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Jind News: अमित सरोहा के ट्रैक पर दौड़े युवा नौकरी की मंजिल पाकर रुके
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27जेएनडी18: मैदान में पौधों को पानी देते अमित सरोहा। संवाद
जींद। गांव सिवाना माल के युवा अमित सरोहा ने अपनी मेहनत और सोच के दम पर न सिर्फ युवाओं को नशे से दूर किया बल्कि उन्हें रोजगार की राह भी दिखाई। उनके प्रयासों से 35 युवाओं को सरकारी नौकरी मिल चुकी है।
गांव और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं के पास खेल या सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए कोई उचित स्थान नहीं था। इससे कई युवा नशे की ओर बढ़ रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए अमित सरोहा ने गांव में ब्राह्मण मंदिर के पास पड़ी बंजर पंचायती भूमि को अपनी मेहनत से रेसिंग ट्रैक में बदल दिया।
हजारों देसी कीकर के पेड़ों को हटाकर 1600 मीटर का ग्राउंड तैयार किया और पशुओं से बचाव के लिए चारों ओर कांटेदार तार लगवाए। ग्राउंड बनने के बाद सिवाना माल के साथ राणाखेड़ी, मोरखी, गंगाना, नया गांव और बगरू कलां सहित आसपास के गांवों के युवा यहां अभ्यास करने आने लगे। लगातार मेहनत का नतीजा रहा कि छह युवा सिवाना माल से और 29 अन्य गांवों से सेना, हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस व रेलवे जैसे विभागों में चयनित हुए।
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30-35 गायों देखभाल खुद करते हैं अमित
युवाओं की सफलता के बाद अमित ने समाज सेवा का दायरा और बढ़ाया। एक दिन घायल अवस्था में मिली बेसहारा गाय से प्रेरित होकर उन्होंने अपने घर के सामने छोटी गोशाला बनाई। शुरुआत में 6-7 गायों से शुरू हुई यह पहल अब 30-35 गायों तक पहुंच चुकी है जिनकी देखभाल वह खुद करते हैं।
अपने बुजुर्गों से मिली समाज सेवा की प्रेरणा
अमित ने गांव को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए भी अभियान चला रखा है। उन्होंने मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर सैंकड़ों पौधे ट्री गार्ड के साथ लगाए हैं। साथ ही रोजाना साफ-सफाई कर ग्रामीणों को भी जागरूक कर रहे हैं। अमित बताते हैं कि समाज सेवा की प्रेरणा उन्हें अपने बुजुर्गों से मिली। सोशल मीडिया पर सक्रिय अमित अपनी आय को गरीब बेटियों के विवाह, खेल गतिविधियों और गोसेवा में खर्च करते हैं। उनके कार्यों के लिए उन्हें कई सामाजिक संस्थाओं की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है।
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गांव और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं के पास खेल या सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए कोई उचित स्थान नहीं था। इससे कई युवा नशे की ओर बढ़ रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए अमित सरोहा ने गांव में ब्राह्मण मंदिर के पास पड़ी बंजर पंचायती भूमि को अपनी मेहनत से रेसिंग ट्रैक में बदल दिया।
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हजारों देसी कीकर के पेड़ों को हटाकर 1600 मीटर का ग्राउंड तैयार किया और पशुओं से बचाव के लिए चारों ओर कांटेदार तार लगवाए। ग्राउंड बनने के बाद सिवाना माल के साथ राणाखेड़ी, मोरखी, गंगाना, नया गांव और बगरू कलां सहित आसपास के गांवों के युवा यहां अभ्यास करने आने लगे। लगातार मेहनत का नतीजा रहा कि छह युवा सिवाना माल से और 29 अन्य गांवों से सेना, हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस व रेलवे जैसे विभागों में चयनित हुए।
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30-35 गायों देखभाल खुद करते हैं अमित
युवाओं की सफलता के बाद अमित ने समाज सेवा का दायरा और बढ़ाया। एक दिन घायल अवस्था में मिली बेसहारा गाय से प्रेरित होकर उन्होंने अपने घर के सामने छोटी गोशाला बनाई। शुरुआत में 6-7 गायों से शुरू हुई यह पहल अब 30-35 गायों तक पहुंच चुकी है जिनकी देखभाल वह खुद करते हैं।
अपने बुजुर्गों से मिली समाज सेवा की प्रेरणा
अमित ने गांव को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए भी अभियान चला रखा है। उन्होंने मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर सैंकड़ों पौधे ट्री गार्ड के साथ लगाए हैं। साथ ही रोजाना साफ-सफाई कर ग्रामीणों को भी जागरूक कर रहे हैं। अमित बताते हैं कि समाज सेवा की प्रेरणा उन्हें अपने बुजुर्गों से मिली। सोशल मीडिया पर सक्रिय अमित अपनी आय को गरीब बेटियों के विवाह, खेल गतिविधियों और गोसेवा में खर्च करते हैं। उनके कार्यों के लिए उन्हें कई सामाजिक संस्थाओं की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है।