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Jind News: 30 साल बाद जन्माष्टमी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग
Tue, 05 Sep 2023 11:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 05 Sep 2023 11:44 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। श्री कृष्ण जन्माष्टमी इस बार श्रद्धालुओं के लिए खास रहने वाला है। जन्माष्टमी पर रात में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र व वर्ष के चंद्रमा का दुर्लभ योग के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य की मानें तो ऐसा शुभ संयोग 30 साल बाद बन रहा है। इस योग में पूजा अर्चना विशेष फलदायी है। जन्माष्टमी की शुरुआत छह सितंबर को दोपहर बाद 3:37 से होगी जो सात सितंबर को शाम 4:14 मिनट तक रहेगी।
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्माष्टमी मनाई जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र के योग युक्त होने पर जयंती योग कहलाती है। इसमें बुधवार या सोमवार का योग आ जाए तो वह अत्यंत फलदायी होती है। पंचांग के अनुसार आधी रात के समय रोहिणी में अष्टमी तिथि मिल जाए तो इस समय श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करने से तीन जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं। यह अवसर छह सितंबर को मिलेगा। जन्माष्टमी पर लोग पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का जश्न मनाते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी तिथि की शुरुआत छह सितंबर को दोपहर बाद 3:37 से होगी जो सात सितंबर को शाम 4:14 मिनट तक रहेगी। वहीं जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि पूजा का समय छह सितंबर को मध्यरात्रि 12:02 से 12:48 मिनट तक रहेगा।
शास्त्री ने बताया कि कान्हा का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में हुआ था। छह सितंबर को भी रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत सुबह 9 बजकर 20 मिनट से हो रही है। अगले दिन सात सितंबर को सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर इसका समापन होगा। इसलिए इस बार जन्माष्टमी का पर्व छह सितंबर को ही मनाया जाएगा। वहीं जन्माष्टमी व्रत का पारण सात सितंबर को सुबह छह बजकर 02 मिनट या शाम 4 बजकर 14 मिनट के बाद किया जा सकेगा।
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मंदिरों में दो दिन रहेगी धूम
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में दो दिन धूम रहेगी। दोनों दिन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जयंती देवी मंदिर में जन्माष्टमी पर विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। हाउसिंग बोर्ड स्थित राधा-कृष्णा मंदिर, रेलवे जंक्शन पर स्थित कृष्ण मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है।
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जींद। श्री कृष्ण जन्माष्टमी इस बार श्रद्धालुओं के लिए खास रहने वाला है। जन्माष्टमी पर रात में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र व वर्ष के चंद्रमा का दुर्लभ योग के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य की मानें तो ऐसा शुभ संयोग 30 साल बाद बन रहा है। इस योग में पूजा अर्चना विशेष फलदायी है। जन्माष्टमी की शुरुआत छह सितंबर को दोपहर बाद 3:37 से होगी जो सात सितंबर को शाम 4:14 मिनट तक रहेगी।
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्माष्टमी मनाई जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र के योग युक्त होने पर जयंती योग कहलाती है। इसमें बुधवार या सोमवार का योग आ जाए तो वह अत्यंत फलदायी होती है। पंचांग के अनुसार आधी रात के समय रोहिणी में अष्टमी तिथि मिल जाए तो इस समय श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करने से तीन जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं। यह अवसर छह सितंबर को मिलेगा। जन्माष्टमी पर लोग पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का जश्न मनाते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी तिथि की शुरुआत छह सितंबर को दोपहर बाद 3:37 से होगी जो सात सितंबर को शाम 4:14 मिनट तक रहेगी। वहीं जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि पूजा का समय छह सितंबर को मध्यरात्रि 12:02 से 12:48 मिनट तक रहेगा।
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शास्त्री ने बताया कि कान्हा का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में हुआ था। छह सितंबर को भी रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत सुबह 9 बजकर 20 मिनट से हो रही है। अगले दिन सात सितंबर को सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर इसका समापन होगा। इसलिए इस बार जन्माष्टमी का पर्व छह सितंबर को ही मनाया जाएगा। वहीं जन्माष्टमी व्रत का पारण सात सितंबर को सुबह छह बजकर 02 मिनट या शाम 4 बजकर 14 मिनट के बाद किया जा सकेगा।
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मंदिरों में दो दिन रहेगी धूम
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में दो दिन धूम रहेगी। दोनों दिन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जयंती देवी मंदिर में जन्माष्टमी पर विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। हाउसिंग बोर्ड स्थित राधा-कृष्णा मंदिर, रेलवे जंक्शन पर स्थित कृष्ण मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है।