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‘आजादी की लड़ाई में आर्य समाज का विशेष योगदान’
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महर्षि दयानंद योग चिकित्सा आश्रम में आयोजित सत्संग में प्रवचन करते स्वामी रामवेश। संवाद
- फोटो : Jind
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जींद। शहर के महर्षि दयानंद योग चिकित्सा आश्रम में रविवार को मासिक वैदिक सत्संग एवं वेद प्रचार समारोह आयोजित किया। इसमें मुख्य रूप से स्वामी रामवेश, जयभगवान शास्त्री, पार्षद संतोष श्योराण, पार्षद सतपाल कुंडू, देवेंद्र सिंह सहारण जुलानी, सत्यवीर शास्त्री, एडवोकेट रणधीर सिंह रेढू, रविंद्र ढांडा और सुनील शास्त्री उचाना पहुंचे।
स्वामी रामवेश ने आजादी के दिवानों का इतिहास सुनाया और बताया कि वेद को जिसने भी पढ़ा, सुना और समझा विशेष क्रांति उसके दिल में आ गई। इसलिए देश में आज तिरंगा लहराने का उत्साह बना हुआ है। हम सब को देश की सुरक्षा के लिए पूर्ण प्रयास करना चाहिए। जयभगवान शास्त्री ने देश की आजादी के इतिहास को बड़ी गहराई से समझाया। उन्होंने बताया कि 1857 की क्रांति में महर्षि दयानंद और उनके गुरु स्वामी बिरजानंद दंडी का विशेष योगदान रहा। झांसी की रानी, तात्या टोपे इत्यादि को प्रेरणा देकर अंग्रेजों के खिलाफ लडने के लिए तैयार किया। आगे चलकर आर्य समाज के हजारों कार्यकर्ता अंग्रेजों के विरोध में संकल्प लेकर खड़े हो गए। रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव आदि ने फांसी का फंदा चूम लिया। इसलिए आर्य समाज का आजादी की लड़ाई में विशेष योगदान रहा। भजनो पदेशक सुनील शास्त्री ने क्रांतिकारी गीतों के द्वारा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पंजाब से आए सत्यवीर शास्त्री ने उधम सिंह और भगत सिंह की याद दिलवाई।
इस अवसर पर जगफूल सिंह ढिल्लो, सूर्यदेव आर्य, जोरा सिंह योगाचार्य, महीपाल ढिल्लो, सूरजमल, कैप्टन जोगिंद्र सिंह खटकड़, सुबेर सिंह आर्य, रणवीर सिंह आर्य, कैप्टन रामदत्त आर्य मौजूद रहे।
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स्वामी रामवेश ने आजादी के दिवानों का इतिहास सुनाया और बताया कि वेद को जिसने भी पढ़ा, सुना और समझा विशेष क्रांति उसके दिल में आ गई। इसलिए देश में आज तिरंगा लहराने का उत्साह बना हुआ है। हम सब को देश की सुरक्षा के लिए पूर्ण प्रयास करना चाहिए। जयभगवान शास्त्री ने देश की आजादी के इतिहास को बड़ी गहराई से समझाया। उन्होंने बताया कि 1857 की क्रांति में महर्षि दयानंद और उनके गुरु स्वामी बिरजानंद दंडी का विशेष योगदान रहा। झांसी की रानी, तात्या टोपे इत्यादि को प्रेरणा देकर अंग्रेजों के खिलाफ लडने के लिए तैयार किया। आगे चलकर आर्य समाज के हजारों कार्यकर्ता अंग्रेजों के विरोध में संकल्प लेकर खड़े हो गए। रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव आदि ने फांसी का फंदा चूम लिया। इसलिए आर्य समाज का आजादी की लड़ाई में विशेष योगदान रहा। भजनो पदेशक सुनील शास्त्री ने क्रांतिकारी गीतों के द्वारा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पंजाब से आए सत्यवीर शास्त्री ने उधम सिंह और भगत सिंह की याद दिलवाई।
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इस अवसर पर जगफूल सिंह ढिल्लो, सूर्यदेव आर्य, जोरा सिंह योगाचार्य, महीपाल ढिल्लो, सूरजमल, कैप्टन जोगिंद्र सिंह खटकड़, सुबेर सिंह आर्य, रणवीर सिंह आर्य, कैप्टन रामदत्त आर्य मौजूद रहे।
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