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मछली उत्पादक किसान भटक रहे हैं सब्सीडी के लिए
Updated Mon, 26 Mar 2018 11:52 PM IST
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किसानों ने खेतों को बनाया तालाब, अब विभाग ने हाथ खींचे तो किसान किसको सुनाएं पीड़ा
मछली उत्पादक किसान भटक रहे हैं सब्सिडी के लिए
इस साल आवेदन करने वाले किसानों का सब्सिडी का पैसा भी रुका
अधिकारियों का टका सा जवाब-पीछे से नहीं आई सब्सिडी
केवल 3 किसानों को ही मिला सरकार का सहारा-अधिकारी
फोटो संख्या-01 से 04
नसीब सैनी
कैथल। जिले में मछली उत्पादक किसान सकते में हैं। नीली क्रांति के लिए विभाग कभी तो किसानों का अनुनय-विनय करता है और उनके खेत खुदवाकर उन्हें तालाब में तब्दील करवा देता है। अब किसान अपने खेतों को तालाब बनाकर मछली पालन करने लगे हैं तो तालाब बनाने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी से हाथ पीछे खींच लिए हैं। कई किसान सब्सिडी के लिए भटक रहे हैं।
मछली पालन का काम करने वाले किसान गांव बालू निवासी मनदीप ने बताया की सरकार ने बार-बार कैंप लगाकर सरकार ने उन्हें कार्यालय में बुलाया और बताया कि सामान्य खेती की बजाए किसान मछली पालन में अच्छी आय हासिल कर सकते हैं। इसके लिए सरकार द्वारा प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान की राशि दी जाएगी। वह भी विभागीय अधिकारियों की बातों में आ गया और उसे सरकार द्वारा ढाई एकड़ पर 4,20,000 सब्सिडी बताई गई थी। इसके लिए उसने कर्ज उठाकर अपने खेतों को तालाब में तब्दील करके मछली पालन का काम शुरू कर दिया। इसके बाद सब्सिडी का इंतजार शुरू हो गया। इंतजार ऐसा शुरू हुआ कि आज तक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। अब एक साल हो गया है, उसे सब्सिडी नहीं दी जा रही। जब वह कार्यालय में जाता है तो अधिकारी उसके साथ दुर्व्यवहार करते हैं और टका सा जवाब देते हैं कि पीछे से आ जाएगी तो दे देंगे। अब तो यह भी कहा जा रहा है कि विभाग ने सब्सिडी को पीछे से बंद कर दिया है। अब उसे अपने खेत में लगाई गई रकम को लौटाना मुश्किल हो रहा है।
इसी तरह से कई अन्य किसान भी मछली पालन विभाग के अधिकारियों की कारगुजारियों के चलते भटक रहे हैं।
इसी प्रकार से एक अन्य किसान बलराज ने बताया कि उन्होंने 7 साल पहले विभाग के अधिकारियों द्वारा सब्सीडी का आश्वासन देने के चलते अपने खेत को खुदवाकर तालाब बना दिया। इसके बाद उसे 51 हजार रुपये का चेक दिए जाने की बात कही गई, लेकिन 9 हजार रुपये इससे पहले नकद देने को कहा गया। जब उसने यह 9 हजार रुपये की राशि नहीं दी तो उसे चैक नहीं दिया गया। आज तक उसे उक्त सब्सीडी की राशि नहीं दी गई। उसे बाद में बताया गया कि बैंक से डिफॉल्टर होने के कारण यह राशि नहीं दी जा सकती। उसे अधिकारियों द्वारा पहले बताया जाना चाहिए था कि कर्जमंद किसान यह काम नहीं कर सकता। अब उसने वह कर्ज भी चुका दिया है। अभी भी उसका चेक नहीं दिया जा रहा।
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सब्सिडी का कोई पैसा नहीं मिल रहा:-
मछली विभाग की अधिकारी शकुंतला ने बताया कि वे किसानों को सब्सिडी देना चाहते हैं लेकिन विभाग से उन्हें सब्सिडी का कोई पैसा नहीं मिल रहा। जिसके चलते पूरा विभाग अभी तक पैसे के इंतजार में बैठा है कि सरकार द्वारा उन्हें कब पैसे मिलेंगे और किसान को सब्सिडी का पैसा दिया जाएगा उन्होंने बताया की ऐसे में हम कुछ नहीं कर सकते अब तक केवल 11 किसानों में से 3 किसानों को सब्सिडी का लाभ दिया गया है। रही बात सात साल पहले के मामले की तो उसमें विभाग ने नियमानुसार काम किया है। रिश्वत मांगे जैसे आरोप बेबुनियाद व झूठे हैं।
