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यह आंदोलन नहीं, करोड़ों लोगों को भुखमरी से बचाने के लिए धर्मयुद्ध है : चढूनी
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पंजाब से आए किसानों के वाहनों के चलते जाम में फंसे वाहन।
- फोटो : Jind
जींद/ नरवाना/ उचाना। कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों के आह्वान पर तीन दिन टोल फ्री आंदोलन के दूसरे दिन जिले के खटखड़ और बद्दोवाल टोल पूरा दिन फ्री रहे। इस दौरान वाहन बिना रोकटोक के गुजरते रहे। इससे पहले शुक्रवार को टोल फ्री करवाने के बाद किसानों ने रात टोल के पास बने टेंट में गुजारी। इस दौरान दोनों टोल प्लाजा को करीब 45 लाख का नुकसान हुआ। वहीं शनिवार दोपहर को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने टोल प्लाजा पर किसानों के बीच पहुंचे।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन नहीं बल्कि करोड़ो लोगों को भुखमरी से बचाने के लिए धर्म युद्ध है। भूख कभी जाति, धर्म नहीं देखती है भूख तो भूख होती है। करोड़ों लोग इन कानूनों से भुखमरी का शिकार होंगे। चढूनी ने कहा कि यह राज हठ और जनता के बीच लड़ाई है। हरियाणा, पंजाब, यूपी, राजस्थान के किसानों में जागृति आ चुकी है। दूसरे राज्यों के किसानों में भी जागृति आए वो भी अपने-अपने स्तर पर खड़े हों।
वहीं, तीन दिन टोल फ्री होने से टोल कंपनी को करीब 66 लाख रुपये का नुकसान हो सकता है। बद्दोवाल टोल पर प्रतिदिन करीब आठ हजार वाहन निकलते हैं। यहां प्रतिदिन करीब 12 लाख रुपये एकत्रित होते हैं। वहीं खटकड़ टोल से पांच हजार वाहन निकलते हैं और प्रतिदिन करीब दस लाख रुपये की कमाई होती है। खटकड़ टोल के मैनेजर सीमर के अनुसार दो दिन से किसी भी वाहन से टैक्स नहीं लिया गया है।
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पुलिस-अधिकारियों से न उलझें, नेताओं को गांवों में घुसने न दें
चढूनी ने कहा कि उचाना में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को आना था, लेकिन वह किसानों के विरोध के चलते नहीं आए। किसानों ने उनके हैलीपेड तक को खोद डाला। अंबाला में मुख्यमंत्री मनोहर लाल का विरोध किसानों ने किया तो गुहला चीका में जजपा के विधायक का विरोध हुआ। जगह-जगह पर भाजपा, जजपा के नेता आ रहे हैं उनका विरोध हो रहा है। क्या विरोध करने वाले किसान नहीं हैं। चढूनी ने किसानों से आह्वान किया कि वे पुलिस से नहीं टकराएं। न ही अधिकारियों से उलझें, लेकिन नेताओं को गांवों में न घुसने दें।
पंजाब से पहुंचे हजारों किसानों ने भरा जींद के किसानों में जोश
शनिवार दोपहर बाद पंजाब की ओर से करीब एक हजार वाहनों में किसान खटकड़ टोल पर पहुंचे। यहां किसानों ने हरियाणा-पंजाब भाईचारे के नारे लगाए और सरकार से कृषि कानून वापस लेने की मांग की। इस दौरान हरियाणा के किसानों में भी जोश भर गया। एक साथ हजारों वाहन के आने से खटकड़ टोल पर जाम की स्थिति पैदा हो गई, लेकिन किसानों ने अपने स्तर पर ही वाहनों को निकलवाकर यातायात व्यवस्था दुरुस्त करवाई। इसके बाद कुछ किसान ट्रक व बस में बैठकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए तो कुछ झांझ गांव में रात्रि ठहराव के लिए रुक गए। किसानों के खाने के लिए गांव के ग्रामीणों द्वारा व्यवस्था की हुई है। किसानों के जत्थे में काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।
बांगर के किसान नहीं सुनेंगे प्रधानमंत्री के मन की बात : पालवां
सर्व जातीय दाडन खाप चबूतरा पालवां के महासचिव एवं किसान नेता आजाद पालवां, सर्व जातीय खेड़ा खाप के प्रधान सतबीर बरसोला ने कहा कि 27 दिसंबर को पीएम नरेंद्र मोदी किसानों से मन की बात करेंगे। पीएम के मन की बात किसान नहीं सुनेंगे। जब पीएम किसानों के मन की बात नहीं सुन रहा हैं तो किसान क्यों पीएम मोदी की मन की बात सुने। 31 दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर कृषि कानून को रद्द करवाने की माग लेकर किसान धरने पर बैठे हैं, लेकिन केंद्र सरकार किसानों की बात पूरी करने की बजाय आंदोलन को लेकर बयानबाजी कर रही है।
