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पीढिय़ों से चला आ रहा बाबा नारायण दास रंगमंच क्लब का मंचन
Updated Mon, 15 Oct 2018 11:54 PM IST
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पीढ़ियों से चला आ रहा बाबा नारायण दास रंगमंच क्लब का मंचन
पिछले 50 वर्षों से हो रहा मंचन, यहां पर मांगे जाने वाली सभी मन्नतें होती है पूरी
फोटो नंबर-15 व 16
अमित तनेजा
सीवन। कस्बा सीवन में बाबा नारायण दास रंगमंच क्लब की ओर से आयोजित किए जाने वाला रामलीला का मंचन पिछले 50 वर्षों से चला आ रहा है। इस रामलीला में पात्र कलाकार पिछले कई वर्षों से पूरी निष्ठा भाव से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देते चले आए हैं।
कल्ब की ओर से रामलीला का मंचन वर्ष 1968 में शुरू हुआ था। जिसे इस बार 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस क्लब की शुरुआत मंदिर के महंत बाबा राघव दास के कर कमलों से हुई थी।
इन कलाकारों ने किया पीढ़ी दर पीढ़ी मंचन : इस मंच पर रामायण के पात्रों में पंडित मेघराज शर्मा कॉमेडियन व डायरेक्टर, चौधरी जगन्नाथ ने रावण, अमरनाथ कामरा ने दशरथ, पिरथी चोपड़ा अंगद, चुन्नी लाल बहल, मुकंद पंडित संजिदा, पवन शर्मा सुग्रीव, धर्मपाल राणा सीता, मुंशी राम हंस, धर्मपाल राणा, जगन्नाथ गंभीर व टहल दास लक्ष्मण, दयानंद तनेजा व मांगे राम शर्मा को सुग्रीव व बाली के रोल करने की जोड़ी में याद किया जाता है।
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वनवास प्रस्थान के दृश्य का मंचन हुआ
सीवन। रविवार रात को रामलीला में वनवास प्रस्थान का दृश्य दर्शाया गया। जब वनवास के लिए श्रीराम चंद्र लखन व सीता जी चले तो अयोध्या के नर नारी उनके साथ हो चले। हम छोड़ चले इस नगरी को याद आए कभी तो मत रोना गीत ने सभी दर्शकों की आंखें नम हो गई।
इस वर्ष क्लब के प्रधान कंवरभान फौजी, कलाकार जोगिन्द्र शर्मा, अश्वनी शर्मा भी अपना योगदान दे रहे हैं। राम लीला में पिछले 40 साल से दशरथ का रोल करते आ रहे मांगे राम अपने रोल में निखार लाते आ रहे हैं। रामलीला प्रधान कंवर भान फौजी ने बताया की राम लीला में बच्चे को लोरी दिलाने की परंपरा है। रामलीला के सचिव रवि सैनी ने बताया रामलीला में नई तर्जों पर बनाए गए मुंशी राम हंस, राम बिलास स्नेही द्वारा, मंगत राम रतन के द्वारा रचित गीतों को जब गाया जाता है। दर्शक उन्हें बहुत पसंद करते है। बनवास, सीता हरण, लक्ष्मण मूर्छा जैसी नाइट को 20 से 30 गीत गाए जाते हैं।
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पिछले 50 वर्षों से हो रहा मंचन, यहां पर मांगे जाने वाली सभी मन्नतें होती है पूरी
फोटो नंबर-15 व 16
अमित तनेजा
सीवन। कस्बा सीवन में बाबा नारायण दास रंगमंच क्लब की ओर से आयोजित किए जाने वाला रामलीला का मंचन पिछले 50 वर्षों से चला आ रहा है। इस रामलीला में पात्र कलाकार पिछले कई वर्षों से पूरी निष्ठा भाव से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देते चले आए हैं।
कल्ब की ओर से रामलीला का मंचन वर्ष 1968 में शुरू हुआ था। जिसे इस बार 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस क्लब की शुरुआत मंदिर के महंत बाबा राघव दास के कर कमलों से हुई थी।
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इन कलाकारों ने किया पीढ़ी दर पीढ़ी मंचन : इस मंच पर रामायण के पात्रों में पंडित मेघराज शर्मा कॉमेडियन व डायरेक्टर, चौधरी जगन्नाथ ने रावण, अमरनाथ कामरा ने दशरथ, पिरथी चोपड़ा अंगद, चुन्नी लाल बहल, मुकंद पंडित संजिदा, पवन शर्मा सुग्रीव, धर्मपाल राणा सीता, मुंशी राम हंस, धर्मपाल राणा, जगन्नाथ गंभीर व टहल दास लक्ष्मण, दयानंद तनेजा व मांगे राम शर्मा को सुग्रीव व बाली के रोल करने की जोड़ी में याद किया जाता है।
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वनवास प्रस्थान के दृश्य का मंचन हुआ
सीवन। रविवार रात को रामलीला में वनवास प्रस्थान का दृश्य दर्शाया गया। जब वनवास के लिए श्रीराम चंद्र लखन व सीता जी चले तो अयोध्या के नर नारी उनके साथ हो चले। हम छोड़ चले इस नगरी को याद आए कभी तो मत रोना गीत ने सभी दर्शकों की आंखें नम हो गई।
इस वर्ष क्लब के प्रधान कंवरभान फौजी, कलाकार जोगिन्द्र शर्मा, अश्वनी शर्मा भी अपना योगदान दे रहे हैं। राम लीला में पिछले 40 साल से दशरथ का रोल करते आ रहे मांगे राम अपने रोल में निखार लाते आ रहे हैं। रामलीला प्रधान कंवर भान फौजी ने बताया की राम लीला में बच्चे को लोरी दिलाने की परंपरा है। रामलीला के सचिव रवि सैनी ने बताया रामलीला में नई तर्जों पर बनाए गए मुंशी राम हंस, राम बिलास स्नेही द्वारा, मंगत राम रतन के द्वारा रचित गीतों को जब गाया जाता है। दर्शक उन्हें बहुत पसंद करते है। बनवास, सीता हरण, लक्ष्मण मूर्छा जैसी नाइट को 20 से 30 गीत गाए जाते हैं।