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Jind News: बारिश-ओलावृष्टि से खराब हुई थी हजारों एकड़ फसल, नहीं खोला क्षतिपूर्ति पोर्टल

Sun, 05 Jan 2025 11:08 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jan 2025 11:08 PM IST
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Thousands of acres of crops were damaged due to rain and hail, compensation portal not opened
05जेएनडी39: ओलावृ​ष्टि के बाद नींबू के पौधे से गिरे नींबू व पत्ते। स्रोत किसान
जींद। जिले में पिछले सप्ताह बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से उचाना क्षेत्र में गेहूं समेत कई फसलों में ज्यादा नुकसान हो गया था। इस नुकसान की भरपाई के लिए मुख्यमंत्री ने पोर्टल खोलने की घोषणा की थी। इसके बावजूद भी जिले में क्षतिपूर्ति पोर्टल नहीं खोला गया। हालांकि, प्रदेश के कई जिलों में पोर्टल खोला गया है। जहां पर किसानों ने खराब हुई फसल के आंकड़ों को अपलोड किया है।
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जिले में लगभग एक हजार के आसपास किसानों की फसल ओलावृष्टि से प्रभावित हुई थी। फसल के नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को 72 घंटे में क्षतिपूर्ति पोर्टल पर फसल खराबे की जानकारी अपलोड करनी थी। ओलावृष्टि के कारण उचाना खंड के बड़ौदा, खापड़, भौंगरा, घोघड़ियां, पालवां व खटकड़ गांव में अधिक नुकसान है। किसानों के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान गेहूं में है, जबकि 80 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान सब्जी की खेती में हैं। जिले में किसानों की फसल खराबे को लेकर फिलहाल प्रशासन गंभीर नहीं है। इसके कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ओलावृष्टि और बारिश से फसलों के नुकसान के आकलन के लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी होती है। नुकसान का आकलन दर्ज करने के लिए किसान को क्षतिपूर्ति पोर्टल पर ओलावृष्टि या ज्यादा बारिश समेत अन्य आपदा आने पर फसल में हुए नुकसान की जानकारी देनी होती है। इसके बाद राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण किया जाता है। इसके बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार कर किसान को हुए नुकसान की भरपाई की जाती है।
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बागवानी विभाग की फसलों में ज्यादा नुकसान
उचाना क्षेत्र में बागवानी विभाग के भी ज्यादा किसान हैं। यहां पर सब्जी की खेती व बाग ज्यादा लगाए जाते हैं। फिलहाल पॉलीहाउस या टनल के माध्यम से सब्जी की खेती की जा रही है। ओलावृष्टि के कारण टनल में लगाई गई सब्जियां पूरी तरह से खत्म हो गई तो वहीं, तरबूज, नींबू, अमरूद ओलावृष्टि के कारण झड़ गए हैं। इसके अलावा भी अन्य फसलों में ज्यादा नुकसान है।
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जुलाना में नहर टूटने के कारण खराब हुई थी गेहूं
जुलाना के नंदगढ़ गांव में नहर टूटने के कारण लगभग एक हजार एकड़ गेहूं की फसल में जलभराव हो गया था। इसके बाद वहां पर विधायक विनेश फोगाट ने पहुंचकर किसानों को मुआवजा दिलवाने की मांग की थी। इस पर प्रशासन ने क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलकर नुकसान का आंकड़ा दर्ज करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक यह किसान भी फसल खराबे के आंकड़े को पोर्टल पर अपलोड नहीं कर पाए।
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सरकार खोले पोर्टल, नहीं तो होगा आंदोलन
ओलावृष्टि के कारण किसानों की गेहूं की फसल समेत अन्य सभी फसलें खराब हो चुकी हैं। सब्जी व फलों की फसलों में ज्यादा नुकसान हुआ है तो गेहूं में 50 से 70 प्रतिशत कई गांवों में नुकसान है। इसकी भरपाई के लिए सरकार ने पोर्टल नहीं खोला। अगर सरकार ने जल्द ही पोर्टल नहीं खोला तो भारतीय किसान यूनियन सरकार के खिलाफ आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।

-रामफल कंडेला राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाकियू
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मुख्यालय से खुलना है पोर्टल, तकनीकी कारणों से हो रही देरी
मुख्यालय की तरफ से पोर्टल खोला जाता है। अभी तक पोर्टल नहीं खुला, तकनीकी कारणों से देरी हो रही है। पोर्टल खुलने के बाद जिला के किसान भी ओलावृष्टि के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए नुकसान को अपलोड कर सकते हैं। पोर्टल खुलने के बाद किसानों को सूचित भी कर दिया जाएगा।
-रामबिलास कानूनगो उचाना।
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