{"_id":"679bc152261c0801410f53c3","slug":"seeing-the-large-crowd-it-was-already-known-that-the-accident-would-happen-jind-news-c-199-1-sroh1009-129276-2025-01-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: भीड़ ज्यादा देखकर पहले ही हो गया था हादसे का आभास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: भीड़ ज्यादा देखकर पहले ही हो गया था हादसे का आभास
विज्ञापन
30जेएनडी35: रामपति के घर पर विलाप करती महिलाएं। ग्रामीण
जींद। महाकुंभ में स्नान के लिए गई रामपति व नरेंद्र के परिवार को रात को ही हादसे का आभास हो गया था। इससे बचने के लिए वह 200 फीट तक वापस भी चले, लेकिन अचानक भीड़ बेकाबू हो गई और वह सभी कुचले गए। इसमें नरेंद्र समेत छह बेहोश हो गए और महिला रामपति की मौत हो गई। लगभग 40 मिनट के बाद महाकुंभ में चीख मच गई।
राजपुरा निवासी नरेंद्र ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ गया था। उनके साथ रिश्ते में दादी लगने वाली रामपति भी थी। वह 29 जनवरी की शाम को आठ बजे पहुंचे थे। इसके बाद वह रात को ही संगम घाट पर एक बजे पहुंच गए। जब वहां पर माहौल देखा तो भीड़ बहुत ज्यादा थी। कुछ लोग किलकारियां मार रहे थे। उनको हादसे का आभास हुआ तो उसने रामपति को कहा कि दादी भीड़ ज्यादा है, वापस चलें। इस दौरान वह तुरंत वापस चल पड़े। लगभग 200 फीट चले थे कि अचानक भीड़ बेकाबू हो गई। इसमें वह भीड़ में फंस गए और रामपति समेत कुचले गए। लगभग 40 मिनट तक वे दबे रहे। इस दौरान बचाने के लिए भी कोई आगे नहीं आया। वह भी बेहोश हो गए थे। जब होश आया तो उनके पास ही रामपति का शव मिला। अचानक से बैरिकेडिंग खोले जाने के कारण यह हालात बिगड़े। उनका कहना है कि उनके सामने ही कई शव उठाए गए। 200 से ज्यादा लोग घायल भी हुए थे।
बाक्स
गांव में किया अंतिम संस्कार
महिला रामपति का शव गांव में सुबह लगभग साढ़े आठ बजे पहुंचा। इस दौरान रिश्तेदार व ग्रामीण उनके घर पर शव का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार किया। हादसे में घायल हुआ नरेंद्र का परिवार भी पूरी तरह से सहमा हुआ था। इसमें नरेंद्र, उसकी पत्नी, बहन को भी चोटें आई हुई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
राजपुरा निवासी नरेंद्र ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ गया था। उनके साथ रिश्ते में दादी लगने वाली रामपति भी थी। वह 29 जनवरी की शाम को आठ बजे पहुंचे थे। इसके बाद वह रात को ही संगम घाट पर एक बजे पहुंच गए। जब वहां पर माहौल देखा तो भीड़ बहुत ज्यादा थी। कुछ लोग किलकारियां मार रहे थे। उनको हादसे का आभास हुआ तो उसने रामपति को कहा कि दादी भीड़ ज्यादा है, वापस चलें। इस दौरान वह तुरंत वापस चल पड़े। लगभग 200 फीट चले थे कि अचानक भीड़ बेकाबू हो गई। इसमें वह भीड़ में फंस गए और रामपति समेत कुचले गए। लगभग 40 मिनट तक वे दबे रहे। इस दौरान बचाने के लिए भी कोई आगे नहीं आया। वह भी बेहोश हो गए थे। जब होश आया तो उनके पास ही रामपति का शव मिला। अचानक से बैरिकेडिंग खोले जाने के कारण यह हालात बिगड़े। उनका कहना है कि उनके सामने ही कई शव उठाए गए। 200 से ज्यादा लोग घायल भी हुए थे।
विज्ञापन
बाक्स
गांव में किया अंतिम संस्कार
महिला रामपति का शव गांव में सुबह लगभग साढ़े आठ बजे पहुंचा। इस दौरान रिश्तेदार व ग्रामीण उनके घर पर शव का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार किया। हादसे में घायल हुआ नरेंद्र का परिवार भी पूरी तरह से सहमा हुआ था। इसमें नरेंद्र, उसकी पत्नी, बहन को भी चोटें आई हुई हैं।
विज्ञापन