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उन्होंने कहा कि यह आंदोलन नहीं बल्कि करोड़ो लोगों को भुखमरी से बचाने के लिए धर्म युद्ध है। भूख कभी जाति, धर्म नहीं देखती है भूख तो भूख होती है। करोड़ों लोग इन कानूनों से भुखमरी का शिकार होंगे। चढूनी ने कहा कि यह राज हठ और जनता के बीच लड़ाई है। हरियाणा, पंजाब, यूपी, राजस्थान के किसानों में जागृति आ चुकी है। दूसरे राज्यों के किसानों में भी जागृति आए वो भी अपने-अपने स्तर पर खड़े हों।
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वहीं, तीन दिन टोल फ्री होने से टोल कंपनी को करीब 66 लाख रुपये का नुकसान हो सकता है। बद्दोवाल टोल पर प्रतिदिन करीब आठ हजार वाहन निकलते हैं। यहां प्रतिदिन करीब 12 लाख रुपये एकत्रित होते हैं। वहीं खटकड़ टोल से पांच हजार वाहन निकलते हैं और प्रतिदिन करीब दस लाख रुपये की कमाई होती है। खटकड़ टोल के मैनेजर सीमर के अनुसार दो दिन से किसी भी वाहन से टैक्स नहीं लिया गया है।
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पुलिस-अधिकारियों से न उलझें, नेताओं को गांवों में घुसने न दें
चढूनी ने कहा कि उचाना में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को आना था, लेकिन वह किसानों के विरोध के चलते नहीं आए। किसानों ने उनके हैलीपेड तक को खोद डाला। अंबाला में मुख्यमंत्री मनोहर लाल का विरोध किसानों ने किया तो गुहला चीका में जजपा के विधायक का विरोध हुआ। जगह-जगह पर भाजपा, जजपा के नेता आ रहे हैं उनका विरोध हो रहा है। क्या विरोध करने वाले किसान नहीं हैं। चढूनी ने किसानों से आह्वान किया कि वे पुलिस से नहीं टकराएं। न ही अधिकारियों से उलझें, लेकिन नेताओं को गांवों में न घुसने दें।
पंजाब से पहुंचे हजारों किसानों ने भरा जींद के किसानों में जोश
शनिवार दोपहर बाद पंजाब की ओर से करीब एक हजार वाहनों में किसान खटकड़ टोल पर पहुंचे। यहां किसानों ने हरियाणा-पंजाब भाईचारे के नारे लगाए और सरकार से कृषि कानून वापस लेने की मांग की। इस दौरान हरियाणा के किसानों में भी जोश भर गया। एक साथ हजारों वाहन के आने से खटकड़ टोल पर जाम की स्थिति पैदा हो गई, लेकिन किसानों ने अपने स्तर पर ही वाहनों को निकलवाकर यातायात व्यवस्था दुरुस्त करवाई। इसके बाद कुछ किसान ट्रक व बस में बैठकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए तो कुछ झांझ गांव में रात्रि ठहराव के लिए रुक गए। किसानों के खाने के लिए गांव के ग्रामीणों द्वारा व्यवस्था की हुई है। किसानों के जत्थे में काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।
बांगर के किसान नहीं सुनेंगे प्रधानमंत्री के मन की बात : पालवां
सर्व जातीय दाडन खाप चबूतरा पालवां के महासचिव एवं किसान नेता आजाद पालवां, सर्व जातीय खेड़ा खाप के प्रधान सतबीर बरसोला ने कहा कि 27 दिसंबर को पीएम नरेंद्र मोदी किसानों से मन की बात करेंगे। पीएम के मन की बात किसान नहीं सुनेंगे। जब पीएम किसानों के मन की बात नहीं सुन रहा हैं तो किसान क्यों पीएम मोदी की मन की बात सुने। 31 दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर कृषि कानून को रद्द करवाने की माग लेकर किसान धरने पर बैठे हैं, लेकिन केंद्र सरकार किसानों की बात पूरी करने की बजाय आंदोलन को लेकर बयानबाजी कर रही है।

खटकड़ टोल पर पहुंची पंजाब की महिला किसान। अमर उजाला- फोटो : Jind

खटकड़ टोल से आगे सड़क पर बैठे पंजाब से आए किसान। संवाद- फोटो : Jind

खटकड़ टोल पर किसानों को संबोधित करते हुए गुरनाम सिंह चढूनी। संवाद- फोटो : Jind