जींद। अनुसूचित जाति के लोगों का धरना मंगलवार को लघु सचिवालय के बाहर 37वें दिन भी जारी रहा। पीड़ित लोगों ने राष्ट्रपति व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन को सामूहिक रूप से एक पत्र डाक से भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
दिनेश खापड़ ने कहा कि पिछले दिनों राष्ट्रपति भिवानी जिले के सूई गांव में आऐ थे। वहां पर उन्हें उनसे मिलने को रोक दिया गया था। यह सब प्रदेश सरकार के इशारे पर किया गया, ताकि वह राष्ट्रपति से मिलकर प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगों के साथ हो रहे सामाजिक बहिष्कार के मामले के बारे में उनको अवगत नहीं करा सकें। खापड़ ने कहा कि इसलिए मंगलवार को पीड़ितों ने पत्र के माध्यम से राष्ट्रपति और चेयरमैन को अवगत करवाया है। उन्होंने कहा कि गांव खरकगादिया में एक अनुसूचित परिवार ने अत्याचार करने वाले आरोपियों के खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज करवा रखे हैं। मुकदमे दर्ज हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस ने अभी तक दो मुकदमों में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की है। इसी तरह गांव खापड़ व छात्तर में सामाजिक बहिष्कार करने वाले सभी लोगों के खिलाफ मुकदमे तो दर्ज हो चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। दिनेश खापड़ ने कहा कि खापड़ में 27 अगस्त को एक 11 साल की नाबालिग बच्चे को गांव में अलग-अलग जगह पर भीड़ में दस लोगों द्वारा पीटा गया था। इस मामले में पुलिस ने 29 अगस्त को मुकदमा दर्ज किया था। इसमें से पुलिस ने आज तक दस में से केवल तीन लोगों को की ही गिरफ्तारी की थी। एक चौथे व्यक्ति को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया है, जबकि छह आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। गांव खापड़ से पीड़ित बच्चे के परिवार समेत कुल पांच परिवार गांव में सामाजिक बहिष्कार के चलते गांव से बाहर हैं। गांव छात्तर में अनुसूचित जाति का सामाजिक बहिष्कार करने वाले 23 लोगों और गांव खापड़ में सामाजिक बहिष्कार करने वाले चार लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। दोनों मामलों में पुलिस ने अभी तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की है। इसलिए रोष स्वरूप तीनों गांव के पीड़ित लघु सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं।