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प्रतिदिन हजारों की बिजली हो रही बर्बाद, दिनभर जलती हैं 50 लाइट
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जाट धर्मशाला के पीछे पार्क में जलती एक हाईमास्ट लाइट। संवाद
- फोटो : Jind
जींद। जिन लोगों को बिजली नहीं मिल पाती है, उनको इसकी कीमत पता है। लेकिन नगर परिषद इससे बिल्कुल भी इत्तफाक नहीं रखती है। नगर परिषद क्षेत्र में आने वाले अर्बन इस्टेट में दिनभर लगभग 50 हाईमास्क लाइट जलती रहती हैं। एक लाइट 12 घंटे में लगभग 84 यूनिट बिजली की खपत करती है। इतनी यूनिट से पांच घरों का कार्य आसान से चल जाता है।
नगर परिषद को इसका बिल भी बिजली निगम को देना पड़ता है। कर्मचारियों की लापरवाही के कारण प्रति महीना लाखों रुपये का व्यर्थ का बिल नगर परिषद को बिजली निगम को देना पड़ता है। हुडा ग्राउंड में एलआईसी बिल्डिंग के पास एक पोल पर लगभग 20 हाईमास्क लाइट लगी हुई हैं। इसके अलावा एलआईसी के पास भी हाईमास्क लाइट लगी हुई हैं। इस क्षेत्र में लगभग 50 लाइट इसी प्रकार दिनभर जलती रहती हैं। इन लाइट के जलने से काफी मात्रा में बिजली खर्च होती है। एक लाइट कम से कम 1500 वॉट की है। इससे एक लाइट एक घंटे में लगभग सात यूनिट बिजली खर्च करती है। दिन में 12 घंटे लाइट जलने के कारण एक लाइट 84 यूनिट बिजली खर्च करती है। कम से कम एक यूनिट का खर्च पांच रुपये प्रति यूनिट है। 12 घंटे दिन में लाइट जलने के कारण यह प्रतिदिन 420 रुपये की बिजली खर्च करती है। इस प्रकार 50 लाइट दिनभर में लगभग 21 हजार रुपये की बिजली खर्च करती हैं। एक महीने में यह खर्च लगभग छह लाख 30 हजार रुपये का बैठता है। इतनी अधिक मात्रा में बिजली खर्च करना और वह भी बिना किसी कार्य के, लापरवाही ही है। इतनी बिजली से कई घरों का कार्य चल सकता है, लेकिन नगर परिषद के कर्मचारी हैं कि लाइट को जलाने के बाद बंद करने की जहमत भी नहीं उठाते।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके मान ने कहा कि इस समय बिजली का काफी संकट है। हमें बिजली और पानी के अलावा अन्य संसाधनों को बचाने की जरूरत है, लेकिन बिजली इस प्रकार व्यर्थ खर्च करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे कर्मचारियों की काम के प्रति लापरवाही सामने आती है। अर्बन इस्टेट के मेरे घर के सामने भी इस प्रकार की लाइट जलती रहती है।
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नगर परिषद के ईओ राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि यह मामला अभी तक संज्ञान में नहीं था। इस प्रकार की लापरवाही बर्दास्त करने योग्य नहीं है। पता लगाया जाएगा कि किसी कर्मचारी की ड्यूटी इसमें लगाई हुई है या किसी ठेकेदार का आदमी काम कर रहा है। लाइट को दिन में बंद करवाना सुनिश्चित किया जाएगा। लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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नगर परिषद को इसका बिल भी बिजली निगम को देना पड़ता है। कर्मचारियों की लापरवाही के कारण प्रति महीना लाखों रुपये का व्यर्थ का बिल नगर परिषद को बिजली निगम को देना पड़ता है। हुडा ग्राउंड में एलआईसी बिल्डिंग के पास एक पोल पर लगभग 20 हाईमास्क लाइट लगी हुई हैं। इसके अलावा एलआईसी के पास भी हाईमास्क लाइट लगी हुई हैं। इस क्षेत्र में लगभग 50 लाइट इसी प्रकार दिनभर जलती रहती हैं। इन लाइट के जलने से काफी मात्रा में बिजली खर्च होती है। एक लाइट कम से कम 1500 वॉट की है। इससे एक लाइट एक घंटे में लगभग सात यूनिट बिजली खर्च करती है। दिन में 12 घंटे लाइट जलने के कारण एक लाइट 84 यूनिट बिजली खर्च करती है। कम से कम एक यूनिट का खर्च पांच रुपये प्रति यूनिट है। 12 घंटे दिन में लाइट जलने के कारण यह प्रतिदिन 420 रुपये की बिजली खर्च करती है। इस प्रकार 50 लाइट दिनभर में लगभग 21 हजार रुपये की बिजली खर्च करती हैं। एक महीने में यह खर्च लगभग छह लाख 30 हजार रुपये का बैठता है। इतनी अधिक मात्रा में बिजली खर्च करना और वह भी बिना किसी कार्य के, लापरवाही ही है। इतनी बिजली से कई घरों का कार्य चल सकता है, लेकिन नगर परिषद के कर्मचारी हैं कि लाइट को जलाने के बाद बंद करने की जहमत भी नहीं उठाते।
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डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके मान ने कहा कि इस समय बिजली का काफी संकट है। हमें बिजली और पानी के अलावा अन्य संसाधनों को बचाने की जरूरत है, लेकिन बिजली इस प्रकार व्यर्थ खर्च करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे कर्मचारियों की काम के प्रति लापरवाही सामने आती है। अर्बन इस्टेट के मेरे घर के सामने भी इस प्रकार की लाइट जलती रहती है।
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नगर परिषद के ईओ राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि यह मामला अभी तक संज्ञान में नहीं था। इस प्रकार की लापरवाही बर्दास्त करने योग्य नहीं है। पता लगाया जाएगा कि किसी कर्मचारी की ड्यूटी इसमें लगाई हुई है या किसी ठेकेदार का आदमी काम कर रहा है। लाइट को दिन में बंद करवाना सुनिश्चित किया जाएगा। लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।