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Jind News: जुलाना में धड़ल्ले से जला रहे पराली, प्रशासन बेखबर
Sun, 27 Oct 2024 01:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 27 Oct 2024 01:17 AM IST
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जुलाना-हांसी रोड पर जलाई गई पराली। संवाद
जींद। जुलाना क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर निरंतर बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण क्षेत्र के किसानों की ओर से खेतों में पराली जलाना है। प्रशासन और सरकार ने पराली जलाने से रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हुए हैं, लेकिन इन सबके बावजूद जल रही है। पराली जलाने को लेकर अब प्रशासन व सरकार काफी सख्ती अपनाए हुए है। इसके बावजूद प्रशासन को पता नहीं चल रहा है।
किसान अब अलग तरीके अपनाकर पराली जला रहे हैं। किसान रात के अंधेरे में धान के अवशेषों में आग लगा देते हैं, ताकि सुबह होने से पहले ही उस खेत की बुवाई कर रात को आग लगाने के सबूत को ही मिटा दिया जाए। जैसे ही अंधेरा होता है खेतों में धान के अवशेष जलते दिखाई दे रहे हैं। इसकी वजह से क्षेत्र का वातावरण व हवा दूषित हो रही है, जो काफी चिंताजनक है। जुलाना के किसी भी सड़क पर चले जाएं, खेतों में धान के अवशेषों से धुआं उठता नजर आएगा।
किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए बाकायदा टीमें बनाई हुई हैं। इसके अलावा ऐसे किसानों को चिह्नित किया जा रहा है, जिन्होंने पराली में आग लगाई है। कहने को तो सरकारी तंत्र सेटेलाइट आग लगने की वाली जगह तुरंत बता देता है लेकिन पिछले कई दिनों से रात और दिन में धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है, पर कृषि विभाग के आंकड़ों में एक भी पराली जलाने का मामला सामने नहीं आ रहा है। लगातार पराली जलाने के कारण जिले का एक्यूआई भी नीचे नहीं आ रहा है। इससे हवा जहरीली हो गई है।
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पिल्लूखेड़ा क्षेत्र में भी रोजाना जलाई जा रही पराली
सरकार और प्रशासन की सख्ती के बाद भी किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। रोजाना रात को पराली जलाई जा रही है। पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के खेतों में रोजाना आग लगाई जाएगी, जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है वहीं लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। शुक्रवार और शनिवार को खेड़ी तलोडा के खेतों में पराली के करीब दस एकड़ में आग लगाई हुई थी। हालांकि वहां पर कोई व्यक्ति नहीं था। आग लगने के कारण आसपास धुआं छाया हुआ था, जहां से सांस लेना भी बेहद मुश्किल हो रहा था।
अभी तक विभाग की ओर से कोई लोकेशन नही आई है। मौके पर जाकर मुआयना किया जायेगा। अगर किसानों ने पराली जलाई है तो किसानों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -हेमंत कुमार, कृषि विकास अधिकारी, जुलाना।
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किसान अब अलग तरीके अपनाकर पराली जला रहे हैं। किसान रात के अंधेरे में धान के अवशेषों में आग लगा देते हैं, ताकि सुबह होने से पहले ही उस खेत की बुवाई कर रात को आग लगाने के सबूत को ही मिटा दिया जाए। जैसे ही अंधेरा होता है खेतों में धान के अवशेष जलते दिखाई दे रहे हैं। इसकी वजह से क्षेत्र का वातावरण व हवा दूषित हो रही है, जो काफी चिंताजनक है। जुलाना के किसी भी सड़क पर चले जाएं, खेतों में धान के अवशेषों से धुआं उठता नजर आएगा।
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किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए बाकायदा टीमें बनाई हुई हैं। इसके अलावा ऐसे किसानों को चिह्नित किया जा रहा है, जिन्होंने पराली में आग लगाई है। कहने को तो सरकारी तंत्र सेटेलाइट आग लगने की वाली जगह तुरंत बता देता है लेकिन पिछले कई दिनों से रात और दिन में धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है, पर कृषि विभाग के आंकड़ों में एक भी पराली जलाने का मामला सामने नहीं आ रहा है। लगातार पराली जलाने के कारण जिले का एक्यूआई भी नीचे नहीं आ रहा है। इससे हवा जहरीली हो गई है।
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पिल्लूखेड़ा क्षेत्र में भी रोजाना जलाई जा रही पराली
सरकार और प्रशासन की सख्ती के बाद भी किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। रोजाना रात को पराली जलाई जा रही है। पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के खेतों में रोजाना आग लगाई जाएगी, जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है वहीं लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। शुक्रवार और शनिवार को खेड़ी तलोडा के खेतों में पराली के करीब दस एकड़ में आग लगाई हुई थी। हालांकि वहां पर कोई व्यक्ति नहीं था। आग लगने के कारण आसपास धुआं छाया हुआ था, जहां से सांस लेना भी बेहद मुश्किल हो रहा था।
अभी तक विभाग की ओर से कोई लोकेशन नही आई है। मौके पर जाकर मुआयना किया जायेगा। अगर किसानों ने पराली जलाई है तो किसानों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -हेमंत कुमार, कृषि विकास अधिकारी, जुलाना।

जुलाना-हांसी रोड पर जलाई गई पराली। संवाद