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Jind News: आंदोलन, लंगर सेवा और शिक्षा सुधार में गांव की अनोखी भागीदारी
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10 जुलाना 01: करसोला गांव का राजकीय स्कूल जिसे ग्रामीणों ने संघर्ष के बाद अपग्रेड करवाया। संवाद
जुलाना। खेती-किसानी में अग्रणी पहचान रखने वाला करसोला गांव किसानों की जागरूकता और संघर्षशील सोच के लिए भी जाना जाता है। गांव के किसान केवल खेती तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि अपने अधिकारों और किसान हितों के लिए होने वाले आंदोलनों में भी भाग लेते रहे हैं।
किसान आंदोलन के दौरान करसोला गांव ने एकजुटता और सामाजिक सहयोग की मिसाल पेश की। आंदोलन के समर्थन में गांव से सबसे पहले 50 क्विंटल लड्डू दिल्ली भेजे गए जिससे आंदोलनरत किसानों का हौसला बढ़ा।
इसके अलावा आंदोलन के दौरान गांव की सभी बिरादरियों के सहयोग से दिल्ली बॉर्डर पर लगातार लंगर सेवा चलाई गई। लंगर की व्यवस्था और देखरेख में बिजेंद्र उर्फ भगत सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आंदोलन समाप्त होने के बाद उनका स्वागत किया गया।
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किसान आंदोलन के दौरान पूर्व सैनिक नरेंद्र लाठर ने किसानों के समर्थन में एक दिन की सांकेतिक भूख हड़ताल कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। ग्रामीणों का कहना है कि करसोला के किसानों में अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया।
स्कूल को अपग्रेड करवाने के लिए भी ग्रामीण छात्राओं के साथ भूख हड़ताल पर बैठे और जब तक स्कूल को अपग्रेड नहीं किया गया तब तक आंदोलन जारी रहा। इसके चलते प्रशासन को ग्रामीणों की मांग माननी पड़ी।
गांव की यही एकजुटता और सामाजिक चेतना उसे अन्य गांवों से अलग पहचान दिलाती है। खेती के साथ-साथ सामाजिक और किसान हितों के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी करसोला गांव की विशेषता बन चुकी है।
बाक्स
किसान देश की रीढ़ हैं। किसान आंदोलन के दौरान सांकेतिक भूख हड़ताल के माध्यम से मैंने किसानों के प्रति अपना समर्थन और एकजुटता व्यक्त की थी। -नरेंद्र लाठर, पूर्व सैनिक
बाक्स
दिल्ली बॉर्डर पर लगाए गए लंगर में गांव की सभी बिरादरियों का सहयोग मिला। यह गांव की एकता और किसान हितों के प्रति समर्पण का उदाहरण है। - बिजेंद्र लाठर उर्फ भगत सिंह
बाक्स
करसोला के किसान खेती के साथ-साथ अपने अधिकारों के प्रति भी जागरूक हैं। जब भी किसानों के हितों की बात आती है गांव के युवा और बुजुर्ग मिलकर आगे आते हैं। - राजपाल लाठर पूर्व सरपंच
बाक्स
किसान आंदोलन के दौरान गांव ने जिस तरह एकजुट होकर सहयोग दिया वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय है। किसानों में संघर्ष और सेवा दोनों की भावना है। - दीपक लाठर, युवा ग्रामीण।
10 जुलाना 01: करसोला गांव का राजकीय स्कूल जिसे ग्रामीणों ने संघर्ष के बाद अपग्रेड करवाया। संवाद
10 जुलाना 02: नरेंद्र लाठर।
10 जुलाना 03: बिजेंद्र लाठर।
10 जुलाना 04: राजपाल लाठर।
10 जुलाना 05: दीपक लाठर।
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किसान आंदोलन के दौरान करसोला गांव ने एकजुटता और सामाजिक सहयोग की मिसाल पेश की। आंदोलन के समर्थन में गांव से सबसे पहले 50 क्विंटल लड्डू दिल्ली भेजे गए जिससे आंदोलनरत किसानों का हौसला बढ़ा।
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इसके अलावा आंदोलन के दौरान गांव की सभी बिरादरियों के सहयोग से दिल्ली बॉर्डर पर लगातार लंगर सेवा चलाई गई। लंगर की व्यवस्था और देखरेख में बिजेंद्र उर्फ भगत सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आंदोलन समाप्त होने के बाद उनका स्वागत किया गया।
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किसान आंदोलन के दौरान पूर्व सैनिक नरेंद्र लाठर ने किसानों के समर्थन में एक दिन की सांकेतिक भूख हड़ताल कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। ग्रामीणों का कहना है कि करसोला के किसानों में अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया।
स्कूल को अपग्रेड करवाने के लिए भी ग्रामीण छात्राओं के साथ भूख हड़ताल पर बैठे और जब तक स्कूल को अपग्रेड नहीं किया गया तब तक आंदोलन जारी रहा। इसके चलते प्रशासन को ग्रामीणों की मांग माननी पड़ी।
गांव की यही एकजुटता और सामाजिक चेतना उसे अन्य गांवों से अलग पहचान दिलाती है। खेती के साथ-साथ सामाजिक और किसान हितों के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी करसोला गांव की विशेषता बन चुकी है।
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किसान देश की रीढ़ हैं। किसान आंदोलन के दौरान सांकेतिक भूख हड़ताल के माध्यम से मैंने किसानों के प्रति अपना समर्थन और एकजुटता व्यक्त की थी। -नरेंद्र लाठर, पूर्व सैनिक
बाक्स
दिल्ली बॉर्डर पर लगाए गए लंगर में गांव की सभी बिरादरियों का सहयोग मिला। यह गांव की एकता और किसान हितों के प्रति समर्पण का उदाहरण है। - बिजेंद्र लाठर उर्फ भगत सिंह
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करसोला के किसान खेती के साथ-साथ अपने अधिकारों के प्रति भी जागरूक हैं। जब भी किसानों के हितों की बात आती है गांव के युवा और बुजुर्ग मिलकर आगे आते हैं। - राजपाल लाठर पूर्व सरपंच
बाक्स
किसान आंदोलन के दौरान गांव ने जिस तरह एकजुट होकर सहयोग दिया वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय है। किसानों में संघर्ष और सेवा दोनों की भावना है। - दीपक लाठर, युवा ग्रामीण।
10 जुलाना 01: करसोला गांव का राजकीय स्कूल जिसे ग्रामीणों ने संघर्ष के बाद अपग्रेड करवाया। संवाद
10 जुलाना 02: नरेंद्र लाठर।
10 जुलाना 03: बिजेंद्र लाठर।
10 जुलाना 04: राजपाल लाठर।
10 जुलाना 05: दीपक लाठर।

10 जुलाना 01: करसोला गांव का राजकीय स्कूल जिसे ग्रामीणों ने संघर्ष के बाद अपग्रेड करवाया। संवाद

10 जुलाना 01: करसोला गांव का राजकीय स्कूल जिसे ग्रामीणों ने संघर्ष के बाद अपग्रेड करवाया। संवाद

10 जुलाना 01: करसोला गांव का राजकीय स्कूल जिसे ग्रामीणों ने संघर्ष के बाद अपग्रेड करवाया। संवाद

10 जुलाना 01: करसोला गांव का राजकीय स्कूल जिसे ग्रामीणों ने संघर्ष के बाद अपग्रेड करवाया। संवाद