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कपास की फसल में चूसक कीट बने किसानों के सिरदर्दी

Mon, 06 Aug 2018 12:06 AM IST
Updated Mon, 06 Aug 2018 12:06 AM IST
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कपास की फसल में चूसक कीट बने किसानों के सिरदर्दी
कपास की फसल में चूसक कीट बने किसानों के सिरदर्दी
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फोटो नंबर-46
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। कपास की फसल में चूसक कीटों का प्रकोप किसानों के लिए भारी समस्या बना हुआ है। हरा तेला, सफेद मक्खी व चुरदा के प्रकोप के कारण कपास में मरोडिया रोग फैल गया है। कपास की फसल के विशेषज्ञ डॉ. लांबा ने किसानों का मार्गदर्शन करते हुए रस चूसक कीटों की पहचान व उनके नियंत्रण के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि कपास की फसल में लगने वाले रस चूसक कीटों में सफेद मक्खी सबसे अधिक हानिकारक है। पिछले कुछ वर्षों में कपास में सफेद मक्खी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसान भाई अपने खेत का लगातार निरीक्षण करें। एक पौधे के ऊपर, मध्य व नीचे से पत्ते लें तथा उन पर देखें की कितने रसचूसक कीट लगे हैं। एक एकड़ में कम से कम दस पौधों का निरीक्षण करें। एक पत्ते पर यदि सफेद मक्खी के 4 से 6 व्यस्क मिलें तो बिना देरी के अपनी फसल पर कीटनाशक दवा का स्प्रे करें। उन्होंने कहा कि इमिडाक्लोरप्रिड 80 ग्राम प्रति एकड़ दवा का 200 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें। यदि पत्तों पर 8 से अधिक सफेद मक्खी के वयस्क मिलें तो उस अवस्था में डाईफेन्थाईयूरान नामक दवा 200 एमएल दो सो लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें। उन्होंने कहा कि कीटनाशक के स्प्रे के दौरान खेत में नमी की भरपूर मात्रा का होना आवश्यक है। उन्होंने किसानों को मित्र व शत्रु कीटों की भी पहचान करवाई।
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