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डिपो की 160 बसों के नहीं घूमे पहिये, रोडवेज को 13 लाख का नुकसान

Fri, 09 Sep 2022 12:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 09 Sep 2022 12:30 AM IST
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The wheels of 160 buses of the depot did not spin, roadways lost 13 lakhs
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण खाली पड़ा बस अड्डा। संवाद - फोटो : Jind
जींद। कुंडली में चालक की कार से कुचलकर हत्या करने के विरोध में रोडवेज का पूर्ण रूप से चक्का जाम रहा। वीरवार को जींद डिपो, नरवाना और सफीदों सबडिपो की 160 रोडवेज बसें अड्डे से भी बाहर नहीं निकलीं। रोडवेज कर्मचारी रात से ही पूरा दिन बस अड्डे पर धरना देते रहे। हालांकि निजी बसों ने अड्डे के बाहर से दिनभर सवारियां भरीं। बस अड्डे के बाहर पूरा दिन निजी बसें अड़े रहने सेजींद-संगरूर हाईवे जाम रहा। बसें नहीं चलने से रोडवेज को एक दिन में 13 लाख रुपये के करीब नुकसान हुआ। आमतौर पर हर रोज डिपो की बसों में हर रोज 15 से 16 हजार यात्री सफर करते हैं। भिवानी और रोहतक रूट पर बिना परमिट वाली बस चलती रही, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हड़ताल के चलते सारा दिन यात्री भटकते दिखाई दिए।
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वीरवार अल सुबह रोडवेज कर्मचारी बस स्टैंड परिसर में पहुंचे और हड़ताल शुरू की। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन व रोडवेज जीएम अशोक कौशिक बस स्टैंड परिसर पहुंचे और कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन रोडवेज कर्मचारियों का पूरा दिन धरना चलता रहा। धरना दे रहे कर्मचारियों ने हत्यारों को गिरफ्तार करने, मृतक के एक परिजन को सरकारी नौकरी देने और मुआवजा भी देने की मांग की। रोडवेज बस नहीं चलने से कैथल, दिल्ली, गुरुग्राम, हरिद्वार और कुरुक्षेत्र रूट के साथ-साथ ग्रामीण रूट पर चलने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि नरवाना, हांसी, बरवाला, पानीपत, असंध व गोहाना रूट पर प्राइवेट बस चलने से यात्रियों को थोड़ी बहुत राहत मिली।
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दिनभर चला बैठकों का दौर
रोडवेज कर्मचारियों को मनाने के लिए अधिकारी भी दिनभर यूनियन सदस्यों के साथ वार्ता करते रहे। वीरवार सुबह महाप्रबंधक अशोक कौशिक धरनास्थल पर पहुंचे, लेकिन कर्मचारियों ने उनकी बात नहीं मानी। दोपहर बाद एडीसी साहिल गुप्ता और डीएसपी जितेंद्र खटकड़ भी बैठक करने पहुंचे थे। उन्होंने भी कर्मचारियों को बस चलवाने का प्रयास किया, लेकिन प्रयास असफल रहा। अल सुबह भी किलोमीटर स्कीम की दो बस चलाने का प्रयास किया था, लेकिन परिचालक नहीं होने के चलते बसों को वापस बस स्टैंड परिसर में खड़ा करना पड़ा।
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शाम को भिवानी डिपो की किलोमीटर स्कीम वाली बस चली
बस स्टैंड जहां पूरा दिन सुनसान रहा। शाम को भिवानी डिपो की किलोमीटर स्कीम वाली बस अड्डे पर पहुंची जो कि पहले से ही खचाखच भरी हुई थी। जैसे ही बस आते दिखाई दी अड्डे के बाहर खड़ी सवारी उसकी तरफ दौड़ पड़ी। हालांकि बस में भीड़ होने के चलते काफी सवारी बिना चढ़े ही रह गई। इसके बाद बस भिवानी की तरफ रवाना हो गई।
ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को नहीं मिली परिवहन सेवा
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के चलते रोडवेज बसें ग्रामीण क्षेत्र में नहीं गई। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को परिवहन सेवा नहीं मिल पाई। गांव से शहर में पढने आने वाले छात्र-छात्राओं को ज्यादा परेशानी हुई। उन्हें शिक्षण संस्थानों तक आने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। वहीं भिवानी और रोहतक रूट पर बिना परमिट की बसों ने मनमर्जी किराया वसूला। जींद डिपो में 110 बसें हैं जबकि नरवाना सबडिपो में 25 और सफीदों सबडिपो में 20 रोडवेज बसें हैं। जींद से कैथल रोडवेज बसें आठ-दस चक्कर लगाती हैं। वहीं गुरुग्राम के लिए जींद डिपो की पांच बसें चलती है। इसके अलावा मथुरा के लिए एक, हरिद्वार के लिए दो और दिल्ली के लिए आठ से ज्यादा बसें जाती हैं।
गांव से सुबह आने में बहुत परेशानी हुई। बस नहीं चलने से कॉलेज में देर से पहुंची। अब वापस घर जाने के लिए भी परेशान होना पड़ेगा। सरकार को चाहिए कि रोडवेज कर्मचारियों की मांग को पूरा कर हड़ताल को खत्म करवाए।
-तन्नु, छात्रा, चाबरी
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के चलते गांव में बस नहीं गई। इसके कारण उन्हें शहर के शिक्षण संस्थान में आने के लिए घर से ऑटो में आना पड़ा। अब दोपहर बाद भी घर जाने के लिए प्राइवेट वाहन का सहारा लेना पड़ेगा।

-सिवानी, छात्रा, मोरखी
हड़ताल के चलते रोडवेज कर्मचारियों को समझाकर बसें चलाने का प्रयास किया गया था। मुख्यालय से ओर से भी निर्देश मिले थे कि किसी कर्मचारी को हड़ताल में शामिल होने के लिए अवकाश नहीं दिया जाए। हड़ताल पर रहने वाले कर्मचारियों की सूचना मुख्यालय भेजी जाएगी।
-अशोक कौशिक, रोडवेज जीएम जींद डिपो।

बस अड्डे पर बस के इंतजार में यात्री मुख्य गेट की तरफ आते हुए। संवाद

बस अड्डे पर बस के इंतजार में यात्री मुख्य गेट की तरफ आते हुए। संवाद- फोटो : Jind

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