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युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति चिंताजनक : डॉ. नरेश जागलान
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22जेएनडी07:पोस्टर के माध्यम से स्वयंसेविकाएं नशे के प्रति लोगों को जागरूक करती हुई। स्रोत संस्थ
जींद। हिंदू कन्या महाविद्यालय में चल रहे सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के चौथे दिन विभिन्न सामाजिक और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। शिविर की शुरुआत लक्ष्यगीत और योग अभ्यास के साथ हुई। इसके बाद मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए।
मनोवैज्ञानिक डॉ. नरेश जागलान ने नशा मुक्त भारत मानसिक शक्ति ही व्यसन मुक्त जीवन की कुंजी विषय पर छात्राओं को संबोधित किया। डॉ. जागलान ने कहा कि आज के दौर में युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति चिंताजनक है। उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि मानसिक तनाव और कमजोर इच्छाशक्ति युवाओं को नशे की ओर धकेलती है।
उन्होंने छात्राओं को मानसिक रूप से सशक्त बनने के तरीके सिखाए ताकि वे स्वयं और समाज को इस बुराई से बचा सकें। व्याख्यान के बाद एनएसएस स्वयंसेविकाओं ने महाविद्यालय की ओर से गोद लिए गए गांव खोखरी का दौरा किया। वहां छात्राओं ने ''नशा मुक्त समाज'' के संकल्प के साथ जागरूकता रैली निकाली।
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ग्रामीणों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करते हुए छात्राओं ने स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की अपील की। गांव के ऐतिहासिक तालाब का निरीक्षण किया। स्वयंसेविकाओं ने ग्रामीणों से बातचीत कर तालाबों के संरक्षण, जल संचयन और पर्यावरण स्वच्छता के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि जल संसाधनों को बचाना भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है।
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मनोवैज्ञानिक डॉ. नरेश जागलान ने नशा मुक्त भारत मानसिक शक्ति ही व्यसन मुक्त जीवन की कुंजी विषय पर छात्राओं को संबोधित किया। डॉ. जागलान ने कहा कि आज के दौर में युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति चिंताजनक है। उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि मानसिक तनाव और कमजोर इच्छाशक्ति युवाओं को नशे की ओर धकेलती है।
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उन्होंने छात्राओं को मानसिक रूप से सशक्त बनने के तरीके सिखाए ताकि वे स्वयं और समाज को इस बुराई से बचा सकें। व्याख्यान के बाद एनएसएस स्वयंसेविकाओं ने महाविद्यालय की ओर से गोद लिए गए गांव खोखरी का दौरा किया। वहां छात्राओं ने ''नशा मुक्त समाज'' के संकल्प के साथ जागरूकता रैली निकाली।
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ग्रामीणों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करते हुए छात्राओं ने स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की अपील की। गांव के ऐतिहासिक तालाब का निरीक्षण किया। स्वयंसेविकाओं ने ग्रामीणों से बातचीत कर तालाबों के संरक्षण, जल संचयन और पर्यावरण स्वच्छता के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि जल संसाधनों को बचाना भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है।