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डेढ़ माह से दर-दर भटक रहे मासाखोर, नहीं मिल रही सब्जी बेचने की इजाजत
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मंडी में स्थित पार्क में धरने पर बैठे मासाखोर।
- फोटो : Jind
जींद। डेढ़ माह पहले कोरोना संक्रमण के चलते मंडी से उठाए गए मासाखोर अब दर-दर भटकने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें कोई रास्ता नहीं मिल रहा है। आलम यह है कि मासाखोर मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं। पिछले डेढ़ महीने में सब्जी बेचने के लिए मासाखोरों ने अधिकारियों से बार-बार मांग की है, लेकिन अब तक उन्हें अनुमति नहीं मिली। दो दिन पहले मानसिक रूप से परेशान मासाखोर ने सब्जी मंडी में टावर पर चढ़कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। बड़ी मुश्किल के बाद पुलिसकर्मियों द्वारा आश्वासन देने के बाद मासाखोर को टावर से नीचे उतारा गया।
मासाखोरों का कहना है कि वे कई सालों से मंडी में सब्जी बेचकर अपना परिवार पालते आ रहे हैं, लेकिन अब उनसे यह ठिकाना छीन लिया गया है। इसको लेकर मासाखोर डीसी डॉ. आदित्य दहिया, सब्जी मंडी प्रधान अवतार कुमरा व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से मिल चुके हैं। अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं, जबकि डेढ़ महीने से मासाखोरों की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में यह मासाखोरों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि जब आढ़तियों को मंडी में सब्जी बेचने की अनुमति दी जा सकती है तो मासाखोरों को क्यों नहीं। सब्जी का काम करने वाले दो लोगों कारोना संक्रमण पाए जाने के चलते सात मई को सब्जी मंडी बंद कर दी थी। इसके बाद से ही मासाखोर कारोबार नहीं कर पा रहे हैं। सब्जी मंडी में करीब 200 मासाखोर सब्जी बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। कोरोना की महामारी के कारण जींद की सब्जी मंडी को बंद कर दिया था, लेकिन अब किसानों को सब्जी बेचने व आढ़तियों को अपना काम करने की अनुमति दे दी गई है। केवल मासाखोरों के काम पर रोक लगा दी गई। मासाखोर आढ़ती व ग्राहकों के बीच कड़ी के रूप में काम करते हैं। काम नहीं होने के कारण इन 200 परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बॉक्स
एक शेड के नीचे बैठने की कह रहे मासाखोर
मंडी में 200 से अधिक मासाखोर हैं। मासाखोर के बैठने के लिए एक शेड की व्यवस्था की गई थी, जिसमें 117 मासाखोर बैठ सकते हैं। वहीं दूसरे शेड के नीचे आढ़तियों को बैठने की अनुमति है। वहीं मासाखोरों का कहना है कि सभी मासाखोरों को एक साथ बैठने की व्यवस्था की जानी चाहिए। जब तक सभी मासाखोरों के लिए व्यवस्था नहीं होती, कोई भी मासाखोर नहीं बैठेगा।
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बॉक्स
निकाला जाएगा रास्ता
इसके लिए मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा है। क्या मासाखोरों को मंडी में जगह दी जा सकती है। वहां से जवाब आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। यहां जगह दी भी जाएगी तो सभी को नहीं, जितनी जगह है, उतने ही लोगों को लॉटरी व्यवस्था से जगह दी जाएगी। यह सब मार्गदर्शन आने के बाद ही तय होगा।
- संजीव कुमार, मार्केट कमेटी सचिव।
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मासाखोरों का कहना है कि वे कई सालों से मंडी में सब्जी बेचकर अपना परिवार पालते आ रहे हैं, लेकिन अब उनसे यह ठिकाना छीन लिया गया है। इसको लेकर मासाखोर डीसी डॉ. आदित्य दहिया, सब्जी मंडी प्रधान अवतार कुमरा व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से मिल चुके हैं। अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं, जबकि डेढ़ महीने से मासाखोरों की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में यह मासाखोरों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि जब आढ़तियों को मंडी में सब्जी बेचने की अनुमति दी जा सकती है तो मासाखोरों को क्यों नहीं। सब्जी का काम करने वाले दो लोगों कारोना संक्रमण पाए जाने के चलते सात मई को सब्जी मंडी बंद कर दी थी। इसके बाद से ही मासाखोर कारोबार नहीं कर पा रहे हैं। सब्जी मंडी में करीब 200 मासाखोर सब्जी बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। कोरोना की महामारी के कारण जींद की सब्जी मंडी को बंद कर दिया था, लेकिन अब किसानों को सब्जी बेचने व आढ़तियों को अपना काम करने की अनुमति दे दी गई है। केवल मासाखोरों के काम पर रोक लगा दी गई। मासाखोर आढ़ती व ग्राहकों के बीच कड़ी के रूप में काम करते हैं। काम नहीं होने के कारण इन 200 परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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एक शेड के नीचे बैठने की कह रहे मासाखोर
मंडी में 200 से अधिक मासाखोर हैं। मासाखोर के बैठने के लिए एक शेड की व्यवस्था की गई थी, जिसमें 117 मासाखोर बैठ सकते हैं। वहीं दूसरे शेड के नीचे आढ़तियों को बैठने की अनुमति है। वहीं मासाखोरों का कहना है कि सभी मासाखोरों को एक साथ बैठने की व्यवस्था की जानी चाहिए। जब तक सभी मासाखोरों के लिए व्यवस्था नहीं होती, कोई भी मासाखोर नहीं बैठेगा।
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निकाला जाएगा रास्ता
इसके लिए मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा है। क्या मासाखोरों को मंडी में जगह दी जा सकती है। वहां से जवाब आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। यहां जगह दी भी जाएगी तो सभी को नहीं, जितनी जगह है, उतने ही लोगों को लॉटरी व्यवस्था से जगह दी जाएगी। यह सब मार्गदर्शन आने के बाद ही तय होगा।
- संजीव कुमार, मार्केट कमेटी सचिव।