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Jind News: उल्लास योजना...301 परीक्षा केंद्रों पर 15 से अधिक आयु के 6000 प्रतिभागियों ने दी परीक्षा

Sun, 28 Sep 2025 11:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Sun, 28 Sep 2025 11:44 PM IST
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Ullas Yojana...6000 participants above the age of 15 appeared for the exam at 301 examination centres
26जेएनडी06-भंभेवा के राजकीय स्कूल में परीक्षा देते हुए शिक्षार्थी। स्रोत शिक्षा विभाग
जींद। भारत सरकार के महत्वाकांक्षी उल्लास (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) के तहत रविवार को फाउंडेशन साक्षरता और संख्या ज्ञान मूल्यांकन परीक्षा का आयोजन किया गया। जिले के 301 केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में करीब छह हजार शिक्षार्थी शामिल हुए।
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इनमें 15 वर्ष से ऊपर के निरक्षरों ने भाग लिया। परीक्षा का मुख्य आकर्षण 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बुजुर्ग रहे जिन्होंने सुबह-सुबह ही परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर साक्षर बनने की अपनी ललक दिखाई। बुजुर्ग प्रतिभागियों ने बताया कि जीवन की परिस्थितियों के कारण वे बचपन में पढ़ाई से वंचित रह गए थे लेकिन सरकार की उल्लास जैसी योजनाओं ने अब उन्हें पढऩे-लिखने का अनमोल अवसर प्रदान किया है।
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बुजुर्गों ने कहा कि अब वे न केवल हस्ताक्षर कर सकते हैं बल्कि मोबाइल चला पाते हैं और यहां तक कि अखबार भी पढ़ लेते हैं। यह भागीदारी इस बात का साक्षात प्रमाण है कि सीखने की कोई आयु नहीं होती। ज्ञान की ओर उठाया गया हर कदम व्यक्ति और समाज दोनों के लिए उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।
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उल्लास समन्वयक शशिकांत ने कई केंद्रों का दौरा किया और शिक्षार्थियों की प्रतिक्रिया को दूसरों के लिए प्रेरणादायक और प्रेरक पाया। उन्होंने कहा कि साक्षरता से आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और समाज में सम्मान की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति को तकनीकी ज्ञान से जोड़ती है और महत्वपूर्ण जानकारी तक पहुंच आसान बनाती है।

आधुनिकीकरण के युग में निरक्षर रहना एक अभिशाप : ओमपति
गांव कंडेला से आई 55 वर्षीय ओमपति देवी की कहानी ने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने जीवन में पहली बार कोई परीक्षा दी। उन्होंने इसे जीवन बदलने वाला अनुभव बताते हुए कहा कि सीखने ने मुझे विभिन्न रास्तों के लिए प्रकाश का मार्ग प्रदान किया। इस आधुनिकीकरण के युग में निरक्षर रहना एक अभिशाप जैसा है। उनके पोते और पोतियों ने उन्हें इस शिक्षा के अवसर के बारे में जानने में मदद की। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कंडेला के प्राचार्य हंसवीर रेढू के नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान ने गांव के करीब 200 लोगों के लिए सीखने के रास्ते खोले।


जन-जन साक्षर अभियान की ओर एक कदम
उल्लास समन्वयक शशिकांत ने कहा कि जिले में सभी शिक्षार्थियों ने प्रत्येक गांव के सामाजिक चेतना केंद्र और समर्पित स्वयंसेवकों की सहायता से गहन शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से खुद को तैयार किया। पिछले शैक्षणिक वर्ष में जींद जिले में 25306 व्यक्तियों को उल्लास के तहत प्रमाणित किया गया था। उल्लास कार्यक्रम भारत सरकार के विकसित भारत मिशन का एक अभिन्न अंग है जिसका लक्ष्य 2030 तक 100 प्रतिशत साक्षरता हासिल करना है।
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