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कोरोना से साधु और एसएसपी कार्यालय के कर्मचारी की मौत
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कोरोना से मरने वाले साधु का अंतिम संस्कार करते चिकित्सक।
- फोटो : Jind
जिले में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। वीरवार को ढाठरथ गांव के डेरे में बीमारी के चलते साधु की मौत हो गई। जांच करने पर उसे कोरोना संक्रमित पाया गया है। वहीं डीआईजी कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी की भी कोरोना के कारण पीजीआई रोहतक में मौत हो गई है। मरने वाला एसआई रोहतक जिले के लाखनमाजरा का रहने वाला था। ऐसे में यह केस रोहतक जिले का ही माना जाएगा। जिला में अब तक 545 लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 375 लोग ठीक हो चुके हैं।
कोरोना से मौत के बाद साधु के अंतिम संस्कार पर छिड़ी रार
दूसरी ओर कोरोना से साधु की मौत होने के बाद शव के अंतिम संस्कार को लेकर रार छिड़ गई। कोरोना से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नगर परिषद को इसकी सूचना दी और अंतिम संस्कार के लिए कहा। इस पर नगर परिषद ने कहा कि यह लावारिस शव है, ऐसे में इसका अंतिम संस्कार पुलिस द्वारा किया जाएगा। वहीं पुलिस ने कहा कि यह मामला कोरोना से संबंधित है, ऐसे में अंतिम संस्कार नगर परिषद द्वारा किया जाना चाहिए। बाद में स्वास्थ्य विभाग ने स्वयंसेवी संस्था मोक्ष धाम सेवा समिति से अंतिम संस्कार की व्यवस्था करवाई।
गौरतलब है कि सरकारी निर्देशों के अनुसार कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत होने पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था नगर परिषद द्वारा करनी पड़ती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। वीरवार शाम पांच बजे अंतिम संस्कार के लिए शव को तैयार करने के बावजूद साढ़े छह बजे के बाद ही बनखंड महादेवी शमशानघाट में अंतिम संस्कार हो सका।
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दो हजार रुपये के खर्च के लिए रुका रहा अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार में सिर्फ लकड़ियों की व्यवस्था करनी होती है। सामान्यतौर पर दो से ढाई हजार रुपये की लकड़ी लगती है। ऐसे में तीन सरकारी विभाग शव को इसके लिए रखे रहे।
सूचना पर करवाई व्यवस्था
हमारी संस्था लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करती है। वीरवार को भी इसकी सूचना मिली थी। ऐसे में फोन कर शमशानघाट में लकड़ियों के लिए बोल दिया गया था। यह कोई विशेष बात नहीं है।
अनिल जैन, सदस्य, मोक्ष धाम सेवा समिति।
जानकारी के अभाव में हुई देरी
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया। लावारिस शव होने के कारण नगर परिषद के नोडल अधिकारी ने पुलिस से अंतिम संस्कार के लिए कहा था। जब नियमों की जानकारी मिली तो अंतिम संस्कार करवा दिया गया।
डॉ. एसके चौहान, कार्यकारी अधिकारी, जींद नगर परिषद।
नगर परिषद की रही लापरवाही
नियम यह है कि किसी भी कोरोना संक्रमित की मौत होने पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था नगर परिषद को करवानी होती है। इसके लिए जो कर्मचारी जाते हैं, उनको पैसे तक देने का प्रावधान है। नगर परिषद की लापरवाही के कारण करीब एक घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार हो पाया। नगर परिषद को बोल दिया गया है कि कोरोना संक्रमित का अंतिम संस्कार करवाने की जिम्मेदार उनकी है।
डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
प्रोफेसर, एक परिवार के चार सदस्यों सहित 15 लोग मिले संक्रमित
वीरवार को महिला कॉलेज की प्रोफेसर सहित कुल 15 लोगों को कोरोना संक्रमित पाया गया। ऐसे में 29 अगस्त तक कॉलेज परिसर को सील कर दिया गया है। वहीं रोहतक रोड निवासी 23 और 24 वर्षीय महिला, तोपखाना मोहल्ला निवासी महिला को संक्रमित पाया गया है। सेक्टर 11 निवासी पॉजिटिव महिला के संपर्क में आने से उसकी तीन वर्षीय पौत्री, रोहतक रोड निवासी बैंक में कार्यरत 36 वर्षीय व्यक्ति को भी संक्रमित पाया गया है। सफीदों के वार्ड नंबर छह में एक ही परिवार के चार लोगों को पॉजिटिव पाया गया है। अदालत परिसर में छह वर्षीय बालिका तथा 30 वर्षीय व्यक्ति पॉजिटिव मिले हैं, जबकि गांव मलार का 60 वर्षीय व्यक्ति भी संक्रमित मिला है। कोविड-19 के नोडल अधिकारी डॉ. पालेराम ने बताया कि वीरवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली रिपोर्ट में 15 लोगों को कोरोना संक्रमित पाया गया है।
