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अल्ट्रासाउंड मशीनें तीन, रेडियोलॉजिस्ट एक भी नहीं
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Sun, 18 Dec 2016 12:06 AM IST
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नागरिक अस्पताल में महिला वार्ड में उपचार के लिए पहुंची महिलाएं।
- फोटो : jind
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अल्ट्रासाउंड केंद्रों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के विरोध में निजी अल्ट्रासाउंड संचालकों ने दूसरे दिन भी विरोध जारी रखा। इससे गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी हुई। स्वास्थ्य विभाग के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए दूसरे जिलों का रुख करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास नागरिक अस्पताल जींद के अलावा जुलाना व नरवाना के अस्पताल में भी अल्ट्रासाउंड की मशीनें हैं। लेकिन इन्हें चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इस कारण तीनों मशीनें लंबे समय से बंद हैं।
पीएनडीटी एक्ट के तहत निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर की जा रही कार्रवाई के बाद से स्वास्थ्य विभाग व निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों में खींचतान बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा पीएनडीटी एक्ट की उल्लंघना पाए जाने पर एक अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील किया गया है, वहीं दूसरे अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक को नोटिस जारी किया है। विभाग की कार्रवाई से खफा होकर निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों ने गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड करने से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
दो साल बाद भी सीएम की घोषणा पर नहीं हुआ अमल
प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सत्ता में आने के बाद 26 दिसंबर 2014 को अपने धन्यवादी दौरे के दौरान जींद के राजकीय महिला कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में नागरिक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री द्वारा दो वर्ष पहले की गई घोषणा पर अभी तक अमल नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी जींद जिले को अभी तक अल्ट्रासाउंड चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं मिल पाया है।
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सरकारी अस्पताल से मेरा उपचार चल रहा है। शनिवार को चेकअप करवाने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंची तो वहां मौजूद महिला चिकित्सक ने मुझे अल्ट्रासाउंड करवाने को कहा। सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने के कारण जब निजी अस्पताल से अल्ट्रासाउंड कराने पहुंची तो पता चला कि वहां भी अल्ट्रासाउंड नहीं किए जा रहे हैं।
सुनीता
गर्भवती महिलाओं व सामान्य अल्ट्रासाउंड के रेट में 200 का अंतर
निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों द्वारा गर्भवती महिलाओं व सामान्य अल्ट्रासाउंड के रेट में भी 200 रुपये का अंतर किया गया है। गर्भवती महिलाओं से 800 रुपये लिए जाते हैं, जबकि सामान्य अल्ट्रासाउंड के लिए 600 रुपये वसूले जाते हैं। बता दें कि स्वास्थ्य विभाग के पास अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने से विभाग ने नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए आने वाली जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को रस्ते रेट में अल्ट्रासाउंड की सुविधा देने के लिए निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के साथ अनुबंध किया था। इसके लिए जींद शहर में तीन अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अलग-अलग दिन निर्धारित किए गए थे। एक गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड करने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक को लगभग 300 रुपये का भुगतान किया जाता था। लेकिन अप्रैल माह के बाद से विभाग की यह योजना भी बंद है।
निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों की तरफ से हड़ताल को लेकर अभी तक मुझे कोई नोटिस नहीं मिला है। मीडिया के माध्यम से इसकी सूचना मिली है। हमारे पास रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सरकार के पास इसके लिए मांग भेजी गई है। गर्भवती महिलाओं को रस्ते रेट पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा मुहैया करवाने के लिए शहर के तीन निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के साथ अनुबंध किया गया था। बाद में अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों ने इस रेट पर अल्ट्रासाउंड करने से मना करने के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल, जींद
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पीएनडीटी एक्ट के तहत निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर की जा रही कार्रवाई के बाद से स्वास्थ्य विभाग व निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों में खींचतान बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा पीएनडीटी एक्ट की उल्लंघना पाए जाने पर एक अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील किया गया है, वहीं दूसरे अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक को नोटिस जारी किया है। विभाग की कार्रवाई से खफा होकर निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों ने गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड करने से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
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दो साल बाद भी सीएम की घोषणा पर नहीं हुआ अमल
प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सत्ता में आने के बाद 26 दिसंबर 2014 को अपने धन्यवादी दौरे के दौरान जींद के राजकीय महिला कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में नागरिक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री द्वारा दो वर्ष पहले की गई घोषणा पर अभी तक अमल नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी जींद जिले को अभी तक अल्ट्रासाउंड चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं मिल पाया है।
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सरकारी अस्पताल से मेरा उपचार चल रहा है। शनिवार को चेकअप करवाने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंची तो वहां मौजूद महिला चिकित्सक ने मुझे अल्ट्रासाउंड करवाने को कहा। सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने के कारण जब निजी अस्पताल से अल्ट्रासाउंड कराने पहुंची तो पता चला कि वहां भी अल्ट्रासाउंड नहीं किए जा रहे हैं।
सुनीता
गर्भवती महिलाओं व सामान्य अल्ट्रासाउंड के रेट में 200 का अंतर
निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों द्वारा गर्भवती महिलाओं व सामान्य अल्ट्रासाउंड के रेट में भी 200 रुपये का अंतर किया गया है। गर्भवती महिलाओं से 800 रुपये लिए जाते हैं, जबकि सामान्य अल्ट्रासाउंड के लिए 600 रुपये वसूले जाते हैं। बता दें कि स्वास्थ्य विभाग के पास अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने से विभाग ने नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए आने वाली जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को रस्ते रेट में अल्ट्रासाउंड की सुविधा देने के लिए निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के साथ अनुबंध किया था। इसके लिए जींद शहर में तीन अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अलग-अलग दिन निर्धारित किए गए थे। एक गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड करने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक को लगभग 300 रुपये का भुगतान किया जाता था। लेकिन अप्रैल माह के बाद से विभाग की यह योजना भी बंद है।
निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों की तरफ से हड़ताल को लेकर अभी तक मुझे कोई नोटिस नहीं मिला है। मीडिया के माध्यम से इसकी सूचना मिली है। हमारे पास रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सरकार के पास इसके लिए मांग भेजी गई है। गर्भवती महिलाओं को रस्ते रेट पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा मुहैया करवाने के लिए शहर के तीन निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के साथ अनुबंध किया गया था। बाद में अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों ने इस रेट पर अल्ट्रासाउंड करने से मना करने के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल, जींद