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Jind News: पांडु पिंडारा तीर्थ में लगाई आस्था की डुबकी
Fri, 07 Jun 2024 12:48 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 07 Jun 2024 12:48 AM IST
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06जेएनडी07: पिंडारा तीर्थ में आस्था की डूबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद
जींद। ज्येष्ठ अमावस्या पर वीरवार को श्रद्धालुओं ने पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ में आस्था की डुबकी लगाई और पिंडदान किया। अमावस्या पर पिंडारा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। यह भीड़ एक दिन पहले ही रात में शुरू हो जाती है।
श्रद्धालु पिंडारा तीर्थ के सरोवर में सुबह से ही स्नान करना शुरू कर दिया था, जो मध्याह्न के बाद तक चलता रहा। इस मौके पर दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने के साथ सूर्य देव को जलार्पण करके सुख-समृद्धि की कामना की।
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पिंडतारक तीर्थ के संबंध में कहावत है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां पर 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचते हैं। यहां पर होने वाली भीड़ में आमजन की सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात रही। वाहनों को अलग से पार्किंग में खड़ा करवाया गया, ताकि जाम में फंसने से बच सकें।
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श्रद्धालु पिंडारा तीर्थ के सरोवर में सुबह से ही स्नान करना शुरू कर दिया था, जो मध्याह्न के बाद तक चलता रहा। इस मौके पर दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने के साथ सूर्य देव को जलार्पण करके सुख-समृद्धि की कामना की।
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जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पिंडतारक तीर्थ के संबंध में कहावत है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां पर 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचते हैं। यहां पर होने वाली भीड़ में आमजन की सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात रही। वाहनों को अलग से पार्किंग में खड़ा करवाया गया, ताकि जाम में फंसने से बच सकें।

06जेएनडी07: पिंडारा तीर्थ में आस्था की डूबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद
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