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मजदूरों के कल्याण के लिए बोर्ड की वेबसाइट को खोला जाए : सतीश बड़ौदा
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। संयुक्त निर्माण मजदूर मोर्चा हरियाणा ने उचाना के विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री को ज्ञापन सौंपा है। इसमें मजदूरों की समस्याओं को विधानसभा में उठाने और समाधान की मांग की।
सतीश बड़ौदा ने कहा कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 17-18 जनवरी 2026 को जींद, कैथल, करनाल और पानीपत जिलों के मजदूर डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिड्ढा के आवास पर दिन-रात का पड़ाव डालेंगे। बड़ौदा ने बताया कि हरियाणा में निर्माण मजदूरों के कल्याण के लिए 2005 बोर्ड का गठन किया गया था। इसे 2018 में ऑनलाइन कर दिया गया।
हालांकि छह महीने से पोर्टल बंद हैं। इससे मजदूरों को मिलने वाले लाभ नहीं मिल रहे हैं। मोर्चा ने मांग की है कि बोर्ड की वेबसाइट को खोला जाए। रुके सभी लाभों का भुगतान किया जाए। मोर्चा की अन्य मांगों में बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना, निर्माण मजदूरों की 90 दिन की वेरिफिकेशन का अधिकार यूनियनों को देना शामिल है।
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उन्होंने बढ़ती महंगाई के मद्देनजर हर पांच साल में वेतन संशोधन कर न्यूनतम मासिक वेतन 26 हजार रुपये करने की भी मांग की। 29 श्रम कानूनों की जगह लाए गए चार नए लेबर कोड को मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया। प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण में आने वाली बाधाओं को दूर करने और फैमिली आईडी की अनिवार्यता को समाप्त करने की अपील की गई है। इस अवसर पर संदीप जाजवान, जोगिंद्र इगराह, कश्मीर सिंह, रवि बड़ोदा, पवन कुमार, सरोज जुलाना, प्रदीप जुलाना और कश्मीर भगवानपुरा मौजूद रहे।
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जींद। संयुक्त निर्माण मजदूर मोर्चा हरियाणा ने उचाना के विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री को ज्ञापन सौंपा है। इसमें मजदूरों की समस्याओं को विधानसभा में उठाने और समाधान की मांग की।
सतीश बड़ौदा ने कहा कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 17-18 जनवरी 2026 को जींद, कैथल, करनाल और पानीपत जिलों के मजदूर डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिड्ढा के आवास पर दिन-रात का पड़ाव डालेंगे। बड़ौदा ने बताया कि हरियाणा में निर्माण मजदूरों के कल्याण के लिए 2005 बोर्ड का गठन किया गया था। इसे 2018 में ऑनलाइन कर दिया गया।
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हालांकि छह महीने से पोर्टल बंद हैं। इससे मजदूरों को मिलने वाले लाभ नहीं मिल रहे हैं। मोर्चा ने मांग की है कि बोर्ड की वेबसाइट को खोला जाए। रुके सभी लाभों का भुगतान किया जाए। मोर्चा की अन्य मांगों में बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना, निर्माण मजदूरों की 90 दिन की वेरिफिकेशन का अधिकार यूनियनों को देना शामिल है।
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उन्होंने बढ़ती महंगाई के मद्देनजर हर पांच साल में वेतन संशोधन कर न्यूनतम मासिक वेतन 26 हजार रुपये करने की भी मांग की। 29 श्रम कानूनों की जगह लाए गए चार नए लेबर कोड को मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया। प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण में आने वाली बाधाओं को दूर करने और फैमिली आईडी की अनिवार्यता को समाप्त करने की अपील की गई है। इस अवसर पर संदीप जाजवान, जोगिंद्र इगराह, कश्मीर सिंह, रवि बड़ोदा, पवन कुमार, सरोज जुलाना, प्रदीप जुलाना और कश्मीर भगवानपुरा मौजूद रहे।