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Jind News: रागी जत्थों ने गुरुबाणी कीर्तन से संगत को किया निहाल

Thu, 29 Oct 2026 01:56 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:56 AM IST
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The Ragi groups blessed the congregation with Gurbani Kirtan.
फोटो 28जेएनडी23-गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर आयोजित समागम में गुरुबाणी कीर्तन श्रवण करती सं
जींद। ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब में चौथी पातशाही श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ का भोग डाला गया।
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इसके बाद सायंकाल धार्मिक समागम सजाया गया जिसमें विभिन्न गुरुद्वारों से पहुंचे रागी जत्थों ने गुरुबाणी कीर्तन से संगत को किया निहाल किया। संगत को गुरु शिक्षाओं पर चलने की प्रेरणा दी।
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समागम की शुरुआत गुरुद्वारा साहिब के हजूरी रागी भाई जसबीर सिंह के जत्थे ने गुरुबाणी कीर्तन से की। उन्होंने अहंकार त्यागने और परमात्मा से जुड़ने का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन कर्मभूमि है। इंसान जैसे कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। दूसरों से ईर्ष्या करने और उनका बुरा सोचने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता।
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इसके बाद बंगला साहिब गुरुद्वारा, रोहतक के हजूरी रागी भाई गुरुदेव सिंह के जत्थे ने गुरुबाणी के शबदों का गायन किया। गुरुद्वारा साहिब के प्रमुख ग्रंथी गुरविंदर सिंह रत्तक ने गुरु रामदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म लाहौर की चुना मंडी में हुआ था।
उन्होंने तीसरी पातशाही गुरु अमरदास जी की निष्ठापूर्वक सेवा की। उनकी सेवा, भक्ति और समर्पण से प्रभावित होकर गुरु अमरदास जी ने उन्हें चौथे गुरु के रूप में गुरु गद्दी सौंपी। अंत में छठी पातशाही गुरुद्वारा, कुरुक्षेत्र के हजूरी रागी भाई सूबा सिंह के जत्थे ने गुरुबाणी कीर्तन कर संगत को निहाल किया।
इस दौरान हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यकारिणी सदस्य सरदार करनैल सिंह निम्नाबाद ने गुरुद्वारा साहिब की सुखमनी सेवा सोसायटी की सेवादारों को सम्मानित किया। गुरुघर के प्रवक्ता बलविंदर सिंह ने कहा कि गुरु रामदास जी सच्ची सेवा और दृढ़ भक्ति के प्रतीक थे।

वहीं, गुरुद्वारा साहिब के मैनेजर गुरविंदर सिंह चौगामा ने संगत का स्वागत करते हुए कहा कि गुरुओं के ऐतिहासिक दिवस मनाने से नई पीढ़ी को गुरु इतिहास और शिक्षाओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। समागम के समापन पर संगत में गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया।
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