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कोरोना से मौत के बाद साधु के अंतिम संस्कार पर छिड़ी रार
दूसरी ओर कोरोना से साधु की मौत होने के बाद शव के अंतिम संस्कार को लेकर रार छिड़ गई। कोरोना से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नगर परिषद को इसकी सूचना दी और अंतिम संस्कार के लिए कहा। इस पर नगर परिषद ने कहा कि यह लावारिस शव है, ऐसे में इसका अंतिम संस्कार पुलिस द्वारा किया जाएगा। वहीं पुलिस ने कहा कि यह मामला कोरोना से संबंधित है, ऐसे में अंतिम संस्कार नगर परिषद द्वारा किया जाना चाहिए। बाद में स्वास्थ्य विभाग ने स्वयंसेवी संस्था मोक्ष धाम सेवा समिति से अंतिम संस्कार की व्यवस्था करवाई।
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गौरतलब है कि सरकारी निर्देशों के अनुसार कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत होने पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था नगर परिषद द्वारा करनी पड़ती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। वीरवार शाम पांच बजे अंतिम संस्कार के लिए शव को तैयार करने के बावजूद साढ़े छह बजे के बाद ही बनखंड महादेवी शमशानघाट में अंतिम संस्कार हो सका।
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दो हजार रुपये के खर्च के लिए रुका रहा अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार में सिर्फ लकड़ियों की व्यवस्था करनी होती है। सामान्यतौर पर दो से ढाई हजार रुपये की लकड़ी लगती है। ऐसे में तीन सरकारी विभाग शव को इसके लिए रखे रहे।
सूचना पर करवाई व्यवस्था
हमारी संस्था लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करती है। वीरवार को भी इसकी सूचना मिली थी। ऐसे में फोन कर शमशानघाट में लकड़ियों के लिए बोल दिया गया था। यह कोई विशेष बात नहीं है।
अनिल जैन, सदस्य, मोक्ष धाम सेवा समिति।
जानकारी के अभाव में हुई देरी
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया। लावारिस शव होने के कारण नगर परिषद के नोडल अधिकारी ने पुलिस से अंतिम संस्कार के लिए कहा था। जब नियमों की जानकारी मिली तो अंतिम संस्कार करवा दिया गया।
डॉ. एसके चौहान, कार्यकारी अधिकारी, जींद नगर परिषद।
नगर परिषद की रही लापरवाही
नियम यह है कि किसी भी कोरोना संक्रमित की मौत होने पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था नगर परिषद को करवानी होती है। इसके लिए जो कर्मचारी जाते हैं, उनको पैसे तक देने का प्रावधान है। नगर परिषद की लापरवाही के कारण करीब एक घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार हो पाया। नगर परिषद को बोल दिया गया है कि कोरोना संक्रमित का अंतिम संस्कार करवाने की जिम्मेदार उनकी है।
डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
प्रोफेसर, एक परिवार के चार सदस्यों सहित 15 लोग मिले संक्रमित
वीरवार को महिला कॉलेज की प्रोफेसर सहित कुल 15 लोगों को कोरोना संक्रमित पाया गया। ऐसे में 29 अगस्त तक कॉलेज परिसर को सील कर दिया गया है। वहीं रोहतक रोड निवासी 23 और 24 वर्षीय महिला, तोपखाना मोहल्ला निवासी महिला को संक्रमित पाया गया है। सेक्टर 11 निवासी पॉजिटिव महिला के संपर्क में आने से उसकी तीन वर्षीय पौत्री, रोहतक रोड निवासी बैंक में कार्यरत 36 वर्षीय व्यक्ति को भी संक्रमित पाया गया है। सफीदों के वार्ड नंबर छह में एक ही परिवार के चार लोगों को पॉजिटिव पाया गया है। अदालत परिसर में छह वर्षीय बालिका तथा 30 वर्षीय व्यक्ति पॉजिटिव मिले हैं, जबकि गांव मलार का 60 वर्षीय व्यक्ति भी संक्रमित मिला है। कोविड-19 के नोडल अधिकारी डॉ. पालेराम ने बताया कि वीरवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली रिपोर्ट में 15 लोगों को कोरोना संक्रमित पाया गया है।