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शहर की सरकार में असंतोष
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:47 PM IST
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शहर की सरकार में असंतोष
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। चुनाव के एक साल दो महीने बाद ही 31 में से 22 पार्षदों ने कैथल नगर परिषद चेयरमैन यशपाल प्रजापति को पद से हटाने की मांग को लेकर डीसी को शपथ पत्र सौंप दिए। पार्षदों ने शीघ्र ही चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की मांग की। इन 22 पार्षदों में 14 भाजपा व 8 कांग्रेस पार्षदों ने अलग-अलग तौर पर शपथ पत्र सौंपे। इसके साथ ही दो दिनों से चल रहे घटनाक्रम का पटाक्षेप हो गया।
बुधवार को ही शहर में भाजपा पक्ष के करीब 14 पार्षद चेयरमैन यशपाल प्रजापति से नाराज होकर शहर से बाहर चले गए थे। इसके बाद से ही भाजपा, आरएसएस सहित चेयरमैन गुट द्वारा पार्षदों से संपर्क का प्रयास किया जा रहा था। लेकिन जैसे कयास लगाए जा रहे थे, उसी अनुसार वीरवार बाद दोपहर सभी 14 पार्षद कैथल पहुंचे और 8 कांग्रेस समर्थित पार्षदों के साथ मिलकर लघु सचिवालय पहुंच कर डीसी को शपत्र पत्र सौंप दिए।
डीसी को शपथ पत्र सौंपने वालों में बसपा समर्थित वार्ड नंबर 1 से किरण भान, भाजपा समर्थित व निर्दलियों में वार्ड नंबर 2 से विनोद सोनी, वार्ड 4 से निशा रानी, वार्ड नंबर 6 से कुलदीप सैनी, 8 से राकेश सरदाना, वार्ड नंबर 9 से बबिता मित्तल, 10 से पूजा अग्रवाल, वार्ड नंबर 12 से शशिकिरण, वार्ड नंबर 16 से सीमा कश्यप, 18 से रेखा सिंगला, वार्ड नंबर 20 से मोहन नायक, 21 से नरेश मित्तल, वार्ड नंबर 24 से महेंद्र थरेजा, वार्ड नंबर 26 से संतोष भोला शामिल रहे।
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वहीं कांग्रेस समर्थित पार्षदों में वार्ड नंबर 3 से महेंद्रो देवी, वार्ड नंबर 5 संजय भौरिया, 11 से हरजिंद्र सिंह, वार्ड नंबर 15 से सुनीता, 17 से वेदप्रकाश, वाइस चेयरमैन वार्ड नंबर 25 से डा. पवन थरेजा, वार्ड नंबर 28 से मोहन लाल शर्मा व वार्ड नंबर 29 से वीरेंद्र बिल्लू ने अलग से अपने शपथ पत्र डीसी को सौंपे।
असंतुष्ट पार्षदों की ओर से विनोद सोनी, संतोष भोला, कुलदीप सैनी सहित अन्य पार्षदों ने कहा कि वे भाजपा के साथ हैं। पार्टी से उन्हें कोई शिकायत नहीं हैं। चेयरमैन यशपाल प्रजापति की नीतियों, भेदभाव, विकास कार्य न होने व भ्रष्टाचार के कारण उनके प्रति अविश्वास प्रस्ताव की मांग की है और उन्हें हटाने की मांग की है। जो शेष पार्षद हैं, उन्हें भी अपने साथ लाए जाने का प्रयास होगा।
उधर, कांग्रेस समर्थित पार्षदों वीरेंद्र बिल्लू, डा. पवन थरेजा ने कहा कि उनके वार्डों में अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। जिस कारण वे चेयरमैन के खिलाफ लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव में वे 14 पार्षदों के साथ हैं।
अब ये पार्षद बचे हैं चेयरमैन के समर्थन में
अविश्वास प्रस्ताव के लिए 31 में से दो तिहाई 21 पार्षदों की आवश्यकता है। लेकिन प्रस्ताव के लिए बागी हुए गुट में 14 भाजपा, बसपा व निर्दलीय और 8 कांग्रेस समर्थित पार्षदों के गुट ने मिलकर दो तिहाई के लिए आवश्यक आंकड़े को पार करते हुए संख्या 22 की जुटा ली है। अब चेयरमैन गुट में वार्ड नंबर 7 से वरुण मित्तल, 13 से गौरव ढुल, 14 से दीपक शर्मा, 19 से प्रवीण, 22 से ज्योति सैनी, 23 से गोपाल सैनी, 27 से तृप्ता सचदेवा, 30 से चेयरमैन यशपाल प्रजापति व 31 से सुरेंद्र पहलवान चेयरमैन गुट में बच गए हैं।
