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कई देशों के विकास में भारत के योगदान विषय पर शोध करेंगे विद्यार्थी

Sun, 21 Apr 2019 12:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 21 Apr 2019 12:15 AM IST
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कई देशों के विकास में भारत के योगदान विषय पर शोध करेंगे विद्यार्थी
कैथल। गांव मूंदड़ी में बनने वाले देश के पहले संस्कृत विश्वविद्यालय में वर्ल्ड एनसाइक्लोपीडिया का कोर्स होगा। जिसके लिए विश्वविद्यालय में आठ पीठ स्थापित की जाएंगी। इसमें जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा सहित कई देशों के विकास में भारतीयों के योगदान पर शोध होगा। विद्यार्थियों को उन देशों में जाकर अध्ययन करने का भी अवसर मिलेगा, जिन देशों को लेकर वे अध्ययन करेंगे।
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विश्वविद्यालय के वीसी डॉ. श्रेयांश द्विवेदी ने अमर उजाला को बताया कि यह विद्यार्थियों के लिए काफी महत्वपूर्ण कोर्स होगा। उन्होंने कहा कि विश्व में भ्रांति फैलाई जा रही है कि भारत में लोग सभ्य नहीं थे। उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थीं। लेकिन विश्वविद्यालय में इस बात पर शोध किया जाएगा कि दूसरे देशों के विकास में भारत व भारतीयों का कितना योगदान है। इसके लिए शुरू में 8 पीठ स्थापित की जाएंगी। जिसमें जर्मनी, फ्रांस, कनाडा, ब्रिटेन सहित 8 ऐसे देश होंगे, जहां भारतीयों ने अच्छा खासा योगदान दिया है। पूरे विश्व में संस्कृत भारती द्वारा 39 देशों में संस्कृत का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। उसके माध्यम से ऐसे विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू किए जाएंगे। जो इस संबंध में अध्ययन करवाने को तैयार होंगे। विदेशी बच्चे संस्कृत विश्वविद्यालय मूंदड़ी में आकर अध्ययन कर सकेंगे। वहीं यहां से बच्चे उन देशों में जाकर अध्ययन कर सकेंगे, जिसके बारे में वे शोध कर रहे हैं। इसका एक ही उद्देश्य है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत करना। किस तरह से भारत व भारतीय पूरी दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी हैं।
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नौकरी के पीछे नहीं भागेंगे विश्वविद्यालय के विद्यार्थी : वीसी डॉ. द्विवेदी का कहना है कि आज हमारे समाज में इतनी विकृति आ गई है कि माता-पिता मुहूर्त निकलवाकर बच्चे का जन्म करवा रहे हैं। प्रकृति को अपने हाथ में लेना चाहते हैं। यह भी विडंबना है कि वे ऐसे स्कूल कैंपस का चयन करते हैं, जिसमें भारतीय संस्कृति कहीं से अंदर न चली जाए, ऐसा फूल प्रूफ बनाया जाता है। तो फिर बड़े होकर बच्चे भारतीय समाज, उसकी शिक्षा व संस्कृति को कैसे जानेंगे। भारतीय संस्कृति संस्कृत में है। भारतीय संस्कृति गीता में है, भारतीय संस्कृति संस्कारों में है। दादा-दादी, नाना-नानी की कहानियों में है भारत की संस्कृति। विश्वविद्यालय में इसी संस्कृति से ओत-प्रोत शिक्षा देकर नौकरी के पीछे न भागने वाले खुद समाज में सक्षम युवाओं को तैयार किया जाएगा।
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