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Jind News: 800 बंदर पकड़ने के बाद भी कम नहीं हुआ आतंक
Sat, 08 Jun 2024 02:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 08 Jun 2024 02:30 AM IST
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07जेएनडी06: गीता विद्या मंदिर स्कूल रोड पर सुबह के समय बंदरों का झूंड। संवाद
उचाना। शहर के लोगों को बंदरों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए नगरपालिका ने बंदरों को पकड़ने का ठेका दिया हुआ है। अब तक करीब 800 बंदर पकड़े जा चुके हैं, मगर उनका आतंक अभी भी कम नहीं हुआ है। बंदरों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
लोगों ने कहा कि आसपास के क्षेत्र के लोग बंदरों को उचाना शहर के आसपास छोड़कर चले जाते हैं। ऐसे में 800 के करीब बंदर पकड़े जाने के बाद भी इनकी संख्या बढ़ रही है। अब भी दो हजार से अधिक बंदर शहर में घूम रहे हैं। सतबीर, मांगेराम ने कहा कि बंदरों के आतंक के चलते लोगों ने अपने मकानों पर लोहे के जाल लगवाए हुए हैं। गली में बच्चे, बुजुर्ग अकेले नहीं जा सकते है, क्योंकि बंदरों के काटने का डर रहता है। लोग बंदरों के चलते घरों में कैद होकर रह गए हैं।
बाजारों में सुबह से लेकर देर रात तक बंदरों की टोली नजर आती है। कई बार तो इनकी एक टोली में 50 से अधिक बंदर होते हैं। ऐसे में अकेला व्यक्ति भी उनके पास से गुजरने से डरता है। उन्होंने कहा कि बंदर जाल लगवाने पर कम से कम 20 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। मजबूरी में बंदर जाल लगवाने पड़ रहे हैं। बंदरों के आतंक के चलते बच्चों, बुजुर्गों एवं महिलाओं को घरों में कैद होकर रहना पड़ रहा है। ऐसी कोई गली, बाजार नहीं है जहां पर बंदरों के आतंक से लोग परेशान न हों।
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उन्होंने कहा कि छतों पर कपड़े तक नहीं सुखा सकते हैं। कपड़े सुखाने के दौरान डंडा लेकर पहरा देना पड़ता है, क्योंकि बंदर उनको उठा ले जाते हैं। गलती से मकान का दरवाजा खुला रह जाए तो वे अंदर घुसकर सामान उठा ले जाते हैं। जो बंदर हैं उन सभी को नपा पकड़वाने का काम करे। नपा सचिव विक्रमजीत ने कहा कि करीब 800 बंदर पकड़े जा चुके हैं। दो हजार से अधिक बंदर अब भी शहर में हैं। बंदरों को पकड़वाने का काम निरंतर जारी है।
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लोगों ने कहा कि आसपास के क्षेत्र के लोग बंदरों को उचाना शहर के आसपास छोड़कर चले जाते हैं। ऐसे में 800 के करीब बंदर पकड़े जाने के बाद भी इनकी संख्या बढ़ रही है। अब भी दो हजार से अधिक बंदर शहर में घूम रहे हैं। सतबीर, मांगेराम ने कहा कि बंदरों के आतंक के चलते लोगों ने अपने मकानों पर लोहे के जाल लगवाए हुए हैं। गली में बच्चे, बुजुर्ग अकेले नहीं जा सकते है, क्योंकि बंदरों के काटने का डर रहता है। लोग बंदरों के चलते घरों में कैद होकर रह गए हैं।
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बाजारों में सुबह से लेकर देर रात तक बंदरों की टोली नजर आती है। कई बार तो इनकी एक टोली में 50 से अधिक बंदर होते हैं। ऐसे में अकेला व्यक्ति भी उनके पास से गुजरने से डरता है। उन्होंने कहा कि बंदर जाल लगवाने पर कम से कम 20 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। मजबूरी में बंदर जाल लगवाने पड़ रहे हैं। बंदरों के आतंक के चलते बच्चों, बुजुर्गों एवं महिलाओं को घरों में कैद होकर रहना पड़ रहा है। ऐसी कोई गली, बाजार नहीं है जहां पर बंदरों के आतंक से लोग परेशान न हों।
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उन्होंने कहा कि छतों पर कपड़े तक नहीं सुखा सकते हैं। कपड़े सुखाने के दौरान डंडा लेकर पहरा देना पड़ता है, क्योंकि बंदर उनको उठा ले जाते हैं। गलती से मकान का दरवाजा खुला रह जाए तो वे अंदर घुसकर सामान उठा ले जाते हैं। जो बंदर हैं उन सभी को नपा पकड़वाने का काम करे। नपा सचिव विक्रमजीत ने कहा कि करीब 800 बंदर पकड़े जा चुके हैं। दो हजार से अधिक बंदर अब भी शहर में हैं। बंदरों को पकड़वाने का काम निरंतर जारी है।

07जेएनडी06: गीता विद्या मंदिर स्कूल रोड पर सुबह के समय बंदरों का झूंड। संवाद