{"_id":"59dd10884f1c1bd0538b6df8","slug":"121507659912-kaithal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बूम के बाद धान के रेट धड़ाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बूम के बाद धान के रेट धड़ाम
Updated Tue, 10 Oct 2017 11:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बूम के बाद धान के रेट धड़ाम
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। अनाज मंडी में बूम पर चल रहे पीआर ग्रुप व 1509 किस्म के धान के रेट नीचे आ गिरे हैं। 1509 करीब 2700 रुपये प्रति क्विंटल तो पीआर ग्रुप 1750 रुपये से कम होकर 1600 रुपये प्रति क्विंटल के आस-पास बिकी। किसान मायूस हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि कीमतें अभी ज्यादा नहीं उठेंगी, क्योंकि जो तेजी थी, वह स्टॉकिस्टों के कारण थी। अभी विदेशों में ज्यादा मांग नहीं है।
धान का सीजन शुरू होते ही 1509 की तेजी से किसान उत्साहित थे। यह अधिकतम 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। इसके साथ-साथ ही पीआर ग्रुप की धान भी 1590 रुपये के समर्थन मूल्य से शुरू होकर 1750 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। जिससे किसानों को प्रति एकड़ काफी लाभ हुआ। लेकिन अब दो दिनों से लगातार मंदा आ रहा है।
दो दिनों से आई गिरावट : धान की कीमतों में पिछले दो दिनों में भारी गिरावट आई है। 1509 की प्रति क्विंटल कीमत गिरकर 2700 रुपये तक आ गई हैं। किसी एकाध खरीदार ने ही इसे 2750 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा। इसी प्रकार से पीआर ग्रुप में भी मंदा है। मंगलवार को यह 1600 रुपये तक मुश्किल से बिका। नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरेश चौधरी ने कहा कि दो दिनों से धान में मंदा है। 1509 किस्म 2700 रुपये तक आ गई है। सरकारी धान की कीमत मंगलवार को 1640 रुपये प्रति क्विंटल तक अधिकतम रही।
विज्ञापन
स्टॉकिस्टों के कारण आई है तेजी : चावल निर्यातक नरेंद्र मिगलानी ने कहा कि धान की कीमतों में तेजी का कारण स्टॉकिस्टों द्वारा ऊंचे दामों पर धान की खरीद कर स्टॉक करना था। स्टॉकिस्ट को कोई मतलब नहीं कि विदेशों में मांग है या नहीं। उसे केवल स्टॉक करना था सो कर लिया। विदेशों में फिलहाल ज्यादा मांग नहीं हैं। देश के बड़े निर्यातकों का चावल भी विदेशी बंदरगाहों पर फंसा हुआ है। ऐसे में आगे ज्यादा कीमतें बढ़ने की उम्मीद कम ही है। फिलहाल जो कीमतें हैं, इसी के आस-पास यह रह सकती हैं। एकदम से कीमतों में बढ़ोत्तरी और एकदम से कीमतों में कमी इंडस्ट्री के लिए नुकसानदायक है।
अनाज मंडी में धड़ल्ले से हो रही है टैक्स चोरी : उधर, नई अनाज मंडी में सूत्रों ने बताया कि यहां टैक्स चोरी धड़ल्ले से की जा रही है। बिना रिकॉर्ड में चढ़ाए धान की काफी मात्रा में बिक्री हो रही है। मार्केट कमेटी चेयरमैन राजपाल तंवर ने बताया कि उनके पास कई शिकायतें आई हैं। जिसमें बताया गया है कि टैक्स चोरी की जा रही है। जिससे सरकार को नुकसान पहुंच रहा है। वे इस संबंध में सीएम तक रिपोर्ट पहुंचाएंगे, ताकि कोई गलत काम न हो। उन्होंने कहा कि व्यापारियों व किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
- मंडी में धान के रेट में गिरावट, पीआर ग्रुप 1600 रुपये तो 1509 2700 रुपये प्रति क्विंटल पहुंची, किसान मायूस
