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किसानों की फसल खरीद एजेंसी के अधिकारियों पर लाखों रुपयों की मजदूरी हड़पने का आरोप लगाया
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किसानों की फसल खरीद एजेंसी के अधिकारियों पर लाखों रुपयों की मजदूरी हड़पने का लगाया आरोप
पाई। पाई अनाज मंडी प्रधान ने किसानों की फसल खरीद एजेंसी के अधिकारियों पर लाखों रुपयों की मजदूरी हड़पने का आरोप लगाया है, जबकि खरीद एजेंसी के अधिकारियों ने खंडन करते हुए कहा कि देने में देरी हो गई है। मंडी प्रधान रणधीर सिंह ने बताया कि उनकी मंडी से धान की खरीद हरियाणा वेयर हाउस के द्वारा की जाती है। पाई में कोई राइस मिल नहीं है और यह खरीद एजेंसी दूसरी जगह के राइस मिलों के माध्यम से किसानों की धान की फसल की खरीद करती है। दूसरी जगह से राइस मिल आने के कारण धान की लोडिंग मंडी के आढ़तियों के मजदूर ही करते हैं और सीजन के बाद देने की कहते है। प्रति वर्ष खरीद एजेंसी आढ़तियों के मजदूरों को यह मजदूरी नहीं दी जाती, जिस कारण से इस वर्ष मंडी के आढ़तियों ने एक बैठक कर खरीद की हुई धान की लोडिंग करने से जवाब दे दिया था। जवाब देने के बाद वेयर हाउस के अधिकारियों ने आढ़तियों से यह मजदूरी उनके खरीद बिल में लगाने की कही और कहा कि जब यह बिल में जुड़ जायेंगी तो यह मजदूरी उनके द्वारा दी जायेगी। बिल में लगाने की शर्त पर आढ़ती सहमत हो गये। उन्होंने बताया कि जब आढ़तियों ने सीजन समाप्त होने के बाद बिल में लगी यह मजदूरी जो लगभग ढाई लाख के करीब बैठती है, वह मांगी तो अधिकारी टाल मटोल करने लग गये। अब सीजन को समाप्त हुए भी पांच माह के लगभग हो गये और गेहूं का सीजन शुरू होने को आ गया, परंतु उनकी मजदूरी नही दी गई। उनको लगता है कि प्रति वर्ष की तरह अब की बार भी अधिकारी उनकी यह लगभग ढाई लाख की मजदूरी हड़प गये। उन्होंने कहा कि यदि जल्दी ही मंडी के मजदूरों की मजदूरी नहीं दी गई तो वे मुख्यमंत्री को इससे अवगत करवायेंगे।
एक सप्ताह में दे दी जायेगी मजदूरी : मनेजर
इस बारे में वेयर हाउस के मैनेजर भानू प्रताप सिंह ने बताया कि मजदूरी देने में देरी हो गई। उन्होंने जिला प्रबंधक से इस बारे में बात की थी। अब एक सप्ताह के अंदर-अंदर आढ़तियों को मजदूरों की मजदूरी दे दी जायेगी।
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पाई। पाई अनाज मंडी प्रधान ने किसानों की फसल खरीद एजेंसी के अधिकारियों पर लाखों रुपयों की मजदूरी हड़पने का आरोप लगाया है, जबकि खरीद एजेंसी के अधिकारियों ने खंडन करते हुए कहा कि देने में देरी हो गई है। मंडी प्रधान रणधीर सिंह ने बताया कि उनकी मंडी से धान की खरीद हरियाणा वेयर हाउस के द्वारा की जाती है। पाई में कोई राइस मिल नहीं है और यह खरीद एजेंसी दूसरी जगह के राइस मिलों के माध्यम से किसानों की धान की फसल की खरीद करती है। दूसरी जगह से राइस मिल आने के कारण धान की लोडिंग मंडी के आढ़तियों के मजदूर ही करते हैं और सीजन के बाद देने की कहते है। प्रति वर्ष खरीद एजेंसी आढ़तियों के मजदूरों को यह मजदूरी नहीं दी जाती, जिस कारण से इस वर्ष मंडी के आढ़तियों ने एक बैठक कर खरीद की हुई धान की लोडिंग करने से जवाब दे दिया था। जवाब देने के बाद वेयर हाउस के अधिकारियों ने आढ़तियों से यह मजदूरी उनके खरीद बिल में लगाने की कही और कहा कि जब यह बिल में जुड़ जायेंगी तो यह मजदूरी उनके द्वारा दी जायेगी। बिल में लगाने की शर्त पर आढ़ती सहमत हो गये। उन्होंने बताया कि जब आढ़तियों ने सीजन समाप्त होने के बाद बिल में लगी यह मजदूरी जो लगभग ढाई लाख के करीब बैठती है, वह मांगी तो अधिकारी टाल मटोल करने लग गये। अब सीजन को समाप्त हुए भी पांच माह के लगभग हो गये और गेहूं का सीजन शुरू होने को आ गया, परंतु उनकी मजदूरी नही दी गई। उनको लगता है कि प्रति वर्ष की तरह अब की बार भी अधिकारी उनकी यह लगभग ढाई लाख की मजदूरी हड़प गये। उन्होंने कहा कि यदि जल्दी ही मंडी के मजदूरों की मजदूरी नहीं दी गई तो वे मुख्यमंत्री को इससे अवगत करवायेंगे।
एक सप्ताह में दे दी जायेगी मजदूरी : मनेजर
इस बारे में वेयर हाउस के मैनेजर भानू प्रताप सिंह ने बताया कि मजदूरी देने में देरी हो गई। उन्होंने जिला प्रबंधक से इस बारे में बात की थी। अब एक सप्ताह के अंदर-अंदर आढ़तियों को मजदूरों की मजदूरी दे दी जायेगी।
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