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दो घंटे रहा चक्का जाम, यात्री परेशान
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Thu, 06 Apr 2017 12:16 AM IST
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बसें चलने के इंतजार में बैठे यात्री।
- फोटो : jind
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मांगों को लेकर रोडवेज कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन यात्रियों के लिए आफत बन गया। सैकड़ों यात्री बस स्टैंड पर फंस कर रह गए और रोडवेज कर्मचारियों का चक्का जाम खुलने का इंतजार किया। इस दौरान जरूरी काम से जा रहे लोगों को काफी परेशानी हुई। रोडवेज कर्मचारी निजी बसों का विरोध कर रहे हैं। इस दौरान कर्मचारियों ने कहा कि यदि सरकार मांग नहीं मानती तो निजी बसों को डिपो में नहीं घुसने दिया जाएगा।
निजीकरण का विरोध करते हुए रोडवेज कर्मचारियों ने सुबह करीब दस बजे रोडवेज वर्कशॉप में प्रदर्शन शुरू किया। यहां से रोष मार्च करते हुए रोडवेज कर्मचारी बस स्टैंड पर पहुंचे और बस स्टैंड के एक गेट पर बैठ कर इसे बंद कर दिया। दूसरे गेट में बस खड़ी कर इसे रोक दिया गया। इससे डिपो से बाहर बस नहीं जा सकी और न ही कोई बस डिपो में आ सकी। इस कारण बस स्टैंड के बाहर ही बसों की लाइन लग गईं। इस दौरान हालांकि अधिकारियों ने कर्मचारियों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
निजीकरण और महाप्रबंधक की नीतियों पर जताया रोष
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि निजीकरण और रोडवेज के महाप्रबंधक की कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में दो घंटे का चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया गया है। हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान कृष्ण नैन और प्रदेश प्रवक्ता विनोद शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार की नई परिवहन नीति जनता के छात्र, कर्मचारी, मजदूर, किसान व अन्य किसी भी वर्ग के लिए हितकारी नहीं है। रोडवेज विभाग में तमाम कर्मचारी संगठन इस नीति का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि रोडवेज के बेड़े में दस हजार नई सामान्य बसें शामिल की जाएं।
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सरकार कर्ज लेकर खरीदे बस, कर्ज अदायगी तक वेतन नहीं लेंगे कर्मचारी
डिपो प्रधान अजीत नहरा ने कहा कि अगर सरकार ऋण लेकर भी रोडवेज बेड़े में दस हजार बसें शामिल करती है तो एक या दो वर्ष में ब्याज सहित रोडवेज का कर्मचारी निष्ठा व ईमानदारी से उस ऋण को चुकाएगा। नहीं तो जब तक वह ऋण नहीं चुकता होगा, प्रदेश सरकार से वेतन की मांग नहीं करेगा।
दो घंटे तक भटकते रहे यात्री
रोडवेज कर्मचारियों ने सुबह दस बजे चक्का जाम शुरू किया और यह दोपहर 12 बजे तक चला। हालांकि, कुछ यात्री निजी वाहनों की तरफ दौड़े, लेकिन इन वाहनों में भी जगह नहीं होने से वापस बस स्टैंड पर चक्का जाम खुलने का इंतजार किया। यात्री रोडवेज कर्मचारियों को कोसते नजर आए।
टिकट कटवाकर भी नहीं मिल रही सुविधा
मुझे जरूरी काम से हिसार जाना है। टिकट भी ले लिया था, लेकिन अचानक रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। अब टिकट के पैसे भी वापस नहीं मिल रहे हैं। इंतजार करने के अलावा काई और रास्ता नहीं है।
मनीष, यात्री
परिवार के साथ फंसा
मेरे साथ परिवार के चार और सदस्य भी हैं और सामान भी। हमें खनौरी जाना है, लेकिन कर्मचारियों ने चक्का जाम कर दिया है। इस कारण पूरा परिवार यहां फंसा हुआ है। सामान अधिक होने से अन्य वाहन से भी नहीं जा सकते।
जोनी, यात्री
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निजीकरण का विरोध करते हुए रोडवेज कर्मचारियों ने सुबह करीब दस बजे रोडवेज वर्कशॉप में प्रदर्शन शुरू किया। यहां से रोष मार्च करते हुए रोडवेज कर्मचारी बस स्टैंड पर पहुंचे और बस स्टैंड के एक गेट पर बैठ कर इसे बंद कर दिया। दूसरे गेट में बस खड़ी कर इसे रोक दिया गया। इससे डिपो से बाहर बस नहीं जा सकी और न ही कोई बस डिपो में आ सकी। इस कारण बस स्टैंड के बाहर ही बसों की लाइन लग गईं। इस दौरान हालांकि अधिकारियों ने कर्मचारियों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
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निजीकरण और महाप्रबंधक की नीतियों पर जताया रोष
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि निजीकरण और रोडवेज के महाप्रबंधक की कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में दो घंटे का चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया गया है। हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान कृष्ण नैन और प्रदेश प्रवक्ता विनोद शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार की नई परिवहन नीति जनता के छात्र, कर्मचारी, मजदूर, किसान व अन्य किसी भी वर्ग के लिए हितकारी नहीं है। रोडवेज विभाग में तमाम कर्मचारी संगठन इस नीति का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि रोडवेज के बेड़े में दस हजार नई सामान्य बसें शामिल की जाएं।
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डिपो प्रधान अजीत नहरा ने कहा कि अगर सरकार ऋण लेकर भी रोडवेज बेड़े में दस हजार बसें शामिल करती है तो एक या दो वर्ष में ब्याज सहित रोडवेज का कर्मचारी निष्ठा व ईमानदारी से उस ऋण को चुकाएगा। नहीं तो जब तक वह ऋण नहीं चुकता होगा, प्रदेश सरकार से वेतन की मांग नहीं करेगा।
दो घंटे तक भटकते रहे यात्री
रोडवेज कर्मचारियों ने सुबह दस बजे चक्का जाम शुरू किया और यह दोपहर 12 बजे तक चला। हालांकि, कुछ यात्री निजी वाहनों की तरफ दौड़े, लेकिन इन वाहनों में भी जगह नहीं होने से वापस बस स्टैंड पर चक्का जाम खुलने का इंतजार किया। यात्री रोडवेज कर्मचारियों को कोसते नजर आए।
टिकट कटवाकर भी नहीं मिल रही सुविधा
मुझे जरूरी काम से हिसार जाना है। टिकट भी ले लिया था, लेकिन अचानक रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। अब टिकट के पैसे भी वापस नहीं मिल रहे हैं। इंतजार करने के अलावा काई और रास्ता नहीं है।
मनीष, यात्री
परिवार के साथ फंसा
मेरे साथ परिवार के चार और सदस्य भी हैं और सामान भी। हमें खनौरी जाना है, लेकिन कर्मचारियों ने चक्का जाम कर दिया है। इस कारण पूरा परिवार यहां फंसा हुआ है। सामान अधिक होने से अन्य वाहन से भी नहीं जा सकते।
जोनी, यात्री