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Jind News: देशभक्तों ने अंग्रेजों के खिलाफ बुलंद की अपनी आवाज
Mon, 24 Mar 2025 12:16 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 24 Mar 2025 12:16 AM IST
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23जेएनडी14-सूबे सिंह स्मारक में शहीदी दिवस पर संबोधित करते हुए वक्ता। स्रोत संगठन
जींद। शहीद यादगार समिति की तरफ से रविवार को शहीदी दिवस पर सूबेसिंह स्मारक में सेमिनार का आयोजन किया गया। शुरुआत में शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुुई। इसकी अध्यक्षता सदस्य सुरेश राठी ने किया।
मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए किसान नेता इंद्रजीत सिंह ने शहीदों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि शहीद भगत सिंह और उनके साथियों का इंकलाब (क्रांति) भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और अन्य क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ न केवल अपनी आवाज बुलंद की, बल्कि अपने प्राणों की आहुति देकर देशवासियों में आजादी की अलख जगाई। उनका नारा इंकलाब जिंदाबाद और विचारधारा साम्राज्यवाद, शोषण और अन्याय के खिलाफ थी। वे समाजवादी विचारों से प्रेरित थे और एक ऐसे भारत की कल्पना करते थे जहां समानता, न्याय और स्वतंत्रता हर नागरिक का अधिकार हो। उन्होंने यह भी जोर दिया कि मौजूदा दौर में उनके विचारों को अपनाकर सामाजिक न्याय और समानता के लिए कार्य करने की आवश्यकता है। उनकी सोच केवल औपनिवेशिक शासन के खिलाफ नहीं थी, बल्कि यह शोषण, असमानता और अन्याय के खिलाफ एक व्यापक संघर्ष का प्रतीक थी। इस मौके पर मंगत राम शास्त्री, एडवोकेट अशोक बत्रा, सोहनदास, संजीव ढांडा, प्रकाश चंद्र, डॉ. मुरारी, मा. रोहताश, इंद्र, राजकुमार, कश्मीर सिंह, कर्मबीर संधु, मनदीप नेहरा, नूतन प्रकाश मौजूद रही।
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मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए किसान नेता इंद्रजीत सिंह ने शहीदों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि शहीद भगत सिंह और उनके साथियों का इंकलाब (क्रांति) भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और अन्य क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ न केवल अपनी आवाज बुलंद की, बल्कि अपने प्राणों की आहुति देकर देशवासियों में आजादी की अलख जगाई। उनका नारा इंकलाब जिंदाबाद और विचारधारा साम्राज्यवाद, शोषण और अन्याय के खिलाफ थी। वे समाजवादी विचारों से प्रेरित थे और एक ऐसे भारत की कल्पना करते थे जहां समानता, न्याय और स्वतंत्रता हर नागरिक का अधिकार हो। उन्होंने यह भी जोर दिया कि मौजूदा दौर में उनके विचारों को अपनाकर सामाजिक न्याय और समानता के लिए कार्य करने की आवश्यकता है। उनकी सोच केवल औपनिवेशिक शासन के खिलाफ नहीं थी, बल्कि यह शोषण, असमानता और अन्याय के खिलाफ एक व्यापक संघर्ष का प्रतीक थी। इस मौके पर मंगत राम शास्त्री, एडवोकेट अशोक बत्रा, सोहनदास, संजीव ढांडा, प्रकाश चंद्र, डॉ. मुरारी, मा. रोहताश, इंद्र, राजकुमार, कश्मीर सिंह, कर्मबीर संधु, मनदीप नेहरा, नूतन प्रकाश मौजूद रही।
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