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तीन वर्ष से फाइलों में उलझकर रह गया मिनी सचिवालय

Tue, 29 Jan 2019 12:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 29 Jan 2019 12:16 AM IST
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तीन वर्ष से फाइलों में उलझकर रह गया मिनी सचिवालय
तीन वर्ष से फाइलों में उलझकर रह गया मिनी सचिवालय
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- गोशाला सोसाइटी द्वारा डीसी रेट से भी कम दामों पर जमीन देने के बावजूद भी अधर में लटकी मुख्यमंत्री की घोषणा
क्षेत्र के लोगों में सचिवालय निर्माण में देरी के कारण बढ़ रहा रोष
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2016 में कलायत विकास उत्सव रैली के दौरान मिनी सचिवालय की घोषणा के करीब 29 माह बीत जाने के बाद भी कागजों में उलझकर रह गई है। सचिवालय निर्माण में हो रही देरी के कारण क्षेत्र के लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।
नगरनिवासी शीशपाल राणा, धर्मपाल, रामभूल, सतीश, राजेश, नवीन, लीला राम और दूसरे लोगों ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा की घोषणा के अनुसार पहले मिनी सचिवालय के लिए 12 एकड़ जमीन सरकार द्वारा अधिग्रहण की जानी थी। गोशाला संस्था द्वारा 12 एकड़ जमीन देने के लिए प्रस्ताव पास कर प्रशासनिक अधिकारियों को भेजा गया था। लेकिन बाद में 12 एकड़ की बजाए 4 एकड़ भूमि में मिनी सचिवालय का निर्माण करने के लिए गोशाला संस्था से प्रस्ताव मांगा गया। सोसाइटी द्वारा नगर के विकास को देखते हुए प्रशासन के आग्रह पर कलेक्टर रेट से भी कम कीमत में भूमि अधिग्रहण करने का प्रस्ताव पास कर प्रशासन को सौंपा गया था। अब दोबारा से संबंधित विभाग द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या सोसाइटी गोशाला की जमीन देने में सक्षम है या नहीं। उन्होंने बताया कि वर्षों से गोशाला प्रबंधन सोसाइटी द्वारा जमीन खरीदी व बेची गई है। इसका सारा ब्योरा राजस्व विभाग के पास होने के बावजूद भी विभाग अंजान बना हुआ है।
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मुढाढ़ गोशाला अध्यक्ष योगेश गर्ग ने बताया कि संबंधित विभाग द्वारा सेल से संबंधित गोशाला सोसाइटी से नए सिरे से प्रस्ताव मांगा गया है। अब गोशाला सोसाइटी द्वारा नए सिरे से प्रस्ताव पास कर विभाग को प्रेषित कर दिया गया है। गोशाला प्रबंधन द्वारा मिनी सचिवालय निर्माण के लिए संबंधित विभाग द्वारा जो दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, समय-समय पर प्रबंधन द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। सचिवालय निर्माण के लिए गोशाला प्रबंधन सोसाइटी हर संभव सहयोग देने के लिए तत्पर है।
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एसडीएम जगदीप सिंह ने कहा कि जमीन के अधिग्रहण में जो सोसाइटी का संविधान होता है, उसमें जमीन देने की क्षमता है या नहीं, इस बात का जिक्र होता है। यह पृष्ठ प्रस्ताव में नहीं था। इस पृष्ठ की प्रति अब ले ली गई है। जिसे विभाग को भेज दिया गया है। जहां से अनुमति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
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