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डीसी ने किया शुगर मिल का दौरा, चिप गड़बड़ी की जानकारी हासिल की
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डीसी ने किया शुगर मिल का दौरा, चिप गड़बड़ी की जानकारी हासिल की
चीनी बनने से लेकर पैकिंग तक की सारी प्रक्रिया की हासिल की बारीकि से जानकारी
चीनी रिकवरी दर बढ़ाने के निर्देश जारी किए
फोटो संख्या-8 व 9
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। डीसी एवं सहकारी चीनी मिल की अध्यक्षा डॉ. प्रियंका सोनी ने सहकारी चीनी मिल का दौरा किया। उन्होंने गन्ना आपूर्ति से लेकर चीनी बनने तक की सारी प्रक्रिया का बारीकि से निरीक्षण किया। साथ ही अधिकारियों से चिप गड़बड़ी मामले की भी जानकारी हासिल की। हालांकि उन्होंने विजिलेंस की जांच पूरी होने तक मामले में कार्रवाई से इंकार किया है।
डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे चीनी रिकवरी दर को बढ़ाने के प्रयास करें, ताकि मिल को लाभ में लाया जा सके। मिल द्वारा गन्ना उत्पादक किसानों को मिल परिसर में बेहतर सुविधाएं दी जाएं और गन्ने का भुगतान भी यथाशीघ्र किया जाए। एमडी डॉ. वेद प्रकाश के साथ उन्होंने पूरे मिल परिसर का दौरा किया। पेराई से लेकर चीनी की पैकिंग एवं स्टोर करने तक की पूरी प्रक्रिया का अवलोकन किया। मिल में अब तक 27 लाख 57 हजार 600 क्विंटल गन्ने की पेराई करके 2 लाख 68 हजार 330 क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी मिल की चीनी रिकवरी दर 10.60 प्रतिशत रही है, जबकि गत सीजन के दौरान यह 10.75 प्रतिशत थी। चीनी मिल क्षमता उपयोगिता के हिसाब से जींद चीनी मिल के बाद प्रदेश का दूसरा सहकारी चीनी मिल है। जींद सहकारी चीनी मिल द्वारा 102.44 प्रतिशत क्षमता को उपयोग किया जा रहा है, जबकि कैथल चीनी मिल द्वारा 97.55 प्रतिशत क्षमता का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चीनी उत्पादन के बाद चीनी की बिक्री हेतू किए गए प्रबंधों की भी जानकारी हासिल की तथा चीनी मिल द्वारा संचालित किए जा रहे पेट्रोल पंप से होने वाले आय के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने चीनी मिल द्वारा किसानों को गन्ने की पर्ची व अन्य जानकारी के लिए शुरू किए गए मोबाइल एप की भी जानकारी ली। डीसी ने तोल के लिए लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक धर्म कांटे पर मौके पर ट्राली का तोल करवाकर देखा और मिल प्रशासन द्वारा गन्ने से भरे हुए वाहनों व खाली वाहनों के तोल हेतू प्रयोग किए जा रहे अलग-अलग धर्म कांटों के बारे में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
डीसी डॉ. प्रियंका सोनी ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने पहले चर्चा में आए चिप गड़बड़ी मामले में भी जानकारी हासिल की है। चूंकि अब इस मामले की जांच स्टेट विजिलेंस द्वारा की जाएगी। इसलिए जब तक वहां से जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
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इस अवसर पर सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक डा. वेद प्रकाश, मुख्य अभियंता अदिल अहमद सिद्दिकी, कैलाश चंद्र, मुख्य रसायनविद् कमलकांत तिवारी, गन्ना प्रबंधक रामदिया श्योकंद, गन्ना विकास अधिकारी रामपाल सहित अन्य संबंधित अधिकारी व चीनी मिल स्टाफ के सदस्य मौजूद रहे।
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चीनी बनने से लेकर पैकिंग तक की सारी प्रक्रिया की हासिल की बारीकि से जानकारी
चीनी रिकवरी दर बढ़ाने के निर्देश जारी किए
फोटो संख्या-8 व 9
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। डीसी एवं सहकारी चीनी मिल की अध्यक्षा डॉ. प्रियंका सोनी ने सहकारी चीनी मिल का दौरा किया। उन्होंने गन्ना आपूर्ति से लेकर चीनी बनने तक की सारी प्रक्रिया का बारीकि से निरीक्षण किया। साथ ही अधिकारियों से चिप गड़बड़ी मामले की भी जानकारी हासिल की। हालांकि उन्होंने विजिलेंस की जांच पूरी होने तक मामले में कार्रवाई से इंकार किया है।
डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे चीनी रिकवरी दर को बढ़ाने के प्रयास करें, ताकि मिल को लाभ में लाया जा सके। मिल द्वारा गन्ना उत्पादक किसानों को मिल परिसर में बेहतर सुविधाएं दी जाएं और गन्ने का भुगतान भी यथाशीघ्र किया जाए। एमडी डॉ. वेद प्रकाश के साथ उन्होंने पूरे मिल परिसर का दौरा किया। पेराई से लेकर चीनी की पैकिंग एवं स्टोर करने तक की पूरी प्रक्रिया का अवलोकन किया। मिल में अब तक 27 लाख 57 हजार 600 क्विंटल गन्ने की पेराई करके 2 लाख 68 हजार 330 क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी मिल की चीनी रिकवरी दर 10.60 प्रतिशत रही है, जबकि गत सीजन के दौरान यह 10.75 प्रतिशत थी। चीनी मिल क्षमता उपयोगिता के हिसाब से जींद चीनी मिल के बाद प्रदेश का दूसरा सहकारी चीनी मिल है। जींद सहकारी चीनी मिल द्वारा 102.44 प्रतिशत क्षमता को उपयोग किया जा रहा है, जबकि कैथल चीनी मिल द्वारा 97.55 प्रतिशत क्षमता का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चीनी उत्पादन के बाद चीनी की बिक्री हेतू किए गए प्रबंधों की भी जानकारी हासिल की तथा चीनी मिल द्वारा संचालित किए जा रहे पेट्रोल पंप से होने वाले आय के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने चीनी मिल द्वारा किसानों को गन्ने की पर्ची व अन्य जानकारी के लिए शुरू किए गए मोबाइल एप की भी जानकारी ली। डीसी ने तोल के लिए लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक धर्म कांटे पर मौके पर ट्राली का तोल करवाकर देखा और मिल प्रशासन द्वारा गन्ने से भरे हुए वाहनों व खाली वाहनों के तोल हेतू प्रयोग किए जा रहे अलग-अलग धर्म कांटों के बारे में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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डीसी डॉ. प्रियंका सोनी ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने पहले चर्चा में आए चिप गड़बड़ी मामले में भी जानकारी हासिल की है। चूंकि अब इस मामले की जांच स्टेट विजिलेंस द्वारा की जाएगी। इसलिए जब तक वहां से जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
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इस अवसर पर सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक डा. वेद प्रकाश, मुख्य अभियंता अदिल अहमद सिद्दिकी, कैलाश चंद्र, मुख्य रसायनविद् कमलकांत तिवारी, गन्ना प्रबंधक रामदिया श्योकंद, गन्ना विकास अधिकारी रामपाल सहित अन्य संबंधित अधिकारी व चीनी मिल स्टाफ के सदस्य मौजूद रहे।