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कड़ाके की ठंड शुरू, जमने लगा पाला, न्यूनतम तापमान पहुंचा चार डिग्री
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जलालपुर कलां गांव में पराली पर जमा पाला।
- फोटो : Jind
दिसंबर महीना समाप्त होते-होते कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। हालांकि दिन में धूप भी खिली लेकिन सुबह-शाम व रात के समय जबरदस्त ठंड शुरू हो गई है। वीरवार सुबह जिले में कई जगह पाला जमा। वहीं न्यूनतम तापमान चार डिग्री दर्ज किया गया। ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को फसलों को पाले बचाने के लिए सलाह जारी की है।
दरअसल एकदम से तापमान में गिरावट आने के कारण पाला पड़ता है। हालांकि गेहूं की फसल को तो पाले से खास नुकसान नहीं होता लेकिन सरसों व सब्जियों की फसलों को इससे नुकसान होता है। ऐसे में इसके लिए किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए। खंड कृषि अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र के अनुसार फसलों को पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करें। इससे पौधों पर पाले का असर नहीं होता। इसके अलावा यदि सिंचाई की व्यवस्था नहीं हो सके तो खेत के चारों और अलग-अलग जगहों पर किसान धुआं कर सकते हैं। इससे धुएं की परत खेत के उपर जम जाती है और पाला सीधा फसल को नुकसान नहीं पहुंचाता।
जरा सी सावधानी से नहीं घटेगा पशुओं का दूध
वहीं वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. राजू शर्मा के अनुसार सर्दी के मौसम में दूध देने वाले पशुओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में किसान जरा सी सावधान रख कर पूरा दूध ले सकते हैं। इसके लिए पशुओं को बांधने के बाड़े में गर्मी के लिए उचित प्रबंध रखें। पशुओं को वजन के अनुसार खनिज मिश्रण देते रहें। इसके अलावा दो-तीन दिन में गुड़ देते रहे। सुबह पशुओं को एक दम से बाड़े से बाहर नहीं निकालें।
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सर्दी से बचने के लिए करें उपाय
सर्दी से बचने के लिए हर किसी को उचित उपाय करना चाहिए। विशेष कर बच्चों व बुजुर्गों को सर्दी से अधिक खतरा होता है। ऐसे में धूप निकलने पर ही बच्चों व बुजुर्गों को बाहर निकालें। बुजुर्गों को बार-बार गर्म पेय देते रहें। सर्दी का प्रकोप होने पर चिकित्सक को दिखाएं।
-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल, जींद।
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दरअसल एकदम से तापमान में गिरावट आने के कारण पाला पड़ता है। हालांकि गेहूं की फसल को तो पाले से खास नुकसान नहीं होता लेकिन सरसों व सब्जियों की फसलों को इससे नुकसान होता है। ऐसे में इसके लिए किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए। खंड कृषि अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र के अनुसार फसलों को पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करें। इससे पौधों पर पाले का असर नहीं होता। इसके अलावा यदि सिंचाई की व्यवस्था नहीं हो सके तो खेत के चारों और अलग-अलग जगहों पर किसान धुआं कर सकते हैं। इससे धुएं की परत खेत के उपर जम जाती है और पाला सीधा फसल को नुकसान नहीं पहुंचाता।
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जरा सी सावधानी से नहीं घटेगा पशुओं का दूध
वहीं वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. राजू शर्मा के अनुसार सर्दी के मौसम में दूध देने वाले पशुओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में किसान जरा सी सावधान रख कर पूरा दूध ले सकते हैं। इसके लिए पशुओं को बांधने के बाड़े में गर्मी के लिए उचित प्रबंध रखें। पशुओं को वजन के अनुसार खनिज मिश्रण देते रहें। इसके अलावा दो-तीन दिन में गुड़ देते रहे। सुबह पशुओं को एक दम से बाड़े से बाहर नहीं निकालें।
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सर्दी से बचने के लिए करें उपाय
सर्दी से बचने के लिए हर किसी को उचित उपाय करना चाहिए। विशेष कर बच्चों व बुजुर्गों को सर्दी से अधिक खतरा होता है। ऐसे में धूप निकलने पर ही बच्चों व बुजुर्गों को बाहर निकालें। बुजुर्गों को बार-बार गर्म पेय देते रहें। सर्दी का प्रकोप होने पर चिकित्सक को दिखाएं।
-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल, जींद।