फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Shradh will start from September 10, a coincidence made after 16 years, this time it will be one more day

दस सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध, 16 साल बाद बना संयोग इस बार एक दिन अधिक रहेंगे

Thu, 08 Sep 2022 12:36 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 08 Sep 2022 12:36 AM IST
विज्ञापन
Shradh will start from September 10, a coincidence made after 16 years, this time it will be one more day
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

जींद। इस बार दस सितंबर से श्राद्ध शुरू हो रहे हैं, जोकि 25 सितंबर तक चलेंगे। इस बार श्राद्ध 16 दिन चलेंगे। अमूमन यह 15 दिन ही चलते हैं। श्राद्ध के दिनों में शुभ कार्य टाले जाते हैं। इन 16 दिनों तक बाजारों में भी रौनक कम रहती है। इन 16 दिनों में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। इन दिनों में लगभग हर घर में अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए यज्ञ किए जाते हैं तथा कन्याओं को भोज भी करवाया जाता है।
हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृ पक्ष यानी श्राद्ध की शुरुआत होती है। इस बार दस सितंबर से पितृ तर्पण श्राद्ध पक्ष शुरू होने जा रहे हैं। श्राद्ध पक्ष 25 सितंबर तक रहेंगे।
विज्ञापन

आचार्य पवन शर्मा ने बताया कि इस साल श्राद्ध पक्ष 15 दिन की बजाए 16 दिन के रहने वाले हैं। पितृपक्ष में ऐसा संयोग 16 साल बाद आया है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान हमारे पितृ पृथ्वी लोक पर अपने सगे, संबंधी लोगों से अपनी आत्मा की मुक्ति और भोजन लेने के लिए मिलने आते हैं। श्राद्ध पक्ष के दौरान अगर श्राद्ध किया जाए तो पितरों की आत्मा तृप्त होती है और अपना शुभाशीष देते हैं। इसी कारण हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। पितृ पक्ष समापन के अगले दिन से ही शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। इस साल शारदीय नवरात्र 26 सितंबर से प्रारंभ हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पितृ पक्ष में नहीं होते शुभ कार्य
पितृ पक्ष के दौरान कुछ समय के लिए शुभ कार्यों को टाला जाता है। पितृ पक्ष में पितरों से निमित्त पिंडदान की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं करने से पितरों की आत्मा तृप्त नहीं होती है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या यानी सोलह दिनों को पितृ पक्ष कहा जाता है। जिस तिथि को किसी बुजुर्ग का देहांत होता है, उस तिथि को पितृ पक्ष में उनका श्राद्ध किया जाता है।

भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व
पितृ पक्ष में पिंडदान व श्राद्ध कर्म के लिए भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा करने से प्रेत से पितृ योनी में जाने का रास्ता खुल जाता है। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि कौए पितृ का रूप होते हैं। श्राद्ध ग्रहण करने के लिए हमारे पितृ कौए का रूप धारण कर नियत तिथि पर दोपहर के समय हमारे घर आते हैं। अगर उन्हें श्राद्ध नहीं मिलता तो वह रुष्ट हो जाते हैं। इसलिए कौए को भोजन इसी दिन करवाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed