राजौंद। नगर में लगातार हुई बारिश से कई लोगों के घरों में पानी भर गया व कई दुकानें पानी से लबालब भर गई। वार्ड नंबर 4 में पुराना थाना मोहल्ले के लोगों को सबसे ज्यादा मुश्किल झेलनी पड़ी। यह ज्यादातर लोग मेहनत मजदूरी करने वाले लोग थे। उनके घरों में पानी घुसने से इनको रात को सोने के व खाने के भी लाले पड़ गए हैं। प्रकाशों, पूजा, संतोष, कुलदीप, प्रदीप, मुकेश चंद्र, चमेली ने बताया कि वह पानी निकासी को लेकर पिछले कई वर्षों से जूझ रहे हैं और इस बारे में कई बार डीसी से मिलकर अपनी समस्या सुना चुके हैं।
सरकारी कार्यालय पानी से लबालब
राजौंद। नगर में 24 घंटे से भी ज्यादा समय से हुई बरसात से सारा नगर जलमग्न हो गया। वहीं राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, प्राथमिक पाठशाला, पैक्स कार्यालय, ओ बी सी बैंक, स्कूल का मैदान पानी से लबालब भर गए। स्कूल में लड़कियों को बैठने के लिए स्थान तक नहीं बचा। कमरे व बरामदों में भी पानी भर गया। उधर पैक्स कर्मचारियों ने बताया कि उनके कार्यालय की छत पूरा दिन टपकती रही जिससे गोदाम में रखे 1500 डीएपी खाद के कट्टे भी भीग गए। पैक्स का प्रांगण पानी से लबालब भर गया और पूरा दिन उन्होंने पानी में खड़े होकर कार्य किया। इसके अलावा ओबीसी बैंक में भी पानी भर गया हालांकि बाद में पानी निकलवा दिया गया लेकिन पूरा दिन बैंक का कार्य बाधित रहा।
तीन दिनों में जिले में बरसा 166 एमएम पानी, पूरे जिले में जलभराव की स्थिति
कैथल, सीवन, राजौंद व चीका में घरों की छतें व दीवारें गिरीं, गांव हाबड़ी व डीग में जनस्वास्थ्य विभाग ने लगाए पानी निकालने को पंप
धान की अगेती व पछेती 1 लाख 10 हजार से अधिक हेक्टेयर मेें फसल में नुकसान
कपास सहित सब्जियों में भारी नुकसान
फसली बीमा के लिए कृषि विभाग कार्यालय में उमड़ी किसानों की भीड़
प्रशासन अलर्ट मोड पर, रात तक जारी रह सकती है बारिश
आम आदमी फ्लड कंट्रोल रुम में 234358 पर कर सकता है फोन
फोटो संख्या-4 से 10
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। तीन दिनों में जिले में 166 एमएम बारिश हुई है। जिससे पूरे जिले में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। गुहला क्षेत्र से गुजर रही घग्गर नदी में जलस्तर खतरे के निशान 24 फुट से महज साढ़े पांच फुट नीचे रह गया है। यह 18.5 फुट पर जा पहुंचा। जिस कारण इस क्षेत्र में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। कैथल, सीवन, राजौंद व चीका में बारिश में घरों की छतें गिर गईं। जिससे लोगों का भारी नुकसान पहुंचा है। गांव डीग व हाबड़ी में ज्यादा जलभराव के चलते सिंचाई विभाग ने पंप लगाए हैं। 1.10 लाख से अधिक हेक्टेयर में धान सहित कपास व सब्जियों की फसल में भी इस बारिश से भारी नुकसान की आशंका है। मंडियों में धान का सीजन ठप हो गया है।
तीन दिनों से लगातार बारिश जारी है। रविवार रात भर व सोमवार को पूरे दिन पानी बरसा। शहर में चारों ओर पानी ही पानी भर गया। लघु सचिवालय परिसर में भी पानी भरने के कारण लोग काफी परेशान हुए। अंबाला रोड, ढांड रोड, आस-पास की गलियों, करनाल रोड, भगत सिंह चौक, कबूतर चौक, रेलवे गेट, बाहरी बस्तियों में हरसौला बस्ती व आस-पास का इलाका, अर्जुन नगर की कई गलियों में जलभराव हो गया।
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खेतों में हुए नुकसान पर किसान कृषि विभाग कार्यालय में फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए उमड़ पड़े। यहां शाम तक करीब 450 से अधिक किसान फसल नुकसान के लिए आवेदन फार्म लेकर गए।
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जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शब्द दयाल ने बताया कि तीन दिनों में जिले में 166 एमएम पानी बरसा है। सोमवार को दिन भर में 67 एमएम बारिश हुई। डीग व हाबड़ी में जलभराव के चलते पंप लगाए गए हैं। फ्लड कंट्रोल के लिए 234358 पर सूचना दी जा सकती है। यह नंबर 24 घंटे वर्किंग में है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है। फसली नुकसान के लिए विशेष गिरदावरी के आदेश जारी किए गए हैं।
छह गांवों के खेतों में पहुंचा पानी, बाढ़ का खतरा
गुहला-चीका। तीन दिनों से जारी बरसात के कारण घग्गर नदी का जल स्तर सोमवार शाम 6 बजे तक पानी का जलस्तर 18.5 फुट तक पहुंच गया। यह तेजी से खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से घग्गर नदी के आसपास स्थित गुहला के लगभग आधा दर्जन गांवों के खेतों पानी घुस गया है और एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पानी 24 फुट पर दर्शाया गया है लेकिन इसका स्तर 20 फुट तक पहुंचते-पहुंचते गांव सिहाली, रत्ता खेड़ा, मेंगड़ा, मंझेडी, मोहनपुर, बोपुर, भूंसला, छन्ना जटान, अरनौली सहित लगभग एक दर्जन गांवों के खेतों में मार करने लगता है। क्षेत्र के किसान जीवन सिंह, दिलबाग सिंह, अमरीक सिंह, मनजीत सिंह ने कहा कि पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश ने पहले ही उनकी धान की फसल को तबाह करके रख दिया है। अब घग्गर नदी में आया पानी तो उनकी फसलों को पूरी तरह से बर्बाद करके रख देगा।
बारिश में शलर की दीवार ढही, लाखों का नुकसान
गुहला-चीका। पिछले तीन दिनों से निरंतर हो रही बरसात के चलते यहां खुशहाल माजरा रोड पर स्थित प्रेम राइस मिल की चार दीवारी ढह गई है। राइस मिल के मालिक सागर कुमार ने बताया कि 400 सौ फुट लंबी दीवार ढह गई।
दूसरी ओर चीका के वार्ड नंबर एक के निवासी मलकीत सिंह, दर्शन सिंह, जमील खान, सुखविंद्र सिंह, सुखा सिंह के मकान भी बरसात के चलते लगातार टपक रहे है और ढहने के कगार पर पहुंचे गए हैं। मकान की छत के टपकने के कारण घर का सारा सामान भगी गया है और परिवार के सदस्य पालीथिन से झोपड़ी बना किसी तरह से समय बीता रहे हैं।
बारिश से धान की फसल की पैदावार पर पड़ेगा असर
पूंडरी। क्षेत्र में तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश से किसानों की फसलों में काफी नुकसान हो रहा है। नीचे के एरिया में धान की फसल में एक से दो फुट तक पानी खड़ा हो गया है। किसान प्रदीप राणा, जिले सिंह, राजबीर, रजवंत सिंह, चमकार सिंह, रतिराम, राजेश राणा, कुलवंत सिंह व सुमेर चंद ने बताया कि बारिश से सबसे अधिक नुकसान 1509 व पीआर धान में हो रहा है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुणीप्रकाश ने सरकार से मांग की कि किसानों की फसलों की गिरदावरी करवाकर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
मानसून की है आखिरी बरसात 29 से होगी मानसून की वापसी: डागर
कलायत। दो दिनों से लगातार जारी बरसात के कारण खेतों में खड़ी फसलों पर भारी नुकसान हो रहा है। मौसम वैज्ञानिक डा. चंद्रशेखर डागर ने कहा कि मौसम जिले में 25 सितंबर को बरसात व 26 सितंबर को आंशिक बादलचाल रहने की संभावना है। 27 सितंबर से मौसम आमतौर पर साफ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह 8 बजे से सोमवार सुबह 8 बजे तक कैथल, करनाल व कुरुक्षेत्र में 142 एमएम बरसात दर्ज हुई है। डा. डागर ने बताया कि यह मानसून की आखिरी बरसात है। 29 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी हो जाएगी।
सीवन में जन-जीवन प्रभावित