-स्टॉकिस्टों के कारण आई थी तेजी, विदेशों में भी घटी डिमांड
फोटो संख्या-8, 9 व 10
पीआर ग्रुप का समर्थन मूल्य- पीआर ग्रुप की धान भी 1590 रुपये
अधिकतम भाव- 1750
वर्तमान भाव- 1600
गिरावट- 150
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। अनाज मंडी में बूम पर चल रहे पीआर ग्रुप व 1509 किस्म के धान के रेट नीचे आ गिरे हैं। 1509 करीब 2700 रुपये प्रति क्विंटल तो पीआर ग्रुप 1750 रुपये से कम होकर 1600 रुपये प्रति क्विंटल के आस-पास बिकी। किसान मायूस हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि कीमतें अभी ज्यादा नहीं उठेंगी, क्योंकि जो तेजी थी, वह स्टॉकिस्टों के कारण थी। अभी विदेशों में ज्यादा मांग नहीं है।
धान का सीजन शुरू होते ही 1509 की तेजी से किसान उत्साहित थे। यह अधिकतम 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। इसके साथ-साथ ही पीआर ग्रुप की धान भी 1590 रुपये के समर्थन मूल्य से शुरू होकर 1750 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। जिससे किसानों को प्रति एकड़ काफी लाभ हुआ। लेकिन अब दो दिनों से लगातार मंदा आ रहा है।
विज्ञापन
दो दिनों से आई गिरावट : धान की कीमतों में पिछले दो दिनों में भारी गिरावट आई है। 1509 की प्रति क्विंटल कीमत गिरकर 2700 रुपये तक आ गई हैं। किसी एकाध खरीदार ने ही इसे 2750 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा। इसी प्रकार से पीआर ग्रुप में भी मंदा है। मंगलवार को यह 1600 रुपये तक मुश्किल से बिका। नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरेश चौधरी ने कहा कि दो दिनों से धान में मंदा है। 1509 किस्म 2700 रुपये तक आ गई है। सरकारी धान की कीमत मंगलवार को 1640 रुपये प्रति क्विंटल तक अधिकतम रही।
विज्ञापन
स्टॉकिस्टों के कारण आई है तेजी : चावल निर्यातक नरेंद्र मिगलानी ने कहा कि धान की कीमतों में तेजी का कारण स्टॉकिस्टों द्वारा ऊंचे दामों पर धान की खरीद कर स्टॉक करना था। स्टॉकिस्ट को कोई मतलब नहीं कि विदेशों में मांग है या नहीं। उसे केवल स्टॉक करना था सो कर लिया। विदेशों में फिलहाल ज्यादा मांग नहीं हैं। देश के बड़े निर्यातकों का चावल भी विदेशी बंदरगाहों पर फंसा हुआ है। ऐसे में आगे ज्यादा कीमतें बढ़ने की उम्मीद कम ही है। फिलहाल जो कीमतें हैं, इसी के आस-पास यह रह सकती हैं। एकदम से कीमतों में बढ़ोत्तरी और एकदम से कीमतों में कमी इंडस्ट्री के लिए नुकसानदायक है।
अनाज मंडी में धड़ल्ले से हो रही है टैक्स चोरी : उधर, नई अनाज मंडी में सूत्रों ने बताया कि यहां टैक्स चोरी धड़ल्ले से की जा रही है। बिना रिकॉर्ड में चढ़ाए धान की काफी मात्रा में बिक्री हो रही है। मार्केट कमेटी चेयरमैन राजपाल तंवर ने बताया कि उनके पास कई शिकायतें आई हैं। जिसमें बताया गया है कि टैक्स चोरी की जा रही है। जिससे सरकार को नुकसान पहुंच रहा है। वे इस संबंध में सीएम तक रिपोर्ट पहुंचाएंगे, ताकि कोई गलत काम न हो। उन्होंने कहा कि व्यापारियों व किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
- मंडी में धान के रेट में गिरावट, पीआर ग्रुप 1600 रुपये तो 1509 2700 रुपये प्रति क्विंटल पहुंची, किसान मायूस
-स्टॉकिस्टों के कारण आई थी तेजी, विदेशों में भी घटी डिमांड
फोटो संख्या-8, 9 व 10
पीआर ग्रुप का समर्थन मूल्य- पीआर ग्रुप की धान भी 1590 रुपये
अधिकतम भाव- 1750
वर्तमान भाव- 1600
गिरावट- 150