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Jind News: दर्जनों गांव की महिलाएं हथकरघा पर बुन रहीं उम्मीद के धागे
Sat, 08 Nov 2025 12:48 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 08 Nov 2025 12:48 AM IST
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07जेएनडी33 : बनाए गए वस्त्रों की जांच करते हुए कारीगर महिलाएं। संवाद
नरवाना। धरौदी गांव के हथकरघा उद्योग में महिलाएं अपने हुनर और मेहनत से न केवल खुद को सशक्त बना रही हैं बल्कि अपने क्षेत्र का नाम भी देश और विदेश में रोशन कर रही हैं।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे विशेष प्रशिक्षण अभियान के तहत धरौदी स्थित संत महावीर जैन ट्रस्ट में हजारों महिलाओं को हथकरघा का प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन की दिशा बदल दी है।
पहले जो महिलाएं घर तक सीमित थीं वे आज प्राचीन उद्योग खड्डी पर हाथ से कपड़ा बुन रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा संस्था के अध्यक्ष शमशेर सिंह नैन को सम्मानित किया है।
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महिलाओं को मिल रहा निशुल्क प्रशिक्षण
ट्रस्ट के अध्यक्ष शमशेर नैन व सचिव विकास नैन ने बताया कि सभी महिलाओं को यहां निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान भारत सरकार की ओर से प्रत्येक महिला को प्रतिदिन 300 की सहयोग राशि भी प्रदान की जाती है जिससे उन्हें आर्थिक सहायता मिलती है।
कई गांवों की भी महिलाओं को मिला मंच
धरौदी के साथ-साथ करमगढ़, लोन, फुलिया कलां, फुलिया खुर्द, जूल्हेड़ा, हमीरगढ़, राजगढ़ ढोबी नरवाना व अन्य गांवों की महिलाएं भी इस प्रशिक्षण से जुड़ रही हैं। इन महिलाओं में आत्मनिर्भर बनने का जोश और आत्मविश्वास देखने को मिल रहा है। वे घर की चहारदीवारी से निकलकर समाज में नई पहचान बना रही हैं।
राष्ट्रीय मेलों में भी करती हैं प्रदर्शन
शमशेर नैन ने बताया कि भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मेलों में भी इस क्लस्टर की महिलाओं को निशुल्क स्टॉल लगाने का अवसर दिया जाता है ताकि वे अपने हाथ से बने वस्त्र सीधे लोगों तक पहुंचा सकें। इससे उन्हें बाजार की समझ मिलती है और बिक्री से आर्थिक लाभ भी होता है।
खुद कपड़ा बना डिजाइन करतीं हैं तैयार
महिलाएं धागे का गोला बनाना फिर उससे ताना तैयार करना और उसे खड्डी मशीन के ऊपर चढ़ाना इसके बाद हाथ से खड्डी मशीन चला कर कपड़े बनाए जाते है और खड्डी पर अलग-अलग प्रकार से जैसे खेस, दरी, चद्दर, पर्दे, शॉल, स्टॉल, मफलर कमीज व शर्ट का कपड़ा तैयार करती है और उनमें अलग-अलग तरह के डिजाइन डालते हैं।
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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे विशेष प्रशिक्षण अभियान के तहत धरौदी स्थित संत महावीर जैन ट्रस्ट में हजारों महिलाओं को हथकरघा का प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन की दिशा बदल दी है।
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पहले जो महिलाएं घर तक सीमित थीं वे आज प्राचीन उद्योग खड्डी पर हाथ से कपड़ा बुन रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा संस्था के अध्यक्ष शमशेर सिंह नैन को सम्मानित किया है।
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महिलाओं को मिल रहा निशुल्क प्रशिक्षण
ट्रस्ट के अध्यक्ष शमशेर नैन व सचिव विकास नैन ने बताया कि सभी महिलाओं को यहां निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान भारत सरकार की ओर से प्रत्येक महिला को प्रतिदिन 300 की सहयोग राशि भी प्रदान की जाती है जिससे उन्हें आर्थिक सहायता मिलती है।
कई गांवों की भी महिलाओं को मिला मंच
धरौदी के साथ-साथ करमगढ़, लोन, फुलिया कलां, फुलिया खुर्द, जूल्हेड़ा, हमीरगढ़, राजगढ़ ढोबी नरवाना व अन्य गांवों की महिलाएं भी इस प्रशिक्षण से जुड़ रही हैं। इन महिलाओं में आत्मनिर्भर बनने का जोश और आत्मविश्वास देखने को मिल रहा है। वे घर की चहारदीवारी से निकलकर समाज में नई पहचान बना रही हैं।
राष्ट्रीय मेलों में भी करती हैं प्रदर्शन
शमशेर नैन ने बताया कि भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मेलों में भी इस क्लस्टर की महिलाओं को निशुल्क स्टॉल लगाने का अवसर दिया जाता है ताकि वे अपने हाथ से बने वस्त्र सीधे लोगों तक पहुंचा सकें। इससे उन्हें बाजार की समझ मिलती है और बिक्री से आर्थिक लाभ भी होता है।
खुद कपड़ा बना डिजाइन करतीं हैं तैयार
महिलाएं धागे का गोला बनाना फिर उससे ताना तैयार करना और उसे खड्डी मशीन के ऊपर चढ़ाना इसके बाद हाथ से खड्डी मशीन चला कर कपड़े बनाए जाते है और खड्डी पर अलग-अलग प्रकार से जैसे खेस, दरी, चद्दर, पर्दे, शॉल, स्टॉल, मफलर कमीज व शर्ट का कपड़ा तैयार करती है और उनमें अलग-अलग तरह के डिजाइन डालते हैं।

07जेएनडी33 : बनाए गए वस्त्रों की जांच करते हुए कारीगर महिलाएं। संवाद