सीवन। तीन दिन से जारी बरसात से जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। धान की फसल अब मंडी में पहुंच चुकी थी, लेकिन इस बरसात से खेतों में खड़ी धान की फसल नीचे बिछ गई है। किसान सुखवंत सिंह चौधरी, आनंद मुंजाल काकू, संगीत बंसल, इंद्रजीत मदान, राम रत्न सैनी, मौजी मेहता, सुभाष मोगा आदि का कहना है कि यह बारिश धान की फसल के लिए कहर बनकर आई है व धान की फसल को काफी नुक्सान पहुंचा है। वहीं सीवन में सीवरेज का कार्य चल रहा है जिसके कारण नगर की सारी गलियों में खुदाई चल रही है। जिन गलियों में सिवरेज का काम पूरा हो चुका है उनको भी दोबारा से सही नहीं किया गया है। गांव सौथा, पहाड़पुर, जनेदपुर, हरनौला, सैर, रामदासपुर रोड पर जलभराव की स्थिति है।
बारिश से राजौंद में भारी नुकसान
राजौंद। नगर की हरिजन चौपाल के पास एक विधवा चमेली का मकान बरसात के कारण गिर गया। जिससे उसके सर पर छत का साया भी जाता रहा। संयोगवश महिला अपनी लड़की के यहां गई हुई थी। लेकिन उसका सारा सामान मलबे में दब गया। इसके अलावा जींद रोड पर हरिजन बस्ती में नरेश पुत्र नफे सिंह का मकान की दीवार व साथ लगता बाथरूम गिर गया। अन्य मकान में दरारें आ गई। इसके अलावा कैथल रोड पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लंबी दीवार ढह गई और इसके साथ फल व सब्जी बेचने वालेे लोग बाल-बाल बच गए। वही किठाना मार्ग पर गुरुद्वारे की दीवार गिर गई। नगर के मुख्य बाजार के सामने हरदीप सिंह का एक कमरा गिर गया। जबकि उसके मकान में दो दो फुट पानी भरने से दरारें आ गई।
मकान और दुकानों में घुसा पानी
राजौंद। नगर में लगातार हुई बारिश से कई लोगों के घरों में पानी भर गया व कई दुकानें पानी से लबालब भर गई। वार्ड नंबर 4 में पुराना थाना मोहल्ले के लोगों को सबसे ज्यादा मुश्किल झेलनी पड़ी। यह ज्यादातर लोग मेहनत मजदूरी करने वाले लोग थे। उनके घरों में पानी घुसने से इनको रात को सोने के व खाने के भी लाले पड़ गए हैं। प्रकाशों, पूजा, संतोष, कुलदीप, प्रदीप, मुकेश चंद्र, चमेली ने बताया कि वह पानी निकासी को लेकर पिछले कई वर्षों से जूझ रहे हैं और इस बारे में कई बार डीसी से मिलकर अपनी समस्या सुना चुके हैं।
सरकारी कार्यालय पानी से लबालब
राजौंद। नगर में 24 घंटे से भी ज्यादा समय से हुई बरसात से सारा नगर जलमग्न हो गया। वहीं राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, प्राथमिक पाठशाला, पैक्स कार्यालय, ओ बी सी बैंक, स्कूल का मैदान पानी से लबालब भर गए। स्कूल में लड़कियों को बैठने के लिए स्थान तक नहीं बचा। कमरे व बरामदों में भी पानी भर गया। उधर पैक्स कर्मचारियों ने बताया कि उनके कार्यालय की छत पूरा दिन टपकती रही जिससे गोदाम में रखे 1500 डीएपी खाद के कट्टे भी भीग गए। पैक्स का प्रांगण पानी से लबालब भर गया और पूरा दिन उन्होंने पानी में खड़े होकर कार्य किया। इसके अलावा ओबीसी बैंक में भी पानी भर गया हालांकि बाद में पानी निकलवा दिया गया लेकिन पूरा दिन बैंक का कार्य बाधित रहा।
तीन दिनों में जिले में बरसा 166 एमएम पानी, पूरे जिले में जलभराव की स्थिति
कैथल, सीवन, राजौंद व चीका में घरों की छतें व दीवारें गिरीं, गांव हाबड़ी व डीग में जनस्वास्थ्य विभाग ने लगाए पानी निकालने को पंप
धान की अगेती व पछेती 1 लाख 10 हजार से अधिक हेक्टेयर मेें फसल में नुकसान
कपास सहित सब्जियों में भारी नुकसान
फसली बीमा के लिए कृषि विभाग कार्यालय में उमड़ी किसानों की भीड़
प्रशासन अलर्ट मोड पर, रात तक जारी रह सकती है बारिश
आम आदमी फ्लड कंट्रोल रुम में 234358 पर कर सकता है फोन
फोटो संख्या-4 से 10