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Jind News: करसोला गांव के पुस्तकालय से संवर रहा युवाओं का भविष्य
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7 जुलाना 01: गांव के पुस्तकालय में पढ़ाई करते युवा। संवाद
जुलाना। करसोला गांव का पुस्तकालय क्षेत्र के युवाओं के लिए उम्मीद और सफलता का केंद्र बनकर उभरा है। पुस्तकालय में उपलब्ध शांत अध्ययन वातावरण, प्रतियोगी परीक्षाओं की उपयोगी पुस्तकों और सामूहिक अध्ययन संस्कृति के बल पर दर्जनों युवा सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने में सफल हुए हैं। गांव के अन्य विद्यार्थियों में भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के प्रति उत्साह बढ़ा है।
पहले प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को शहरों का रुख करना पड़ता था। कोचिंग और आवास पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कई परिवारों के लिए चुनौती बन जाता था। ऐसे में गांव के पुस्तकालय ने कम खर्च में बेहतर अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराकर युवाओं की राह आसान की है।
यहां नियमित रूप से अध्ययन करने वाले युवाओं ने मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के दम पर विभिन्न विभागों और निजी कंपनियों में नौकरी हासिल की है। नौकरी प्राप्त कर चुके युवा अब पुस्तकालय में आने वाले विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। वे अपने अनुभव साझा कर उन्हें परीक्षा की तैयारी के तरीके, समय प्रबंधन और अध्ययन सामग्री के चयन संबंधी जानकारी दे रहे हैं।
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इससे पुस्तकालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। गांव का यह पुस्तकालय अब केवल किताबें पढ़ने का स्थान नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं के भविष्य निर्माण का सशक्त माध्यम बन चुका है।
प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां पहुंचकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि पुस्तकालय ने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई जागरूकता पैदा की है तथा आने वाले समय में यहां से और अधिक युवा सफलता हासिल करेंगे।
इन युवाओं की लग चुकी है सरकारी नौकरी
पुस्तकालय के इंचार्ज जोगेंद्र ने बताया कि गांव में 2019 में सामाजिक सरोकार परिवार संस्था ने गांव में पुस्तकालय खुलवाया था। तब से लेकर अब तक रोजाना दर्जनों युवा पढ़ने के लिए यहां आते हैं जिनमें से गांव के जोगेंद्र, मनेष, पुनीत, नीरज, विजय, नरेंद्र, जितेंद्र आदि ने पुस्तकालय में पढ़ाई कर सरकारी नौकरी प्राप्त की है।
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गांव का पुस्तकालय युवाओं के लिए वरदान साबित हुआ है। सीमित संसाधनों वाले परिवारों के बच्चों को यहां बेहतर अध्ययन वातावरण मिला है। कई युवाओं की सफलता दूसरों के लिए प्रेरणा बनी है।- एडवोकेट मंजीत लाठर, ग्रामीण
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शिक्षा और ज्ञान ही समाज को आगे बढ़ाते हैं। पुस्तकालय के माध्यम से युवाओं को सही दिशा मिली है। भविष्य में भी इसके संसाधनों को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। -सुनील कुमार, ग्रामीण
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पहले युवा समय का सदुपयोग कम कर पाते थे लेकिन पुस्तकालय बनने के बाद पढ़ाई का माहौल विकसित हुआ है। यहां से प्रेरित होकर कई युवाओं ने अपने लक्ष्य हासिल किए हैं।
-जोगेंद्र जांगड़ा, ग्रामीण।
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पुस्तकालय गांव की सबसे सकारात्मक पहलों में से एक है। युवाओं को नशे और अन्य बुरी आदतों से दूर रखकर शिक्षा की ओर प्रेरित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। - रामअवतार, ग्रामीण
फोटो कैप्शन:
7 जुलाना 01: गांव के पुस्तकालय में पढ़ाई करते युवा। संवाद
7 जुलाना 02: मनजीत।
7 जुलाना 03: सुनील।
7 जुलाना 04:जोगेंद्र
7 जुलाना 05: रामअवतार
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पहले प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को शहरों का रुख करना पड़ता था। कोचिंग और आवास पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कई परिवारों के लिए चुनौती बन जाता था। ऐसे में गांव के पुस्तकालय ने कम खर्च में बेहतर अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराकर युवाओं की राह आसान की है।
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यहां नियमित रूप से अध्ययन करने वाले युवाओं ने मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के दम पर विभिन्न विभागों और निजी कंपनियों में नौकरी हासिल की है। नौकरी प्राप्त कर चुके युवा अब पुस्तकालय में आने वाले विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। वे अपने अनुभव साझा कर उन्हें परीक्षा की तैयारी के तरीके, समय प्रबंधन और अध्ययन सामग्री के चयन संबंधी जानकारी दे रहे हैं।
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इससे पुस्तकालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। गांव का यह पुस्तकालय अब केवल किताबें पढ़ने का स्थान नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं के भविष्य निर्माण का सशक्त माध्यम बन चुका है।
प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां पहुंचकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि पुस्तकालय ने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई जागरूकता पैदा की है तथा आने वाले समय में यहां से और अधिक युवा सफलता हासिल करेंगे।
इन युवाओं की लग चुकी है सरकारी नौकरी
पुस्तकालय के इंचार्ज जोगेंद्र ने बताया कि गांव में 2019 में सामाजिक सरोकार परिवार संस्था ने गांव में पुस्तकालय खुलवाया था। तब से लेकर अब तक रोजाना दर्जनों युवा पढ़ने के लिए यहां आते हैं जिनमें से गांव के जोगेंद्र, मनेष, पुनीत, नीरज, विजय, नरेंद्र, जितेंद्र आदि ने पुस्तकालय में पढ़ाई कर सरकारी नौकरी प्राप्त की है।
गांव का पुस्तकालय युवाओं के लिए वरदान साबित हुआ है। सीमित संसाधनों वाले परिवारों के बच्चों को यहां बेहतर अध्ययन वातावरण मिला है। कई युवाओं की सफलता दूसरों के लिए प्रेरणा बनी है।- एडवोकेट मंजीत लाठर, ग्रामीण
शिक्षा और ज्ञान ही समाज को आगे बढ़ाते हैं। पुस्तकालय के माध्यम से युवाओं को सही दिशा मिली है। भविष्य में भी इसके संसाधनों को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। -सुनील कुमार, ग्रामीण
पहले युवा समय का सदुपयोग कम कर पाते थे लेकिन पुस्तकालय बनने के बाद पढ़ाई का माहौल विकसित हुआ है। यहां से प्रेरित होकर कई युवाओं ने अपने लक्ष्य हासिल किए हैं।
-जोगेंद्र जांगड़ा, ग्रामीण।
पुस्तकालय गांव की सबसे सकारात्मक पहलों में से एक है। युवाओं को नशे और अन्य बुरी आदतों से दूर रखकर शिक्षा की ओर प्रेरित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। - रामअवतार, ग्रामीण
फोटो कैप्शन:
7 जुलाना 01: गांव के पुस्तकालय में पढ़ाई करते युवा। संवाद
7 जुलाना 02: मनजीत।
7 जुलाना 03: सुनील।
7 जुलाना 04:जोगेंद्र
7 जुलाना 05: रामअवतार

7 जुलाना 01: गांव के पुस्तकालय में पढ़ाई करते युवा। संवाद

7 जुलाना 01: गांव के पुस्तकालय में पढ़ाई करते युवा। संवाद

7 जुलाना 01: गांव के पुस्तकालय में पढ़ाई करते युवा। संवाद

7 जुलाना 01: गांव के पुस्तकालय में पढ़ाई करते युवा। संवाद