चेयरमैन यशपाल प्रजापति ने कहा कि यह शहर में साफ-सुथरे शासन, ईमानदारी व पारदर्शिता के साथ हो रहे कामों के विरोध में विपक्ष का षड्यंत्र है। जनता को पता है कि शहर में किस तरह से विकास हो रहा है। उन्हें जनता का समर्थन प्राप्त है। विपक्षियों की यह साजिश किसी भी सूरत में सफल नहीं होगी। शहर का विकास निरंतर जारी रहेगा।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि वे पूरे मामले की जानकारी हासिल करने के बाद अगला फैसला लिया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। चुनाव के एक साल दो महीने बाद ही 31 में से 22 पार्षदों ने कैथल नगर परिषद चेयरमैन यशपाल प्रजापति को पद से हटाने की मांग को लेकर डीसी को शपथ पत्र सौंप दिए। पार्षदों ने शीघ्र ही चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की मांग की। इन 22 पार्षदों में 14 भाजपा व 8 कांग्रेस पार्षदों ने अलग-अलग तौर पर शपथ पत्र सौंपे। इसके साथ ही दो दिनों से चल रहे घटनाक्रम का पटाक्षेप हो गया।
बुधवार को ही शहर में भाजपा पक्ष के करीब 14 पार्षद चेयरमैन यशपाल प्रजापति से नाराज होकर शहर से बाहर चले गए थे। इसके बाद से ही भाजपा, आरएसएस सहित चेयरमैन गुट द्वारा पार्षदों से संपर्क का प्रयास किया जा रहा था। लेकिन जैसे कयास लगाए जा रहे थे, उसी अनुसार वीरवार बाद दोपहर सभी 14 पार्षद कैथल पहुंचे और 8 कांग्रेस समर्थित पार्षदों के साथ मिलकर लघु सचिवालय पहुंच कर डीसी को शपत्र पत्र सौंप दिए।
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डीसी को शपथ पत्र सौंपने वालों में बसपा समर्थित वार्ड नंबर 1 से किरण भान, भाजपा समर्थित व निर्दलियों में वार्ड नंबर 2 से विनोद सोनी, वार्ड 4 से निशा रानी, वार्ड नंबर 6 से कुलदीप सैनी, 8 से राकेश सरदाना, वार्ड नंबर 9 से बबिता मित्तल, 10 से पूजा अग्रवाल, वार्ड नंबर 12 से शशिकिरण, वार्ड नंबर 16 से सीमा कश्यप, 18 से रेखा सिंगला, वार्ड नंबर 20 से मोहन नायक, 21 से नरेश मित्तल, वार्ड नंबर 24 से महेंद्र थरेजा, वार्ड नंबर 26 से संतोष भोला शामिल रहे।
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वहीं कांग्रेस समर्थित पार्षदों में वार्ड नंबर 3 से महेंद्रो देवी, वार्ड नंबर 5 संजय भौरिया, 11 से हरजिंद्र सिंह, वार्ड नंबर 15 से सुनीता, 17 से वेदप्रकाश, वाइस चेयरमैन वार्ड नंबर 25 से डा. पवन थरेजा, वार्ड नंबर 28 से मोहन लाल शर्मा व वार्ड नंबर 29 से वीरेंद्र बिल्लू ने अलग से अपने शपथ पत्र डीसी को सौंपे।
असंतुष्ट पार्षदों की ओर से विनोद सोनी, संतोष भोला, कुलदीप सैनी सहित अन्य पार्षदों ने कहा कि वे भाजपा के साथ हैं। पार्टी से उन्हें कोई शिकायत नहीं हैं। चेयरमैन यशपाल प्रजापति की नीतियों, भेदभाव, विकास कार्य न होने व भ्रष्टाचार के कारण उनके प्रति अविश्वास प्रस्ताव की मांग की है और उन्हें हटाने की मांग की है। जो शेष पार्षद हैं, उन्हें भी अपने साथ लाए जाने का प्रयास होगा।
उधर, कांग्रेस समर्थित पार्षदों वीरेंद्र बिल्लू, डा. पवन थरेजा ने कहा कि उनके वार्डों में अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। जिस कारण वे चेयरमैन के खिलाफ लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव में वे 14 पार्षदों के साथ हैं।
अब ये पार्षद बचे हैं चेयरमैन के समर्थन में
अविश्वास प्रस्ताव के लिए 31 में से दो तिहाई 21 पार्षदों की आवश्यकता है। लेकिन प्रस्ताव के लिए बागी हुए गुट में 14 भाजपा, बसपा व निर्दलीय और 8 कांग्रेस समर्थित पार्षदों के गुट ने मिलकर दो तिहाई के लिए आवश्यक आंकड़े को पार करते हुए संख्या 22 की जुटा ली है। अब चेयरमैन गुट में वार्ड नंबर 7 से वरुण मित्तल, 13 से गौरव ढुल, 14 से दीपक शर्मा, 19 से प्रवीण, 22 से ज्योति सैनी, 23 से गोपाल सैनी, 27 से तृप्ता सचदेवा, 30 से चेयरमैन यशपाल प्रजापति व 31 से सुरेंद्र पहलवान चेयरमैन गुट में बच गए हैं।
चेयरमैन यशपाल प्रजापति ने कहा कि यह शहर में साफ-सुथरे शासन, ईमानदारी व पारदर्शिता के साथ हो रहे कामों के विरोध में विपक्ष का षड्यंत्र है। जनता को पता है कि शहर में किस तरह से विकास हो रहा है। उन्हें जनता का समर्थन प्राप्त है। विपक्षियों की यह साजिश किसी भी सूरत में सफल नहीं होगी। शहर का विकास निरंतर जारी रहेगा।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि वे पूरे मामले की जानकारी हासिल करने के बाद अगला फैसला लिया जाएगा।