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अफसरों को रास नहीं आ रहा एंबुलेंस का चार्ज
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नागरिक अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस का फाइल फोटो। संवाद।
- फोटो : Jind
जींद। नागरिक अस्पताल में रेफरल ट्रांसपोर्ट (एंबुलेंस) का चार्ज किसी भी स्वास्थ्य अधिकारी को रास नहीं आ रहा है। एक वर्ष में अब तक पांचवें स्वास्थ्य अधिकारी ने रेफरल ट्रांसपोर्ट का चार्ज संभाला है। इससे पहले चार अधिकारी यह चार्ज छोड़ चुके हैं। पिछले तीन महीने में ही तीन स्वास्थ्य अधिकारी यह चार्ज छोड़ चुके हैं। 15 जून को एंबुलेंस में एक बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद तो सिविल सर्जन को जैसे जबरदस्ती यह चार्ज स्वास्थ्य अधिकारियों को थोपना पड़ रहा है।
डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला तीन-चार वर्ष से लगातार रेफरल ट्रांसपोर्ट के डिप्टी सिविल सर्जन रहे। उन्होंने अपने कार्य की अधिकता तथा अपने पिता के बीमार होने का कारण बताते हुए पिछले वर्ष सितंबर महीने के अंत में रेफरल ट्रांसपोर्ट का चार्ज छोड़ दिया। इसके बाद यह चार्ज डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके मान को दिया गया। इस वर्ष 15 जून को एंबुलेंस में एक बच्चे की मौत हो गई थी। इसमें आरोप था कि बच्चे की मौत एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से हुई है। इसके बाद 26 जून को डॉ. जेके मान ने रेफरल ट्रांसपोर्ट का चार्ज यह कहते हुए छोड़ दिया कि उनके पास पहले से ही अधिक कार्य है। इसलिए वह एंबुलेंस को अधिक समय नहीं दे पाते। एंबुलेंस एक संवेदनशील चार्ज है, इसमें अधिक समय देने की जरूरत है।
26 जून को डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल ने चार्ज संभाल लिया। 25 दिन बाद ही डॉ. रमेश पांचाल ने यह कहते हुए चार्ज छोड़ दिया कि उन्होंने केवल कुछ दिन के लिए व्यवस्था बनाए रखने के लिए चार्ज लिया था। उनके पास पहले से ही अधिक कार्यक्रमों का बोझ है, इसलिए वह पहले से ही बेहतर चल रहे अपने कार्यक्रमों को चला रहे हैं। एंबुलेंस के लिए उनके पास भी अधिक समय नहीं है। इसके बाद जुलाई में डॉ. अनिल कुमार को रेफरल ट्रांसपोर्ट का चार्ज दिया गया। डॉ. अनिल कुमार ने अभी तक रेफरल के लिए अच्छा कार्य किया। उन्होंने समय-समय पर एंबुलेंस की जांच की। अब पिछले सप्ताह उन्होंने भी यह कहते हुए एंबुलेंस का चार्ज छोड़ दिया कि उनके पास ओपीडी के लिए समय नहीं निकल पाता। ओपीडी करने वाले दो चिकित्सकों के लंबी छुट्टी पर जाने के कारण उनके पास एंबुलेंस के लिए समय नहीं बच पाता। अब सिविल सर्जन डॉ. मंजू कादियान ने यह एंबुलेंस का चार्ज डॉ. विनोद कुमार को दिया है।
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डॉ. जेके मान हो चुके हैं चार्जशीट
एंबुलेंस के डिप्टी सिविल सर्जन रहे डॉ. जेके मान को एंबुलेंस में बच्चे की मौत के मामले में जिम्मेदार ठहराते हुए चार्जशीट कर दिया था। हालांकि उनको शनिवार को ही चार्जशीट किया है लेकिन यह जांच 17 जून से ही चल रही थी। इसी कारण कोई भी स्वास्थ्य अधिकारी एंबुलेंस का चार्ज नहीं लेना चाहता क्योंकि एंबुलेंस सेवा में काफी परेशानियां हैं। यदि कोई अनहोनी हो जाए तो गाज प्रभारी पर ही गिरती है।
