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घर बैठे चेक कर सकते हैं आयुष्मान योजना के डाटाबेस में आपना नाम है कि नहीं

Wed, 18 Sep 2019 12:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2019 12:42 AM IST
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you bcan check whether you have a name  in the database of ayushman scheme from home
बहुत से लोग ऐसे हैं जिनको अब तक यह नहीं पता कि उनका आयुष्मान भारत योजना (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) में नाम दर्ज है कि नहीं। ऐसे लोग अब घर बैठे मोबाइल एप पीएमजेएवाई या एमईआरएडॉटपीएमजेएवाईडॉटजीओवीडॉटइन पर जाकर अपना नाम चेक कर सकते हैं। यदि इस मोबाइल एप व साइट पर आपका नाम दिखाई देता है तो फिर आप अपने नजदीकी नागरिक अस्पताल में जाकर अपना गोल्डन कार्ड (हेल्थ कार्ड) बनवा सकते हैं। आपको बार-बार नागरिक अस्पताल में अपना नाम चेक करवाने के लिए चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डॉ. अजय चालिया ने बताया कि बहुत से लोग नागरिक अस्पताल स्थित आयुष्मान भारत योजना कक्ष में अपना नाम चेक करवाने के लिए आते हैं। अधिक लोगों के आने से अस्पताल में भीड़ लग जाती है। ऐसे में जिन लोगों का हेल्थ कार्ड बनाना होता है, उन्हें भी परेशानी होती है। बहुत समय लोगों के नाम चेक करने में ही निकल जाता है। ऐसे लोग मोबाइल एप पीएमजेएवाई या वेबसाइट एमईआरए डॉट पीएमजेएवाई डॉट जीओवी डॉट इन पर जाकर अपना नाम चेक कर सकते हैं। इसके लिए साइट या एप पर जाकर एचएचडी नंबर, राशन कार्ड नंबर या मोबाइल नंबर से नाम होने का पता लगा सकते हैं। यदि इस लिस्ट में आपका नाम है तो फिर आपका हेल्थ कार्ड बन जाएगा। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 100 लोग ऐसे आ रहे हैं, जो अपना नाम चेक करवाने आते हैं। इनमें अधिकतर बीपीएल परिवार के लोग आते हैं। वर्ष 2011 में हुई आर्थिक जनगणना के आधार पर जिले में तीन लाख लोगों के हेल्थ कार्ड बनने हैं। इनमें से लगभग 76 हजार लोगों के कार्ड बन चुके हैं।
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पता गलत होने का भी खामियाजा भुगत रहे लोग
बहुत से लोगों का नाम व पता गलत होने के कारण उनके पास आयुष्मान योजना का पत्र उनके पास नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में यह पत्र कुछ अन्य पतों पर पहुंच रहे हैं। जब परिवार के लोग इस पत्र को खोलकर देखते हैं तो उन्हें पता चलता है कि यह किसी और का पत्र है, जो गलती से उनके पास आ गया। इस प्रकार यह पत्र सही लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा। दुर्गा कॉलोनी निवासी रामकुमार ने कहा कि उनका नाम व पता पत्र पर गलत लिखा हुआ था। जिसकी वजह से वह राम कॉलोनी में पहुंच गया।राम कॉलोनी के मकान में उनका पत्र पहुंचा था, उन्होंने उन्हें उस पर लिखे फोन नंबर के आधार पर जानकारी दी। इसके बाद ही उन्हें पत्र मिला और इस योजना का लाभ भी।
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