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धान की रोपाई में बिजली की समस्या
Updated Sat, 17 Jun 2017 11:59 PM IST
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धान की रोपाई में बिजली की समस्या
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। पूंडरी सहित आसपास के एरिया में धान की रोपाई का काम जोरों पर हैं। लेकिन किसानों को बिजली की समस्या परेशान किए हुए है। बिजली विभाग के अधिकारी पर्याप्त मात्रा में किसानों को बिजली मिलने की बात कह रहे हैं और किसानों के अनुसार बिजली के पूरे न मिलने से उनकी रोपाई का काम काफी प्रभावित हो रहा है।
किसानों ने बताया कि मानसून के नजदीक आते ही उन्होंने धान की रोपाई शुरू कर दी है और वो जल्द अपने खेतों में धान की रोपाई करना चाहते हैं। किसानों ने बताया कि अब खेती किसानों के लिए बेहतर नहीं है, क्योंकि अब फसलों के दाम भी पूरे नहीं मिलते और धान की रोपाई के लिए बिजली भी पूरी नहीं मिलती, जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है और साथ लेबर के रेट व अन्य खर्च भी काफी बढ़ गए हैं। धान की फसल के लिए पूरे पानी की जरूरत होती है और अगर मानसून ठीक रहे तो फसल कुछ बेहतर हो जाती है। वरना बिजली के भरोसे रहना पड़ता है, लेकिन सीजन जोर पकड़ते ही लाइट भी पूरी नहीं आती, जिससे उनकी फसलें सूखने लगती है।
इस बार किसान 1509 धान को तवज्जो दे रहे हैं। किसानों के अनुसार 1509 धान कम समय में ही तैयार हो जाता है और इस बार इसके रेट भी अच्छा मिलने की उम्मीद उन्हें लग रही है। किसानों ने बताया कि इस बार 1121 धान की जगह वे 1509 धान को अधिक लगाएंगे, क्योंकि 1509 का झाड़ 1121 से अधिक निकलता है और इसके दामों में भी ज्यादा फरक नहीं होता।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। पूंडरी सहित आसपास के एरिया में धान की रोपाई का काम जोरों पर हैं। लेकिन किसानों को बिजली की समस्या परेशान किए हुए है। बिजली विभाग के अधिकारी पर्याप्त मात्रा में किसानों को बिजली मिलने की बात कह रहे हैं और किसानों के अनुसार बिजली के पूरे न मिलने से उनकी रोपाई का काम काफी प्रभावित हो रहा है।
किसानों ने बताया कि मानसून के नजदीक आते ही उन्होंने धान की रोपाई शुरू कर दी है और वो जल्द अपने खेतों में धान की रोपाई करना चाहते हैं। किसानों ने बताया कि अब खेती किसानों के लिए बेहतर नहीं है, क्योंकि अब फसलों के दाम भी पूरे नहीं मिलते और धान की रोपाई के लिए बिजली भी पूरी नहीं मिलती, जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है और साथ लेबर के रेट व अन्य खर्च भी काफी बढ़ गए हैं। धान की फसल के लिए पूरे पानी की जरूरत होती है और अगर मानसून ठीक रहे तो फसल कुछ बेहतर हो जाती है। वरना बिजली के भरोसे रहना पड़ता है, लेकिन सीजन जोर पकड़ते ही लाइट भी पूरी नहीं आती, जिससे उनकी फसलें सूखने लगती है।
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इस बार किसान 1509 धान को तवज्जो दे रहे हैं। किसानों के अनुसार 1509 धान कम समय में ही तैयार हो जाता है और इस बार इसके रेट भी अच्छा मिलने की उम्मीद उन्हें लग रही है। किसानों ने बताया कि इस बार 1121 धान की जगह वे 1509 धान को अधिक लगाएंगे, क्योंकि 1509 का झाड़ 1121 से अधिक निकलता है और इसके दामों में भी ज्यादा फरक नहीं होता।
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