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मछली उत्पादक किसान भटक रहे हैं सब्सिडी के लिए
इस साल आवेदन करने वाले किसानों का सब्सिडी का पैसा भी रुका
अधिकारियों का टका सा जवाब-पीछे से नहीं आई सब्सिडी
केवल 3 किसानों को ही मिला सरकार का सहारा-अधिकारी
फोटो संख्या-01 से 04
नसीब सैनी
कैथल। जिले में मछली उत्पादक किसान सकते में हैं। नीली क्रांति के लिए विभाग कभी तो किसानों का अनुनय-विनय करता है और उनके खेत खुदवाकर उन्हें तालाब में तब्दील करवा देता है। अब किसान अपने खेतों को तालाब बनाकर मछली पालन करने लगे हैं तो तालाब बनाने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी से हाथ पीछे खींच लिए हैं। कई किसान सब्सिडी के लिए भटक रहे हैं।
मछली पालन का काम करने वाले किसान गांव बालू निवासी मनदीप ने बताया की सरकार ने बार-बार कैंप लगाकर सरकार ने उन्हें कार्यालय में बुलाया और बताया कि सामान्य खेती की बजाए किसान मछली पालन में अच्छी आय हासिल कर सकते हैं। इसके लिए सरकार द्वारा प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान की राशि दी जाएगी। वह भी विभागीय अधिकारियों की बातों में आ गया और उसे सरकार द्वारा ढाई एकड़ पर 4,20,000 सब्सिडी बताई गई थी। इसके लिए उसने कर्ज उठाकर अपने खेतों को तालाब में तब्दील करके मछली पालन का काम शुरू कर दिया। इसके बाद सब्सिडी का इंतजार शुरू हो गया। इंतजार ऐसा शुरू हुआ कि आज तक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। अब एक साल हो गया है, उसे सब्सिडी नहीं दी जा रही। जब वह कार्यालय में जाता है तो अधिकारी उसके साथ दुर्व्यवहार करते हैं और टका सा जवाब देते हैं कि पीछे से आ जाएगी तो दे देंगे। अब तो यह भी कहा जा रहा है कि विभाग ने सब्सिडी को पीछे से बंद कर दिया है। अब उसे अपने खेत में लगाई गई रकम को लौटाना मुश्किल हो रहा है।
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इसी तरह से कई अन्य किसान भी मछली पालन विभाग के अधिकारियों की कारगुजारियों के चलते भटक रहे हैं।
इसी प्रकार से एक अन्य किसान बलराज ने बताया कि उन्होंने 7 साल पहले विभाग के अधिकारियों द्वारा सब्सीडी का आश्वासन देने के चलते अपने खेत को खुदवाकर तालाब बना दिया। इसके बाद उसे 51 हजार रुपये का चेक दिए जाने की बात कही गई, लेकिन 9 हजार रुपये इससे पहले नकद देने को कहा गया। जब उसने यह 9 हजार रुपये की राशि नहीं दी तो उसे चैक नहीं दिया गया। आज तक उसे उक्त सब्सीडी की राशि नहीं दी गई। उसे बाद में बताया गया कि बैंक से डिफॉल्टर होने के कारण यह राशि नहीं दी जा सकती। उसे अधिकारियों द्वारा पहले बताया जाना चाहिए था कि कर्जमंद किसान यह काम नहीं कर सकता। अब उसने वह कर्ज भी चुका दिया है। अभी भी उसका चेक नहीं दिया जा रहा।
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सब्सिडी का कोई पैसा नहीं मिल रहा:-
मछली विभाग की अधिकारी शकुंतला ने बताया कि वे किसानों को सब्सिडी देना चाहते हैं लेकिन विभाग से उन्हें सब्सिडी का कोई पैसा नहीं मिल रहा। जिसके चलते पूरा विभाग अभी तक पैसे के इंतजार में बैठा है कि सरकार द्वारा उन्हें कब पैसे मिलेंगे और किसान को सब्सिडी का पैसा दिया जाएगा उन्होंने बताया की ऐसे में हम कुछ नहीं कर सकते अब तक केवल 11 किसानों में से 3 किसानों को सब्सिडी का लाभ दिया गया है। रही बात सात साल पहले के मामले की तो उसमें विभाग ने नियमानुसार काम किया है। रिश्वत मांगे जैसे आरोप बेबुनियाद व झूठे हैं।