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Jind News: लजवाना खुर्द गांव के सोनू को दूसरी बार मिला वीरता पुरस्कार
Thu, 27 Jul 2023 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 27 Jul 2023 11:59 PM IST
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सोनू अहलावत को सम्मानित करते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर तपन कुमार।
जुलाना। क्षेत्र के लजवाना खुर्द गांव के जवान सोनू अहलावत को दिल्ली के वसंत कुंज में शौर्य दिवस के मौके पर इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर तपन कुमार ने दूसरी बार वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया है। पिछले साल 15 अगस्त को उनका नाम पुरस्कार के लिए चयनित हुआ था।
सोनू अहलावत को पहली बार नौ अप्रैल को गैलेंट्री अवाॅर्ड मिला था। सोनू को अवाॅर्ड मिलने से पूरे परिवार और गांव में खुशी का माहौल बना हुआ है। एक किसान परिवार में जन्मे सोनू अहलावत का बचपन से ही सपना था कि वो सेना में भर्ती होकर देश का नाम रोशन करे। सोनू के पिता रणबीर एक किसान हंै और माता एक गृहिणी हंै। सोनू का सीआरपीएफ में 21 मार्च 2012 को चयन हुआ था।
सोनू की पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के नक्सल एरिया में हुई थी। सोनू ने बताया कि पांच अगस्त 2017 को उनकी पोस्टिंग श्रीनगर में हो गई। 26 जनवरी 2019 को श्रीनगर के खुनमू में आतंकवादियों ने हमला कर दिया। इसमें सोनू गभीर रूप से घायल हो गए थे। घायल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पाकिस्तानी आतंकवादियों सेे लगातार लड़ते रहे।
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इस ऑपरेशन में उन्होंने दो आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। ऑपरेशन पूरा होने के बाद सोनू ने अपनी चोटों के बारेें में साथियों को बताया। सीआरपीएफ के जवानों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां पर सोनू के पैर से गोली निकली और जबड़े का जटिल ऑपरेशन हुआ। सोनू ने बताया कि उन्होंने अब तक 22 ऑपरेशन में भाग लिया है और 58 आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा है। उनकी वैली क्वाट ऑपरेशन टीम पूरी दुनिया में मशहूर हैंं जो ऑपरेशन पर जाने के बाद कामयाब होकर ही लौटती है।
सोनू 2 ऑपरेशन में गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। सोनू की सीआरपीएफ में 11 साल की सर्विस हो चुकी है। सोनू के पिता किसान रणबीर सिंह ने बताया कि उनके बेटे को अवाॅर्ड मिलने पर पूरे गांव में खुशी की लहर है।
उनके परिवार की इच्छा थी कि उनके परिवार का कोई बच्चा सीआरपीएफ में भर्ती होकर देश की सेवा करे। उनके छोटे बेटे सोनू ने उनके परिवार की इच्छा पूरी करते हुए भर्ती होकर देश और गांव का नाम रोशन किया है।
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सोनू अहलावत को पहली बार नौ अप्रैल को गैलेंट्री अवाॅर्ड मिला था। सोनू को अवाॅर्ड मिलने से पूरे परिवार और गांव में खुशी का माहौल बना हुआ है। एक किसान परिवार में जन्मे सोनू अहलावत का बचपन से ही सपना था कि वो सेना में भर्ती होकर देश का नाम रोशन करे। सोनू के पिता रणबीर एक किसान हंै और माता एक गृहिणी हंै। सोनू का सीआरपीएफ में 21 मार्च 2012 को चयन हुआ था।
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सोनू की पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के नक्सल एरिया में हुई थी। सोनू ने बताया कि पांच अगस्त 2017 को उनकी पोस्टिंग श्रीनगर में हो गई। 26 जनवरी 2019 को श्रीनगर के खुनमू में आतंकवादियों ने हमला कर दिया। इसमें सोनू गभीर रूप से घायल हो गए थे। घायल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पाकिस्तानी आतंकवादियों सेे लगातार लड़ते रहे।
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इस ऑपरेशन में उन्होंने दो आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। ऑपरेशन पूरा होने के बाद सोनू ने अपनी चोटों के बारेें में साथियों को बताया। सीआरपीएफ के जवानों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां पर सोनू के पैर से गोली निकली और जबड़े का जटिल ऑपरेशन हुआ। सोनू ने बताया कि उन्होंने अब तक 22 ऑपरेशन में भाग लिया है और 58 आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा है। उनकी वैली क्वाट ऑपरेशन टीम पूरी दुनिया में मशहूर हैंं जो ऑपरेशन पर जाने के बाद कामयाब होकर ही लौटती है।
सोनू 2 ऑपरेशन में गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। सोनू की सीआरपीएफ में 11 साल की सर्विस हो चुकी है। सोनू के पिता किसान रणबीर सिंह ने बताया कि उनके बेटे को अवाॅर्ड मिलने पर पूरे गांव में खुशी की लहर है।
उनके परिवार की इच्छा थी कि उनके परिवार का कोई बच्चा सीआरपीएफ में भर्ती होकर देश की सेवा करे। उनके छोटे बेटे सोनू ने उनके परिवार की इच्छा पूरी करते हुए भर्ती होकर देश और गांव का नाम रोशन किया है।