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Jind News: श्रीराम ने किया रावण का वध, जयकारों से गूंजा पंडाल
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02जेएनडी15 :लंकापति रावण के मरने के बाद भाई विभीषण विलाप करते हुए। स्रोत आयोजक।
नरवाना। पुरानी अनाज मंडी में श्रीरामा भारतीय कला केंद्र की ओर से आयोजित रामलीला मंचन का समापन बुधवार देर रात हुआ। अंतिम दिन के मंचन में रावण, कुंभकरण, मेघनाद और अहिरावण के युद्ध और वध के दृश्य प्रस्तुत किए गए। दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारों से पूरा पंडाल गुंजायमान कर दिया।
अंतिम दिन की लीला में दिखाया गया कि रावण अपने महामंत्री को कुंभकरण को जगाने का आदेश देता है। काफी प्रयासों के बाद जब कुंभकरण जागता है तो वह रावण दरबार पहुंचकर युद्ध की कमान संभालता है। युद्ध में भगवान राम के हाथों कुंभकरण का वध हो जाता है। इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के बीच मायावी युद्ध हुआ जिसमें लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया।
आगे चलकर अहिरावण और हनुमान के बीच भी युद्ध का मंचन किया गया जहां हनुमान ने अहिरावण का अंत कर दिया। इस बीच जब रावण को मेघनाद और अहिरावण की मृत्यु का समाचार मिलता है तो वह विचलित हो उठता है। इसके बावजूद वह अंतिम युद्ध के लिए स्वयं मैदान में उतरता है।
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राम और रावण के बीच भयंकर युद्ध का दृश्य दर्शकों को बांधे रखता है। युद्ध में घायल रावण को राम ने परास्त कर दिया। उसके बाद लक्ष्मण द्वारा रावण से शिक्षा ग्रहण करने का दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। अंत में रावण अपने प्राणों का त्याग कर देता है जिसे देखकर दर्शक भगवान राम की जाती का जश्न मनाते हैं।
इस अवसर पर स्वतंत्र सहायता समूह के अध्यक्ष कृष्ण श्योकंद और मार्केट कमेटी वाइस चेयरमैन सत्यप्रकाश सैनी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्हें कला केंद्र प्रधान भारत भूषण गर्ग व कलाकारों ने मोमेंटो भेंटकर सम्मानित किया।
मंचन में संरक्षक सुशील कौशिक एडवोकेट, मंडी प्रधान ईश्वर गोयल, नप प्रधान प्रतिनिधि हंसराज समैण सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समापन के साथ ही पूरे पंडाल में राम भक्तों की भावनाएं चरम पर थीं और रामलीला के मंचन को यादगार बनाने के लिए कलाकारों की मेहनत की सराहना की गई।
इन कलाकारों ने निभाए यह किरदार
रामलीला में राम की भूमिका अमन वर्मा, लक्ष्मण की रामप्रकाश, हनुमान की प्रेम अरोड़ा, रावण की नरेंद्र कुकरेजा, मेघनाथ की शैलेंद्र गर्ग और कुंभकरण की भूमिका ललित उर्फ काकू ने निभाई।
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अंतिम दिन की लीला में दिखाया गया कि रावण अपने महामंत्री को कुंभकरण को जगाने का आदेश देता है। काफी प्रयासों के बाद जब कुंभकरण जागता है तो वह रावण दरबार पहुंचकर युद्ध की कमान संभालता है। युद्ध में भगवान राम के हाथों कुंभकरण का वध हो जाता है। इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के बीच मायावी युद्ध हुआ जिसमें लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया।
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आगे चलकर अहिरावण और हनुमान के बीच भी युद्ध का मंचन किया गया जहां हनुमान ने अहिरावण का अंत कर दिया। इस बीच जब रावण को मेघनाद और अहिरावण की मृत्यु का समाचार मिलता है तो वह विचलित हो उठता है। इसके बावजूद वह अंतिम युद्ध के लिए स्वयं मैदान में उतरता है।
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राम और रावण के बीच भयंकर युद्ध का दृश्य दर्शकों को बांधे रखता है। युद्ध में घायल रावण को राम ने परास्त कर दिया। उसके बाद लक्ष्मण द्वारा रावण से शिक्षा ग्रहण करने का दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। अंत में रावण अपने प्राणों का त्याग कर देता है जिसे देखकर दर्शक भगवान राम की जाती का जश्न मनाते हैं।
इस अवसर पर स्वतंत्र सहायता समूह के अध्यक्ष कृष्ण श्योकंद और मार्केट कमेटी वाइस चेयरमैन सत्यप्रकाश सैनी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्हें कला केंद्र प्रधान भारत भूषण गर्ग व कलाकारों ने मोमेंटो भेंटकर सम्मानित किया।
मंचन में संरक्षक सुशील कौशिक एडवोकेट, मंडी प्रधान ईश्वर गोयल, नप प्रधान प्रतिनिधि हंसराज समैण सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समापन के साथ ही पूरे पंडाल में राम भक्तों की भावनाएं चरम पर थीं और रामलीला के मंचन को यादगार बनाने के लिए कलाकारों की मेहनत की सराहना की गई।
इन कलाकारों ने निभाए यह किरदार
रामलीला में राम की भूमिका अमन वर्मा, लक्ष्मण की रामप्रकाश, हनुमान की प्रेम अरोड़ा, रावण की नरेंद्र कुकरेजा, मेघनाथ की शैलेंद्र गर्ग और कुंभकरण की भूमिका ललित उर्फ काकू ने निभाई।