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Jind News: रात को हुई बूंदाबांदी व तेज हवा से बिछी गेहूं की फसल
Mon, 16 Mar 2026 12:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 16 Mar 2026 12:13 AM IST
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15जेएनडी09: तलोडा गांव के खेतों में रात को तेज हवा व बूंदाबांदी के बाद गिरी गेहूं की फसल। संवाद
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जींद। बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार देररात हुई बूंदाबांदी और तेज हवा चलने से कई जगहों पर गेहूं की फसल गिर गई। रविवार सुबह भी तेज हवा चलने से किसानों को फसल के नुकसान का डर सताने लगा है।
खेतों में खड़ी फसल के गिरने से पैदावार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। जिन खेतों में दो से तीन दिन पहले ही सिंचाई की गई थी वहां गेहूं फसल ज्यादा प्रभावित हुई है। शनिवार रात में चली तेज हवा के कारण गीली जमीन में खड़ी गेहूं की बालियां जमीन पर गिर गईं। अनुमान है कि जिले में हजारों एकड़ क्षेत्र में गेहूं की फसल आंशिक रूप से प्रभावित हुई है।
इस समय गेहूं की फसल दाना बनने की अवस्था में है। ऐसे में तेज हवा और बूंदाबांदी के कारण फसल का गिरना पैदावार को प्रभावित कर सकता है। यदि फसल लंबे समय तक जमीन पर पड़ी रहती है तो दाने के भराव पर असर पड़ता है और कटाई के समय भी किसानों को परेशानी होती है। इससे गेहूं की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
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पिछले कुछ दिनों से बढ़ती गर्मी भी किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। दिन में तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण गेहूं और सरसों की फसल में जल्दी पकाव आने की संभावना बढ़ जाती है। अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं के दाने विकसित नहीं हो पाते और पैदावार में कमी आ सकती है। कुल मिलाकर मौसम के उतार-चढ़ाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब किसानों की नजर आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हुई है क्योंकि आगे होने वाली बारिश और तापमान में बदलाव ही फसल के अंतिम उत्पादन को तय करेगा।
गर्मी के प्रभाव से केवल गेहूं ही नहीं बल्कि अन्य फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं। सरसों की फसल में अचानक पकाव आने से दाने छोटे हो सकते हैं। इससे पैदावार कम होने की आशंका रहती है। वहीं पशुओं के चारे के रूप में उगाई जाने वाली बरसीम की फसल पर भी गर्मी का असर पड़ सकता है। अधिक तापमान के कारण बरसीम गलने लगती है और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
वर्जन
15 से 20 मार्च के बीच तापमान में कुछ गिरावट आने की संभावना है। इस दौरान न्यूनतम तापमान लगभग 14 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है। वहीं 19 और 20 मार्च को हल्की बारिश होने की भी संभावना है। यदि बारिश अधिक होती है तो फसल के गिरने की समस्या और बढ़ सकती है।-डॉ. राजेश कुमार, मौसम वैज्ञानिक
किसान गेहूं की फसल को गर्मी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कुछ सावधानियां बरत सकते हैं। खेत में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है लेकिन अत्यधिक सिंचाई से बचना चाहिए। तेज हवा या बारिश की आशंका होने पर खेतों में पानी भरने से रोकने के लिए उचित निकासी व्यवस्था रखनी चाहिए। इसके अलावा जिन खेतों में फसल झुक गई है वहां जल्द से जल्द हल्की धूप लगने देना भी जरूरी है। ताकि फसल दोबारा खड़ी हो सके।-डॉ. धीरज पंघाल कृषि विशेषज्ञ, पांडू पिंडारा
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खेतों में खड़ी फसल के गिरने से पैदावार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। जिन खेतों में दो से तीन दिन पहले ही सिंचाई की गई थी वहां गेहूं फसल ज्यादा प्रभावित हुई है। शनिवार रात में चली तेज हवा के कारण गीली जमीन में खड़ी गेहूं की बालियां जमीन पर गिर गईं। अनुमान है कि जिले में हजारों एकड़ क्षेत्र में गेहूं की फसल आंशिक रूप से प्रभावित हुई है।
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इस समय गेहूं की फसल दाना बनने की अवस्था में है। ऐसे में तेज हवा और बूंदाबांदी के कारण फसल का गिरना पैदावार को प्रभावित कर सकता है। यदि फसल लंबे समय तक जमीन पर पड़ी रहती है तो दाने के भराव पर असर पड़ता है और कटाई के समय भी किसानों को परेशानी होती है। इससे गेहूं की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
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पिछले कुछ दिनों से बढ़ती गर्मी भी किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। दिन में तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण गेहूं और सरसों की फसल में जल्दी पकाव आने की संभावना बढ़ जाती है। अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं के दाने विकसित नहीं हो पाते और पैदावार में कमी आ सकती है। कुल मिलाकर मौसम के उतार-चढ़ाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब किसानों की नजर आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हुई है क्योंकि आगे होने वाली बारिश और तापमान में बदलाव ही फसल के अंतिम उत्पादन को तय करेगा।
गर्मी के प्रभाव से केवल गेहूं ही नहीं बल्कि अन्य फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं। सरसों की फसल में अचानक पकाव आने से दाने छोटे हो सकते हैं। इससे पैदावार कम होने की आशंका रहती है। वहीं पशुओं के चारे के रूप में उगाई जाने वाली बरसीम की फसल पर भी गर्मी का असर पड़ सकता है। अधिक तापमान के कारण बरसीम गलने लगती है और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
वर्जन
15 से 20 मार्च के बीच तापमान में कुछ गिरावट आने की संभावना है। इस दौरान न्यूनतम तापमान लगभग 14 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है। वहीं 19 और 20 मार्च को हल्की बारिश होने की भी संभावना है। यदि बारिश अधिक होती है तो फसल के गिरने की समस्या और बढ़ सकती है।-डॉ. राजेश कुमार, मौसम वैज्ञानिक
किसान गेहूं की फसल को गर्मी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कुछ सावधानियां बरत सकते हैं। खेत में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है लेकिन अत्यधिक सिंचाई से बचना चाहिए। तेज हवा या बारिश की आशंका होने पर खेतों में पानी भरने से रोकने के लिए उचित निकासी व्यवस्था रखनी चाहिए। इसके अलावा जिन खेतों में फसल झुक गई है वहां जल्द से जल्द हल्की धूप लगने देना भी जरूरी है। ताकि फसल दोबारा खड़ी हो सके।-डॉ. धीरज पंघाल कृषि विशेषज्ञ, पांडू पिंडारा