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Kaithal News: 102 कोचिंग सेंटरों के पास नहीं फायर एनओसी, आपातकालीन रास्ते भी नहीं
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रामेश्वर फौजी
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कैथल। जिले में संचालित अधिकतर कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। दमकल विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 105 में से जिले में तीन कोचिंग सेंटरों के पास ही फायर एनओसी है, जबकि शेष 102 संस्थान बिना अग्निशमन अनुमति के संचालित हो रहे हैं।
अभिभावकों के अनुसार स्थिति यह है कि कई सेंटरों में आग से बचाव के लिए आवश्यक अग्निशमन यंत्र सिलिंडर तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद हर दिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर इन भवनों में पढ़ाई करने पहुंच रहे हैं।
कोचिंग सेंटरों में कोई आपातकालीन रास्ता भी मौजूद नहीं है। यदि किसी भवन में आग लगने या अन्य आपदा की स्थिति बनती है तो संकरी सीढ़ियों से छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है। ऐसे भवन किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
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अभिभावक रामजुवारी, मनफूल और राजू का कहना है कि वे बच्चों की शिक्षा पर हर महीने छह से 12 हजार रुपये तक खर्च कर रहे हैं लेकिन बदले में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण नहीं मिल रहा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग आवश्यक होने के कारण वे मजबूरी में बच्चों को इन संस्थानों में भेज रहे हैं, ताकि बच्चे पढ़ कर अच्छा भविष्य बना सकें। शहर के अंबाला रोड, करनाल रोड, ढांड रोड और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर संचालित हैं। इनमें से अधिकतर किराये की बहुमंजिला इमारतों में चल रहे हैं, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी साफ दिखाई देती है।
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अभिभावकों के अनुसार स्थिति यह है कि कई सेंटरों में आग से बचाव के लिए आवश्यक अग्निशमन यंत्र सिलिंडर तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद हर दिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर इन भवनों में पढ़ाई करने पहुंच रहे हैं।
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कोचिंग सेंटरों में कोई आपातकालीन रास्ता भी मौजूद नहीं है। यदि किसी भवन में आग लगने या अन्य आपदा की स्थिति बनती है तो संकरी सीढ़ियों से छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है। ऐसे भवन किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
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अभिभावक रामजुवारी, मनफूल और राजू का कहना है कि वे बच्चों की शिक्षा पर हर महीने छह से 12 हजार रुपये तक खर्च कर रहे हैं लेकिन बदले में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण नहीं मिल रहा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग आवश्यक होने के कारण वे मजबूरी में बच्चों को इन संस्थानों में भेज रहे हैं, ताकि बच्चे पढ़ कर अच्छा भविष्य बना सकें। शहर के अंबाला रोड, करनाल रोड, ढांड रोड और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर संचालित हैं। इनमें से अधिकतर किराये की बहुमंजिला इमारतों में चल रहे हैं, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी साफ दिखाई देती है।

रामेश्वर फौजी

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