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कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न व्यापक चुनौती : प्रो. शालिनी सिंह
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06सीटीके09-सुपवा में आयोजित संगोष्ठी में मौजूद विशेषज्ञ व शिक्षक। स्रोत:कॉलेज
रोहतक। महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी कार्य वातावरण को बढ़ावा देने के एक सक्रिय प्रयास में डीएलसी सुपवा के वास्तुकला विभाग में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम विषय पर वीरवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य महिलाओं के कार्यस्थल पर उत्पीड़न से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने और रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति प्रस्तावित करने के लिए विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को एक साथ लाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत एमडीयू के मनोविज्ञान विभाग की प्रो. शालिनी सिंह ने की। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न केवल एक कानूनी विषय नहीं है, यह एक व्यापक चुनौती है, जो हमारे पेशेवर स्थानों में महिलाओं की गरिमा को कमजोर करती है। जरूरत पड़ने पर पुरुष सहकर्मियों के दुर्व्यवहार के प्रति अपनी असहजता को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना महिलाओं की जिम्मेदारी है।
डॉ. शैफाली नागपाल ने यौन उत्पीड़न के विभिन्न पहलुओं जैसे आपराधिक और नागरिक कानूनों की स्थिति, यूजीसी नियम, उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारियां, आंतरिक शिकायत तंत्र आदि पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने महिलाओं से किसी भी अप्रिय घटना का सामना करने पर सक्रिय रूप से रिपोर्ट करने का आह्वान किया। रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक ने आज के पेशेवर परिदृश्य में ऐसे मुद्दों को संबोधित करने के महत्व को व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न से मुक्त कार्यस्थल बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में एक है। यह कार्यशाला संवाद और सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करती है, जो संगठनों के भीतर लैंगिक संवेदनशीलता का सम्मान करने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।
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कार्यक्रम की शुरुआत एमडीयू के मनोविज्ञान विभाग की प्रो. शालिनी सिंह ने की। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न केवल एक कानूनी विषय नहीं है, यह एक व्यापक चुनौती है, जो हमारे पेशेवर स्थानों में महिलाओं की गरिमा को कमजोर करती है। जरूरत पड़ने पर पुरुष सहकर्मियों के दुर्व्यवहार के प्रति अपनी असहजता को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना महिलाओं की जिम्मेदारी है।
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डॉ. शैफाली नागपाल ने यौन उत्पीड़न के विभिन्न पहलुओं जैसे आपराधिक और नागरिक कानूनों की स्थिति, यूजीसी नियम, उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारियां, आंतरिक शिकायत तंत्र आदि पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने महिलाओं से किसी भी अप्रिय घटना का सामना करने पर सक्रिय रूप से रिपोर्ट करने का आह्वान किया। रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक ने आज के पेशेवर परिदृश्य में ऐसे मुद्दों को संबोधित करने के महत्व को व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न से मुक्त कार्यस्थल बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में एक है। यह कार्यशाला संवाद और सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करती है, जो संगठनों के भीतर लैंगिक संवेदनशीलता का सम्मान करने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।
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