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स्कूल में काम करने वाले श्रमिकों ने ठेकेदार पर लगाया निकालने का आरोप
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पेड़ के नीचे डेरा डाले प्रवासी।
- फोटो : Jind
लॉकडाउन में जहां देशभर से श्रमिकों की बदहाली की तस्वीरें आ रही हैं वहीं जींद में भी ऐसा ही मामला सामने आया। यहां एक निजी स्कूल में काम करने वाले पांच श्रमिकों को स्कूल ठेकेदार ने निकाल दिया। श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें पूरे पैसे भी नहीं दिए गए। वे पिछले कई दिन से घर जाने के लिए हिसाब करने की मांग कर रहे हैं। यह लोग पैदल चलकर राजकीय महिला कॉलेज तक पहुंच, लेकिन साथ में बच्चे होने के कारण यहां डेरा डाल दिया। यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया तो स्कूल प्रबंधक उनको वापस ले गए। उन्होंने कहा कि मजदूरों का हिसाब कर गाड़ी से उन्हें घर भेजा जाएगा।
कॉलेज के पास पेड़ की छाया में बैठे इन श्रमिकों पर जब मीडिया की नजर पड़ी तो उनसे बात की गई। मजदूरों ने बताया कि वे लंबे समय से एक स्कूल में काम कर रहे हैं। उनकी करीब 80 हजार रुपये की राशि
ठेकेदार के पास फंसी हुई है। वहीं अब तक वे स्कूल में ठहरे हुए थे, लेकिन ठेकेदार ने उन्हें वहां से भेज दिया। श्रमिकों के अनुसार वे बार-बार ठेकेदार से हिसाब करने की मांग कर रहे थे, इसके चलते उन्हें वहां से भेज दिया गया।
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दो-दो हजार रुपये दिए
मजदूरों ने कहा कि उनके पांच परिवार हैं। इनमें पांच पुरुष, पांच महिलाएं व दस बच्चे हैं। शुक्रवार को ठेकेदार ने उन्हें दो-दो हजार रुपये देकर कहा कि बाकी पैसे लॉकडाउन खुलने के बाद उनके खाते में डाल दिए जाएंगे। इसके बाद करीब 11 बजे वे चल पड़े।
आठ माह की गर्भवती की हालत बिगड़ी
इन मजदूरों में एक महिला आठ माह की गर्भवती है। पैदल चलने पर महिला की हालत बिगड़ गई। इस पर ये परिवार कॉलेज के पास रुक गया । पता चलने पर कुछ सामाजिक संस्थाओं ने इनको खाना उपलब्ध करवाया और मंगला अस्पताल की टीम ने गर्भवती महिला की जांच की।
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद निपटा विवाद
यहा मामला सामने आने के बाद कुछ लोगों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी। इस पर खुफिया विभाग की टीम व पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। इन लोगों ने स्कूल प्रबंधकों से बात कर उन्हें वापस भेज दिया। अब स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि ठेकेदार से उनका हिसाब करवाया जाएगा और इसके बाद उन्हें गाड़ी से घर भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
यह मामला सामने आया है। मैं व्यक्तिगत रूप से इससे काफी दुखी हूं। सभी लोगों से अपील है कि यदि किसी प्रवासी को ऐसी हालत में देखें तो इसकी सूचना प्रशासन को जरूर दें। यदि कोई ठेकेदार ऐसा कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में जांच करवाई जा रही है। यदि ठेकेदार की गलती मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
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कॉलेज के पास पेड़ की छाया में बैठे इन श्रमिकों पर जब मीडिया की नजर पड़ी तो उनसे बात की गई। मजदूरों ने बताया कि वे लंबे समय से एक स्कूल में काम कर रहे हैं। उनकी करीब 80 हजार रुपये की राशि
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ठेकेदार के पास फंसी हुई है। वहीं अब तक वे स्कूल में ठहरे हुए थे, लेकिन ठेकेदार ने उन्हें वहां से भेज दिया। श्रमिकों के अनुसार वे बार-बार ठेकेदार से हिसाब करने की मांग कर रहे थे, इसके चलते उन्हें वहां से भेज दिया गया।
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दो-दो हजार रुपये दिए
मजदूरों ने कहा कि उनके पांच परिवार हैं। इनमें पांच पुरुष, पांच महिलाएं व दस बच्चे हैं। शुक्रवार को ठेकेदार ने उन्हें दो-दो हजार रुपये देकर कहा कि बाकी पैसे लॉकडाउन खुलने के बाद उनके खाते में डाल दिए जाएंगे। इसके बाद करीब 11 बजे वे चल पड़े।
आठ माह की गर्भवती की हालत बिगड़ी
इन मजदूरों में एक महिला आठ माह की गर्भवती है। पैदल चलने पर महिला की हालत बिगड़ गई। इस पर ये परिवार कॉलेज के पास रुक गया । पता चलने पर कुछ सामाजिक संस्थाओं ने इनको खाना उपलब्ध करवाया और मंगला अस्पताल की टीम ने गर्भवती महिला की जांच की।
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद निपटा विवाद
यहा मामला सामने आने के बाद कुछ लोगों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी। इस पर खुफिया विभाग की टीम व पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। इन लोगों ने स्कूल प्रबंधकों से बात कर उन्हें वापस भेज दिया। अब स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि ठेकेदार से उनका हिसाब करवाया जाएगा और इसके बाद उन्हें गाड़ी से घर भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
यह मामला सामने आया है। मैं व्यक्तिगत रूप से इससे काफी दुखी हूं। सभी लोगों से अपील है कि यदि किसी प्रवासी को ऐसी हालत में देखें तो इसकी सूचना प्रशासन को जरूर दें। यदि कोई ठेकेदार ऐसा कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में जांच करवाई जा रही है। यदि ठेकेदार की गलती मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।

स्कूल से निकाले गए मजदूरों के पास पहुंची पुलिस।- फोटो : Jind