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Jind News: ये मासूम... सिस्टम बना बच्चा

Wed, 20 Nov 2024 11:28 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2024 11:28 PM IST
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This innocent child... became a child of the system
20जेएनडी26: विजय नगर में खुला आंगनबाड़ी केंद्र्र। संवाद - फोटो : अस्पताल में घर से लाए गए कंबल ओढ़े हुए मरीज।
सुशील टुर्ण
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जींद। जिले में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण के कारण आंगनबाड़ी में आने वाले नौनिहालों के लिए खतरा बना हुआ है। सरकार ने पहली से 12वीं कक्षा तक के स्कूलों को तो बंद करवाने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन आंगनबाड़ी की तरफ किसी का ध्यान नहीं हैं। चिकित्सकों के अनुसार छोटे बच्चों के फेफड़े बड़ों के मुकाबले कम होते हैं। इनका बीमार होने का ज्यादा डर रहता है।

जिले में 1433 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें लगभग 20 हजार से ज्यादा बच्चे प्रतिदिन आते हैं। इनकी तरफ प्रशासन व सरकार का ध्यान नहीं होने के कारण वायु प्रदूषण से इनको ज्यादा खतरा है। जिले में आठ खंड हैं। सभी खंडों में आंगनबाड़ी केंद्र खुले हैं। सुबह लगभग पौने नौ बजे आंगनबाड़ी केंद्र खुलते हैं और लगभग ढ़ाई बजे तक छोटे बच्चे यहां पर रहते हैं।
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अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्रों में तो बच्चों को पीने के पानी की भी बेहतर सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा इस प्रदूषण में इन नौनिहालों को बंद कमरे में भी रखना उचित नहीं है। बाहर अगर झूलों पर बच्चों को खेलने के लिए भी भेजा जाए तो प्रदूषण के कारण बच्चों के बीमार होने का डर बना रहता है। प्रदूषण में बच्चों को चर्म रोग, खांसी, जुकाम के अलावा सांस के रोग होने का डर रहता है। इसके अलावा निमोनिया, आंखों में पानी बहना और शरीर में इन्फेक्शन का डर होता है। शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों की छुट्टियां करने के बाद अब छोटे बच्चों को भी छुट्टियों की आस है, लेकिन विभागीय अधिकारियों के आदेशों के बिना आंगनबाड़ी केंद्रों को छुट्टियां करने का इंतजार बना है।
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सवाल... बच्चों के साथ कोई अनहोनी हुई तो जिम्मेदार कौन

जिले में बुधवार को डीसी ने प्ले स्कूलों को बंद करने के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र की तरफ प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर सरकार का ध्यान नहीं है। अगर प्रदूषण के कारण किसी बच्चे के साथ अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी भी प्रशासनिक अधिकारी लेने को तैयार नहीं होंगे। फिलहाल आंगनबाड़ी केंद्र चलाने वाली कर्मचारियों को भी इंतजार बना है।

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आदेश मिलेंगे तो करेंगे केंद्रों की छुट्टी

जिले में 1433 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। अभी तक मुख्यालय या सरकार की तरफ से छुट्टी करने की गाइडलाइन जारी नहीं की गई। अगर प्रदूषण के चलते छुट्टी के निर्देश मिलते हैं तो सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद करवा दिया जाएगा, ताकि छोटे बच्चे सुरक्षित रहें।


-सुलोचना कुंडू जिला महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी जींद।


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जल्दी चपेट मेें आते हैं छोटे बच्चे : बाल रोग चिकित्सक

एक्यूआई जिले में खतरनाक स्तर पर है। इसके कारण छोटे बच्चे बीमारियों की चपेट में जल्दी आते हैं। बच्चों को प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। इसके कारण आंखों में जलन, चर्म रोग, खांसी, जुखाम व निमोनिया होने का डर रहता है। अगर बाहर निकले तो मॉस्क पहनना चाहिए, ताकि कु छ हद तक बचा जा सके।

-रघुबीर सिंह पूनिया, बाल रोग चिकित्सक, नागरिक अस्पताल जींद।
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