स्वास्थ्य विभाग में कई बार व्यस्तताओं तथा कार्यक्रमों में सुधार के लिए प्रभार बदल दिए जाते हैं। कार्यक्रमों को चलाने के लिए किसी न किसी को प्रभारी तो बनाया ही जाना है। किसी भी स्वास्थ्य अधिकारी ने चार्ज नहीं छोड़ा है। यह आम रुटीन के तहत ही होता है।
-डॉ. मंजू कादियान, सिविल सर्जन
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डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला तीन-चार वर्ष से लगातार रेफरल ट्रांसपोर्ट के डिप्टी सिविल सर्जन रहे। उन्होंने अपने कार्य की अधिकता तथा अपने पिता के बीमार होने का कारण बताते हुए पिछले वर्ष सितंबर महीने के अंत में रेफरल ट्रांसपोर्ट का चार्ज छोड़ दिया। इसके बाद यह चार्ज डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके मान को दिया गया। इस वर्ष 15 जून को एंबुलेंस में एक बच्चे की मौत हो गई थी। इसमें आरोप था कि बच्चे की मौत एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से हुई है। इसके बाद 26 जून को डॉ. जेके मान ने रेफरल ट्रांसपोर्ट का चार्ज यह कहते हुए छोड़ दिया कि उनके पास पहले से ही अधिक कार्य है। इसलिए वह एंबुलेंस को अधिक समय नहीं दे पाते। एंबुलेंस एक संवेदनशील चार्ज है, इसमें अधिक समय देने की जरूरत है।
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26 जून को डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल ने चार्ज संभाल लिया। 25 दिन बाद ही डॉ. रमेश पांचाल ने यह कहते हुए चार्ज छोड़ दिया कि उन्होंने केवल कुछ दिन के लिए व्यवस्था बनाए रखने के लिए चार्ज लिया था। उनके पास पहले से ही अधिक कार्यक्रमों का बोझ है, इसलिए वह पहले से ही बेहतर चल रहे अपने कार्यक्रमों को चला रहे हैं। एंबुलेंस के लिए उनके पास भी अधिक समय नहीं है। इसके बाद जुलाई में डॉ. अनिल कुमार को रेफरल ट्रांसपोर्ट का चार्ज दिया गया। डॉ. अनिल कुमार ने अभी तक रेफरल के लिए अच्छा कार्य किया। उन्होंने समय-समय पर एंबुलेंस की जांच की। अब पिछले सप्ताह उन्होंने भी यह कहते हुए एंबुलेंस का चार्ज छोड़ दिया कि उनके पास ओपीडी के लिए समय नहीं निकल पाता। ओपीडी करने वाले दो चिकित्सकों के लंबी छुट्टी पर जाने के कारण उनके पास एंबुलेंस के लिए समय नहीं बच पाता। अब सिविल सर्जन डॉ. मंजू कादियान ने यह एंबुलेंस का चार्ज डॉ. विनोद कुमार को दिया है।
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डॉ. जेके मान हो चुके हैं चार्जशीट
एंबुलेंस के डिप्टी सिविल सर्जन रहे डॉ. जेके मान को एंबुलेंस में बच्चे की मौत के मामले में जिम्मेदार ठहराते हुए चार्जशीट कर दिया था। हालांकि उनको शनिवार को ही चार्जशीट किया है लेकिन यह जांच 17 जून से ही चल रही थी। इसी कारण कोई भी स्वास्थ्य अधिकारी एंबुलेंस का चार्ज नहीं लेना चाहता क्योंकि एंबुलेंस सेवा में काफी परेशानियां हैं। यदि कोई अनहोनी हो जाए तो गाज प्रभारी पर ही गिरती है।
स्वास्थ्य विभाग में कई बार व्यस्तताओं तथा कार्यक्रमों में सुधार के लिए प्रभार बदल दिए जाते हैं। कार्यक्रमों को चलाने के लिए किसी न किसी को प्रभारी तो बनाया ही जाना है। किसी भी स्वास्थ्य अधिकारी ने चार्ज नहीं छोड़ा है। यह आम रुटीन के तहत ही होता है।
-डॉ. मंजू कादियान, सिविल सर्जन