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भाजपा सरकार मजदूर विरोधी फैसले लेकर जनता में पैदा कर रही है असंतोष : सुरेखा
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04जेएनडी07-नौ जुलाई को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल की तैयारियों को लेकर बैठक करते हुए निर्मा
जींद। नौ जुलाई को होने वाली देशव्यापी हड़ताल को लेकर लखमीरवाला, निर्जन, अहिरका, चंद्रलोक कॉलोनी, लेबर चौक सफीदों रोड पर निर्माण व मनरेगा मजदूरों की बैठक हुई। सीटू राज्य अध्यक्ष सुरेखा, सर्व कर्मचारी संघ जिला प्रधान संजीव ढांडा और सीटू जिला सचिव कपूर सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी फैसले लेकर जनता में असंतोष पैदा कर रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने पांच साल पहले पूंजीपतियों के हित में मजदूर विरोधी चार लेबर कोड पारित किए थे, जिन्हें अब लागू करने जा रही है। इन कानूनों के पास होने के बाद देश के कुल फैक्ट्री मजदूरों का 74 प्रतिशत न्यूनतम श्रम अधिकारों से बाहर हो गया है।
देश के 70 प्रतिशत उद्योगों में मालिकों को ये अधिकार मिल जाएगा कि वे कभी भी मजदूरों को फैक्ट्री से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं। इसमें न न्यूनतम वेतन है, न काम की समय सीमा तय है और न ही पक्का रोजगार का प्रबंध।
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केंद्र सरकार लगातार जन विरोधी एवं कॉरपोरेट परस्त नीतियां लागू कर रही है। लेबर कोड से सरकार काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 12 कर रही है और पक्के रोजगार को खत्म किया जा रहा। मजदूर-कर्मचारी संगठनों की मांग है कि चारों लेबर कोड रद्द किए जाए। श्रम कानून बदलना बंद करो।
सभी उद्योगों और सरकारी क्षेत्र में श्रम कानून शक्ति से लागू किए जाए। सभी कच्चे कर्मचारियों, परियोजना वर्करों, आशा, मिड डे मील, आंगनबाड़ी और क्रैच वर्करों को पक्का किया जाए। जब तक पक्का नहीं किया जाता, तब तक न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये लागू किया जाए। सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए। निकाले गए कर्मचारियों को ड्यूटी पर बहाल किया जाए और पुरानी पेंशन बहाल की जाए। खाली पदों पर पक्की भर्ती की जाए।
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उन्होंने कहा कि भाजपा ने पांच साल पहले पूंजीपतियों के हित में मजदूर विरोधी चार लेबर कोड पारित किए थे, जिन्हें अब लागू करने जा रही है। इन कानूनों के पास होने के बाद देश के कुल फैक्ट्री मजदूरों का 74 प्रतिशत न्यूनतम श्रम अधिकारों से बाहर हो गया है।
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देश के 70 प्रतिशत उद्योगों में मालिकों को ये अधिकार मिल जाएगा कि वे कभी भी मजदूरों को फैक्ट्री से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं। इसमें न न्यूनतम वेतन है, न काम की समय सीमा तय है और न ही पक्का रोजगार का प्रबंध।
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केंद्र सरकार लगातार जन विरोधी एवं कॉरपोरेट परस्त नीतियां लागू कर रही है। लेबर कोड से सरकार काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 12 कर रही है और पक्के रोजगार को खत्म किया जा रहा। मजदूर-कर्मचारी संगठनों की मांग है कि चारों लेबर कोड रद्द किए जाए। श्रम कानून बदलना बंद करो।
सभी उद्योगों और सरकारी क्षेत्र में श्रम कानून शक्ति से लागू किए जाए। सभी कच्चे कर्मचारियों, परियोजना वर्करों, आशा, मिड डे मील, आंगनबाड़ी और क्रैच वर्करों को पक्का किया जाए। जब तक पक्का नहीं किया जाता, तब तक न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये लागू किया जाए। सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए। निकाले गए कर्मचारियों को ड्यूटी पर बहाल किया जाए और पुरानी पेंशन बहाल की जाए। खाली पदों पर पक्की भर्ती की जाए।