फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Santhara special path for the welfare of the soul

Jind News: संथारा आत्मा के कल्याण का विशेष मार्ग

Mon, 14 Aug 2023 12:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Mon, 14 Aug 2023 12:11 AM IST
विज्ञापन
Santhara special path for the welfare of the soul
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

सफीदों। नवीन चंद्र महाराज और श्रीपाल मुनि महाराज की उपस्थिति में संथारा ग्रहण करने वाली जैन धर्म की अनुयायी 82 वर्षीय परमेश्वरी देवी के कक्ष में मंगल पाठ चल रहा है। उनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा है। जैन धर्म में संथारे का विशेष महत्व है। यह आत्मा के कल्याण का विशेष मार्ग है। संथारा ग्रहण करने पर शांत और अच्छे भाव से शरीर का त्याग होता है। विनोवा भावे ने भी करीब 9 दिनों तक जैन विधि से संथारा ग्रहण करके देवलोक गमन किया था।
परमेश्वरी देवी के संथारा लेने के संकल्प पर संघ शास्ता श्री सुदर्शन लाल महाराज के सुशिष्य एवं संघनायक श्री नरेश चंद्र महाराज के आज्ञानुवर्ती नवीन चंद्र महाराज एवं श्रीपाल मुनि महाराज ने कहा कि जैन धर्म में संथारे का विशेष महत्व है और आत्मा के कल्याण का विशेष मार्ग है। इस संसार में जो जन्मा है उसकी मौत निश्चित है। जन्म और मौत का नाम ही संसार है। जन्म और मृत्यू के बीच में जो अवस्था है, वहीं जीवन है। संथारा ग्रहण करने पर मनुष्य होशो हवास में जाता है। उस पवित्र आत्मा के मन में कोई राग, द्वेष व विकार नहीं होता। उसकी आत्मा को शुद्ध करके मौत होती है। शांत और अच्छे भाव से शरीर का त्याग होता है। संथारा में मनुष्य की न जीने की और न ही मरने की इच्छा होती है। संथारा में मनुष्य आत्मचिंतन करता है और स्वयं पर दृष्टि रखता है। उन्होंने कहा कि परमेश्वरी देवी बेहद पुण्य आत्मा हैं जिन्होंने संथारा ग्रहण किया है। उनकी मंगलभावना है कि परमेश्वरी देवी का संथारा सुख पूर्वक चलता रहे और उनकी आत्मा का कल्याण हो।
विज्ञापन

उल्लेखनीय है कि संथारा साधिका परमेश्वरी देवी स्व. लाला प्यारेलाल जैन की पुत्रवधू एवं स्व. लाला सदानंद जैन (सिंघाना वाले) की धर्मपत्नी हैं। करीब 3 महीने पूर्व परमेश्वरी देवी को कुछ शारीरिक दिक्कतें हुईं और उनका खाना पीना कम हो गया। उन्होंने 7 द्रव्यों जैसे चाय, दूध, खिचड़ी, दलिया, बिस्किट, रस व पानी को छोड़कर अन्य पदार्थ आजीवन न खाने का प्रण ले लिया। उनका यह व्रत करीब एक महीने तक चला और उसके बाद परमेश्वरी देवी ने सिर्फ 2 समय गर्म जल को छोड़कर अन्य 6 द्रव्यों को भी ग्रहण करना बंद कर दिया। एक महीने तक दो समय गर्म जल पर रहकर परमेश्वरी देवी ने मास खमन किया। इसके बाद उन्होंने 11 अगस्त को सुबह करीब पौने सात बजे अपनी पूरी चेतना में जैन विधि से संथारा ग्रहण कर लिया। उनके संथारा ग्रहण करते ही उनका पूरा घर एक धर्मस्थान के रूप में तब्दील हो गया है और उनके दर्शनों के लिए लोगों का हजूम उमड़ रहा है। परमेश्वरी देवी के कक्ष में जैन धर्म के अनुसार मंगलपाठ व अन्य पूजा-अर्चना चल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed