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करोड़ों का जलघर, फिरभी प्यासे हैं पौली के ग्रामीण
jind/bureau
Updated Thu, 05 May 2016 12:05 AM IST
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water tank of one crore, people are thirsty
- फोटो : water tank of one crore, people are thirsty
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गांव पौली के ग्रामीण गांव में जलघर होते हुए भी प्यासे हैं। पानी की यह किल्लत एक दो माह से नहीं बल्कि कई वर्षों से हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलघर बनने के बाद एक दिन भी पीने लायक पानी ग्रामीणों तक नहीं पहुंचा है। पानी पहुंचाने की गुहार छोटे अधिकारी से लेकर बड़े अधिकारी व मंत्री तक भी लगा चुके हैं लेकिन मिला है तो सिर्फ आश्वासन।
पौली गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बना जलघर ग्रामीणों के लिए सफेद हाथी बना हुआ है। ग्रामीण दलबीर, सुंदर, राजबीर, सुनील का कहना है कि गांव में जलघर तो सरकार ने बना दिया है मगर आज तक गांव में पीने का पानी नहीं पहुंचा है। पानी के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है।
गांव में भूमिगत पानी खारा है जो किसी भी लिहाज से पीने के लायक नहीं हैं। महिलाओं को पानी बाहर खेतों से लाना पड़ रहा है। पेयजल की किल्लत को लेकर अधिकारियों व राज नेताओं से कई बार गुहार लगाई है मगर समाधान आज तक नहीं हुआ है। गांव में लगाए गए सबमर्सिबल का पानी इतना खारा है कि उसे नहीं पी सकते।
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जलघर बना आवारा पशुओं का अड्डा
गांव पौली के जलघर चारदीवारी न होने पर जलघर में आवारा पशु घुस जाते हैं और गंदगी फैलाते हैं। जलघर में चारों तरफ गंदगी का आलम बना हुआ है। जलघर का पानी किसी भी लिहाज से पीने लायक नहीं है।
ग्रामीणों ने की प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
पेयजल की किल्लत को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कहा कि सरकार के प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी देने के वायदे इस गांव में हवा हो रहे हैं। सरकार ने गांव में जलघर तो बना दिया है लेकिन पानी को गांव में पहुंचाना भूल गए हैं। पानी की किल्लत के चलते उन्हें अनेक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। इसी को लेकर दर्जनों ग्रामीण गांव के जलघर में इकट्ठा हुए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया।
वहा पेयजल की किल्लत की कोई सूचना अभी तक हमारे पास नहीं है। वहां की रिपोर्ट लेकर उस पर कार्य किया जाएगा।
अमरीक सिंह, एसडीओ।
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पौली गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बना जलघर ग्रामीणों के लिए सफेद हाथी बना हुआ है। ग्रामीण दलबीर, सुंदर, राजबीर, सुनील का कहना है कि गांव में जलघर तो सरकार ने बना दिया है मगर आज तक गांव में पीने का पानी नहीं पहुंचा है। पानी के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है।
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गांव में भूमिगत पानी खारा है जो किसी भी लिहाज से पीने के लायक नहीं हैं। महिलाओं को पानी बाहर खेतों से लाना पड़ रहा है। पेयजल की किल्लत को लेकर अधिकारियों व राज नेताओं से कई बार गुहार लगाई है मगर समाधान आज तक नहीं हुआ है। गांव में लगाए गए सबमर्सिबल का पानी इतना खारा है कि उसे नहीं पी सकते।
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जलघर बना आवारा पशुओं का अड्डा
गांव पौली के जलघर चारदीवारी न होने पर जलघर में आवारा पशु घुस जाते हैं और गंदगी फैलाते हैं। जलघर में चारों तरफ गंदगी का आलम बना हुआ है। जलघर का पानी किसी भी लिहाज से पीने लायक नहीं है।
ग्रामीणों ने की प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
पेयजल की किल्लत को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कहा कि सरकार के प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी देने के वायदे इस गांव में हवा हो रहे हैं। सरकार ने गांव में जलघर तो बना दिया है लेकिन पानी को गांव में पहुंचाना भूल गए हैं। पानी की किल्लत के चलते उन्हें अनेक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। इसी को लेकर दर्जनों ग्रामीण गांव के जलघर में इकट्ठा हुए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया।
वहा पेयजल की किल्लत की कोई सूचना अभी तक हमारे पास नहीं है। वहां की रिपोर्ट लेकर उस पर कार्य किया जाएगा।
अमरीक सिंह, एसडीओ।