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पाठ्यक्रम बीच में लटकने की सताने लगी चिंता
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जींद। शैक्षणिक सत्र आधा बीतने के बाद शिक्षा विभाग ने राजकीय स्कूलों के शिक्षकों के ट्रांसफर आदेशों से विद्यार्थियों को झटका दिया है। विद्यार्थियों को अब पाठ्यक्रम बीच में लटकने की चिंता सताने लगी है। 70 फ ीसदी स्कू लों में ट्रांसफर आदेशों के बाद शिक्षक 60 फीसदी तक रह गए हैं। जिला मुख्यालय के आसपास के कई स्कूल में शिक्षक कम हो गए हैं। यहां पर सिर्फ शारीरिक शिक्षक ही बचे हैं।
जींद जिले में 700 से ज्यादा राजकीय स्कूल हैं, जिनमें 6800 से ज्यादा शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। इसमें लगभग पांच हजार शिक्षक कार्यरत हैं। पांच हजार शिक्षकों में से 4500 से ज्यादा शिक्षक रेगुलर हैं, वहीं 462 गेस्ट टीचर हैं। जींद जिले के विभिन्न स्कूलों में 1850 से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। अव्यवहारिक रेशनेलाइजेशन के कारण तबादलों के बाद बहुत से स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई है। शिक्षकों की कमी के चलते जिले में अलग-अलग जगह अभिभावकों व विद्यार्थियों ने स्कूल के गेट पर ताला जडक़र रोष प्रकट किया है। इसमें जलालपुर कलां, दालमवाला, ढाकल, हंसडैहर, देशखेड़ा, खटकड़ व करसोला गांव समेत अन्य स्कूल शामिल हैं। जहां अभिभावकों ने रोष प्रकट करते हुए मांग की थी कि राजकीय स्कूलों में पहले ही शिक्षकों की कमी है। इस कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं दूसरी ओर सरकार चिराग योजना लेकर आई है। जिसमें विद्यार्थियों द्वारा निजी स्कूलों में दाखिला लेने पर फीस का वहन सरकार द्वारा किया जाएगा। मॉडल संस्कृति स्कूलों में दाखिला लेने पर विद्यार्थियों को 500 रुपये तक फीस देनी पड़ेगी। ऐसे में सरकार स्कूलों का निजीकरण राजकीय स्कूलों को बंद करने की योजना कर रही है। सरकार ने कम छात्र संख्या के नाम पर प्रदेश के 105 स्कूलों को बंद कर दिया है, जिसमें जींद जिले के तीन स्कूल शामिल हैं।
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शिक्षा विभाग द्वारा ट्रांसफ र आदेश जारी करने के बाद कई स्कूलों में दिक्कत आई है। ट्रांसफर ड्राइव के तहत अभी अध्यापकों की रिलीविंग और ज्वाइनिंग में समय लगेगा। इसके बाद ही स्थिति पता चल पाएगी। जहां कमी है, वहां पर व्यवस्था की जाएगी। दूसरे ड्राइव के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
-सुशील कुमार जैन, खंड शिक्षा अधिकारी, जींद।
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जींद जिले में 700 से ज्यादा राजकीय स्कूल हैं, जिनमें 6800 से ज्यादा शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। इसमें लगभग पांच हजार शिक्षक कार्यरत हैं। पांच हजार शिक्षकों में से 4500 से ज्यादा शिक्षक रेगुलर हैं, वहीं 462 गेस्ट टीचर हैं। जींद जिले के विभिन्न स्कूलों में 1850 से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। अव्यवहारिक रेशनेलाइजेशन के कारण तबादलों के बाद बहुत से स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई है। शिक्षकों की कमी के चलते जिले में अलग-अलग जगह अभिभावकों व विद्यार्थियों ने स्कूल के गेट पर ताला जडक़र रोष प्रकट किया है। इसमें जलालपुर कलां, दालमवाला, ढाकल, हंसडैहर, देशखेड़ा, खटकड़ व करसोला गांव समेत अन्य स्कूल शामिल हैं। जहां अभिभावकों ने रोष प्रकट करते हुए मांग की थी कि राजकीय स्कूलों में पहले ही शिक्षकों की कमी है। इस कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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वहीं दूसरी ओर सरकार चिराग योजना लेकर आई है। जिसमें विद्यार्थियों द्वारा निजी स्कूलों में दाखिला लेने पर फीस का वहन सरकार द्वारा किया जाएगा। मॉडल संस्कृति स्कूलों में दाखिला लेने पर विद्यार्थियों को 500 रुपये तक फीस देनी पड़ेगी। ऐसे में सरकार स्कूलों का निजीकरण राजकीय स्कूलों को बंद करने की योजना कर रही है। सरकार ने कम छात्र संख्या के नाम पर प्रदेश के 105 स्कूलों को बंद कर दिया है, जिसमें जींद जिले के तीन स्कूल शामिल हैं।
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शिक्षा विभाग द्वारा ट्रांसफ र आदेश जारी करने के बाद कई स्कूलों में दिक्कत आई है। ट्रांसफर ड्राइव के तहत अभी अध्यापकों की रिलीविंग और ज्वाइनिंग में समय लगेगा। इसके बाद ही स्थिति पता चल पाएगी। जहां कमी है, वहां पर व्यवस्था की जाएगी। दूसरे ड्राइव के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
-सुशील कुमार जैन, खंड शिक्षा अधिकारी, जींद।